सड़क हादसों में मदद पर ₹25 हजार इनाम, नूंह में राहवीर योजना लागू

Digital Desk
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सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की समय पर मदद करने वालों के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘राहवीर योजना’ अब हरियाणा के नूंह जिले में प्रभावी रूप से लागू हो गई है। इस योजना के तहत यदि कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल को ‘गोल्डन आवर’ यानी दुर्घटना के पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे 25,000 रुपये नकद इनाम और प्रशंसा प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को बिना डर और झिझक के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करना है।

नूंह जिला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे और दिल्ली-अलवर रोड जैसे व्यस्त मार्गों से होकर गुजरता है, जहां सड़क हादसों की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में यह योजना यहां विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई राहवीर योजना का मकसद सड़क दुर्घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण समय, यानी गोल्डन आवर, में घायलों को जीवन रक्षक सहायता दिलाना है। विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी दौरान समय पर इलाज मिलने से जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

अक्सर लोग कानूनी झंझट या पुलिस कार्रवाई के डर से मदद करने से कतराते हैं। इस योजना के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि मदद करने वाले व्यक्ति को न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उसे सम्मानित भी किया जाएगा।

राहवीर योजना के तहत यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना की सूचना पुलिस को देता है या सीधे घायल को अस्पताल पहुंचाता है, तो पुलिस या अस्पताल की ओर से प्रमाण दिया जाता है। इसके बाद जिला स्तर पर गठित अप्रेजल कमेटी मामले की जांच करती है। जांच में यह पुष्टि होने पर कि घायल को गोल्डन आवर में सहायता मिली, उस राहवीर को पुरस्कार देने की सिफारिश की जाती है।

नूंह जिले में यह कमेटी डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में काम कर रही है। पुरस्कार की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। एक व्यक्ति एक वर्ष में अधिकतम पांच बार इस पुरस्कार का पात्र हो सकता है।

नूंह जिला, जिसे मेवात क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, अपनी सामाजिक परंपराओं और मानवता के लिए जाना जाता है। पुलिस प्रवक्ता कृष्ण कुमार के अनुसार, यहां के लोग हमेशा से सड़क हादसों में घायलों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। कई बार स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पीड़ितों को बचाते हैं।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए कई बड़े हादसों में स्थानीय लोगों ने समय रहते घायलों को अस्पताल पहुंचाकर कई जानें बचाई हैं। केएमपी एक्सप्रेसवे पर श्रद्धालुओं की बस में आग लगने की घटना इसका बड़ा उदाहरण है, जब ग्रामीणों ने जलती बस से यात्रियों को बाहर निकालकर सराहनीय साहस दिखाया।

राहवीर योजना को सफल बनाने के लिए नूंह पुलिस और जिला प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि मदद करने पर उन्हें किसी प्रकार की कानूनी परेशानी नहीं होगी। साथ ही उन्हें यह भी जानकारी दी जा रही है कि योजना का लाभ कैसे लिया जा सकता है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तेज रफ्तार, यातायात नियमों का उल्लंघन और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण जिले में हर महीने दर्जनों सड़क हादसे होते हैं। इन हादसों में कई बार समय पर मदद न मिलने से जान चली जाती है। राहवीर योजना इस स्थिति को बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।

हालांकि यह योजना नूंह जिले में लागू की गई है, लेकिन इसका संदेश उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लिए भी बेहद प्रासंगिक है। यूपी में भी एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है। यदि लोग बिना डर के घायलों की मदद करें, तो हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे प्रोत्साहन आधारित मॉडल से समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। जब मदद करने वालों को सम्मान और पुरस्कार मिलता है, तो अन्य लोग भी प्रेरित होते हैं।

राहवीर योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश है। यह योजना बताती है कि सड़क पर घायल किसी अजनबी की मदद करना केवल नैतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि समाज और सरकार द्वारा सम्मानित कार्य भी है।

नूंह पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और यदि कहीं दुर्घटना हो जाए, तो बिना डर के आगे आएं। एक सही समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

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