कम या ज्यादा नींद का शरीर पर असर, जानें कितनी नींद है जरूरी

Editorial
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नींद सिर्फ आराम करने का समय नहीं है, बल्कि शरीर और दिमाग को दोबारा ऊर्जा देने की एक जरूरी प्रक्रिया है। अच्छी नींद के दौरान शरीर कई महत्वपूर्ण काम करता है। दिमाग दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है, शरीर को आराम मिलता है और अगले दिन के लिए ऊर्जा तैयार होती है। यही वजह है कि नींद की कमी का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मूड, पढ़ाई या काम पर ध्यान, याददाश्त और रोजमर्रा की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।लेकिन सवाल यह है कि कितने घंटे की नींद पर्याप्त है? क्या 7-8 घंटे से कम सोना नुकसानदायक है? और क्या जरूरत से ज्यादा सोना भी शरीर के लिए ठीक नहीं है?स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की जरूरत उम्र और व्यक्ति की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। किशोरों को आम तौर पर वयस्कों की तुलना में अधिक नींद की जरूरत होती है। इसलिए केवल 7-8 घंटे को हर उम्र के लिए एक निश्चित नियम मानना सही नहीं है।

कितने घंटे की नींद जरूरी है?

विशेषज्ञों के अनुसार नींद की जरूरत उम्र के साथ बदलती है। 13-18 साल के किशोरों को आम तौर पर 8-10 घंटे की नींद की जरूरत होती है, जबकि अधिकांश वयस्कों के लिए करीब 7-9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है।इसलिए अगर कोई किशोर लगातार 7 घंटे से कम सो रहा है, तो यह उसकी जरूरत के मुकाबले कम हो सकता है। वहीं किसी व्यक्ति की नींद की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी नींद की अवधि।यानी सिर्फ बिस्तर पर 8 घंटे रहना पर्याप्त नहीं है। बार-बार नींद खुलना, देर रात तक स्क्रीन देखना या सोने-जागने का समय लगातार बदलना भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

कम नींद लेने पर शरीर में क्या होता है?

अगर कभी-कभार किसी रात कम नींद हो जाए तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन लगातार नींद पूरी न होना शरीर और दिमाग पर असर डाल सकता है।

1. दिनभर थकान और सुस्ती

नींद पूरी न होने पर अगले दिन शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। बार-बार जम्हाई आना, सुस्ती और किसी काम में मन न लगना इसके सामान्य प्रभाव हो सकते हैं।

2. ध्यान और एकाग्रता प्रभावित

कम नींद का असर फोकस और ध्यान लगाने की क्षमता पर पड़ सकता है। विद्यार्थियों में इसका असर पढ़ाई, सीखने और जानकारी याद रखने की क्षमता पर दिखाई दे सकता है।

3. मूड में बदलाव

नींद की कमी से व्यक्ति चिड़चिड़ा या भावनात्मक रूप से परेशान महसूस कर सकता है। लंबे समय तक नींद की समस्या रहने पर मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

4. याददाश्त और सीखने पर असर

नींद दिमाग की सीखने और यादों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए लगातार कम नींद लेने पर नई चीजें सीखने और याद रखने में परेशानी महसूस हो सकती है।

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर

पर्याप्त और नियमित नींद शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक खराब नींद रहने पर शरीर संक्रमण और बीमारियों से निपटने की क्षमता में बदलाव महसूस कर सकता है।

क्या रोज 7-8 घंटे से कम सोना नुकसानदायक है?

अगर किसी व्यक्ति की उम्र के हिसाब से उसकी नींद की जरूरत 7-8 घंटे या उससे अधिक है और वह लगातार उससे कम सोता है, तो Sleep Debt यानी नींद की कमी जमा हो सकती है।उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को 8 घंटे की नींद की जरूरत है लेकिन वह लगातार 6 घंटे ही सोता है, तो रोजाना लगभग 2 घंटे की नींद कम हो रही है। कई दिनों तक ऐसा होने पर थकान और दिन में नींद आने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।किशोरों के लिए यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस उम्र में शरीर और दिमाग अभी विकास की प्रक्रिया में होते हैं। इसलिए नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेना जरूरी है।

ज्यादा नींद लेने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

जिस तरह लंबे समय तक कम नींद चिंता का विषय हो सकती है, उसी तरह लगातार जरूरत से ज्यादा सोना भी हमेशा अच्छी नींद का संकेत नहीं माना जाता।कभी-कभार छुट्टी वाले दिन ज्यादा सो जाना सामान्य हो सकता है, खासकर अगर पहले कई दिनों से नींद कम हुई हो। लेकिन यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से बहुत ज्यादा सोने के बावजूद तरोताजा महसूस नहीं करता, तो इसके पीछे कोई अन्य कारण हो सकता है।जरूरत से ज्यादा सोने के साथ कुछ लोगों में दिनभर सुस्ती, सिर भारी लगना, दिनचर्या बिगड़ना और शारीरिक गतिविधि कम होने जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं।यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि लंबे समय तक ज्यादा सोना कई बार किसी स्वास्थ्य समस्या या खराब नींद की गुणवत्ता का संकेत हो सकता है। इसलिए ज्यादा नींद को सीधे बीमारी का कारण मानना सही नहीं है।

क्या ज्यादा सोने का कोई फायदा भी है?

अगर शरीर में नींद की कमी जमा हो गई है, तो अतिरिक्त नींद कुछ हद तक रिकवरी में मदद कर सकती है। बीमारी या अधिक थकान के दौरान भी शरीर को सामान्य से ज्यादा आराम की जरूरत महसूस हो सकती है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि रोज जरूरत से कई घंटे ज्यादा सोना स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। स्वस्थ नींद के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपनी उम्र के अनुसार पर्याप्त और नियमित नींद ले।

नींद पूरी न होने पर शरीर में दिख सकते हैं ये संकेत

अगर आपकी नींद लगातार पूरी नहीं हो रही है, तो शरीर कुछ संकेत दे सकता है:

  • सुबह उठने में बहुत परेशानी होना
  • दिन में बार-बार नींद आना
  • पढ़ाई या काम में ध्यान न लगना
  • छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन
  • चीजें याद रखने में परेशानी
  • लगातार थकान महसूस होना
  • प्रतिक्रिया देने की क्षमता धीमी लगना
  • रोजमर्रा के काम करने में ऊर्जा की कमी

अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहती हैं, तो नींद की दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।

नींद पूरी करने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बेहतर नींद के लिए कुछ सामान्य आदतें मददगार हो सकती हैं।

एक निश्चित Sleep Schedule बनाएं: रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।

सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें: मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी और लगातार कंटेंट देखना सोने में बाधा डाल सकता है।

कैफीन का सेवन देर शाम न करें: चाय, कॉफी और कैफीन वाले अन्य पेय कुछ लोगों की नींद प्रभावित कर सकते हैं।

दिन में शारीरिक गतिविधि रखें: नियमित शारीरिक गतिविधि नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकती है।

सोने का माहौल शांत रखें: कम रोशनी, आरामदायक तापमान और शांत वातावरण अच्छी नींद में मदद कर सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

अगर पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद लगातार नींद पूरी नहीं होती, रात में बार-बार नींद खुलती है, बहुत तेज खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस लेने में परेशानी महसूस होती है या दिनभर अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।इसी तरह अगर कोई व्यक्ति लगातार बहुत ज्यादा सो रहा है और फिर भी तरोताजा महसूस नहीं करता, तो भी विशेषज्ञ से बात करना उचित है।

 सिर्फ घंटे नहीं, नींद की गुणवत्ता भी जरूरी

अच्छी नींद स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कम नींद लेने से थकान, ध्यान और मूड पर असर पड़ सकता है, जबकि लगातार जरूरत से ज्यादा सोना भी हमेशा स्वास्थ्य का संकेत नहीं माना जाता।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नींद की जरूरत उम्र के अनुसार बदलती है। किशोरों को आम तौर पर 8-10 घंटे और वयस्कों को करीब 7-9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। इसलिए 7-8 घंटे को हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नियम मानना सही नहीं है।अगर लगातार नींद पूरी नहीं हो रही है या पर्याप्त नींद के बाद भी दिनभर थकान और नींद बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही Sleep Routine अपनाने के साथ जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर कदम है।

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