महादेव का पावन सावन शुरू! इन 7 भूलों से बचेंगे तो बरसेगी भोलेनाथ की कृपा

Editorial
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 भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीना श्रावण (सावन) 2026 आज से शुरू हो गया है। सावन के पहले ही दिन देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। शिवभक्त जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।इस वर्ष सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और भंडारों का आयोजन होगा। लाखों कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। वहीं मंदिर समितियों ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

सावन में क्यों बढ़ जाता है भगवान शिव की पूजा का महत्व?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर संसार की रक्षा की थी। मान्यता है कि उस समय देवताओं ने उन्हें जल अर्पित कर विष की तपिश को शांत किया था। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि इस महीने शिव की पूजा करने से विवाह, संतान, स्वास्थ्य, धन और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के लिए भेजी जाएगी विशेष धार्मिक सामग्री

आगरा के प्रसिद्ध कैलाश महादेव मंदिर से सावन के पहले दिन विशेष धार्मिक सामग्री 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के लिए भेजी जाएगी। मंदिर के महंत गौरव गिरि के अनुसार कैलाश महादेव मंदिर से ताम्रपत्र, पवित्र सिक्का, रुद्राक्ष, भगवान शिव पर चढ़ाया गया जल, मंदिर की पवित्र रज और कंकड़ को एक कलश में रखकर विधि-विधान से अभिमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद निर्माणाधीन 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर में इनकी स्थापना की जाएगी। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

सावन में भूलकर भी न करें ये 7 काम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में कुछ नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। इन नियमों का पालन करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, जबकि इनकी अनदेखी करना शुभ नहीं माना जाता।

1. मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से रहें दूर

सावन के पूरे महीने सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान मांसाहार, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन करने से पूजा का फल कम हो जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस पूरे महीने सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं।

2. हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन सीमित करें

शास्त्रों में सावन के दौरान साग खाने से बचने की बात कही गई है। धार्मिक कारणों के अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस मौसम में पत्तेदार सब्जियों में कीटाणु और कीड़े अधिक पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए इस दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

3. शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं

भगवान शिव की पूजा में हल्दी का विशेष उपयोग नहीं किया जाता। मान्यता है कि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है, इसलिए उस पर हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। यदि हल्दी चढ़ानी हो तो उसे जलाधारी पर अर्पित करना उचित माना जाता है।

4. दूध का करें सदुपयोग

सावन में शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करने की परंपरा है, लेकिन कई विद्वानों का मानना है कि इस मौसम में अत्यधिक दूध का सेवन शरीर में पित्त बढ़ा सकता है। इसलिए संयमित मात्रा में ही दूध का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

5. बैंगन खाने से करें परहेज

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में बैंगन का सेवन शुभ नहीं माना जाता। वहीं वैज्ञानिक कारण यह भी है कि बरसात के मौसम में बैंगन में कीड़े लगने की संभावना अधिक रहती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

6. किसी का अपमान न करें

सावन का महीना संयम, सेवा और सदाचार का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान माता-पिता, गुरु, बुजुर्ग, भाई-बहन, जीवनसाथी, मित्र और विद्वानों का सम्मान करना चाहिए। किसी का अपमान या कटु व्यवहार करने से बचना चाहिए।

7. गाय और सांड को न भगाएं

यदि सावन के दौरान आपके घर के बाहर गाय या सांड आ जाए तो उन्हें मारकर भगाने की बजाय भोजन या पानी देना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सांड भगवान शिव के वाहन नंदी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए उनका सम्मान करना पुण्यदायी माना गया है।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

सावन में भगवान शिव की पूजा के दौरान जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, भस्म, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पत्ते टूटे हुए न हों और उनकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रहे।

श्रद्धा के साथ-साथ विवेक भी जरूरी

धार्मिक आस्थाएं लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि खान-पान और पूजा से जुड़े कई नियम परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। स्वास्थ्य संबंधी मामलों में व्यक्ति को अपनी उम्र, स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। यदि किसी को उपवास या विशेष आहार से परेशानी हो तो डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा।

सावन का संदेश

श्रावण केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा, प्रकृति संरक्षण और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी अवसर है। भगवान शिव की आराधना के साथ यदि व्यक्ति अच्छे विचार, सात्विक आचरण और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना रखे, तो यही सच्ची शिवभक्ति मानी जाती है। इस पावन महीने में श्रद्धा, विश्वास और सद्कर्म के साथ की गई आराधना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।

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