रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य और आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ युवा पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन से जोड़ने के उद्देश्य से फर्रुखाबाद में तीन दिवसीय ‘श्रीकृष्ण महारास’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। श्री विश्वनाथ सामाजिक सेवा संस्थान की ओर से संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम 11 से 13 सितंबर तक बद्री विशाल कॉलेज, फर्रुखाबाद में चलेगा।आयोजकों के मुताबिक, तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष आयोजन में चित्रकला, संगीत, नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व, उनके जीवन-दर्शन और भारतीय संस्कृति के विभिन्न पक्षों को सामने रखा जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न होकर भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन से युवाओं को जोड़ने की पहल
श्री विश्वनाथ सामाजिक सेवा संस्थान के मंत्री सुरेन्द्र पाण्डेय और कोषाध्यक्ष आकांक्षा सक्सेना ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए तीन दिवसीय श्रीकृष्ण महारास कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है।आयोजकों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनके जीवन में कर्मयोग, नेतृत्व, नीति, कर्तव्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक संदेश भी मिलते हैं। कार्यक्रम के दौरान इन्हीं पहलुओं को कला और विचारों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

11 सितंबर को होगी चित्रकला प्रतियोगिता
कार्यक्रम का शुभारंभ 11 सितंबर को सुबह 10 बजे चित्रकला प्रतियोगिता के साथ होगा। प्रतियोगिता में प्रतिभागी भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े विभिन्न विषयों को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।चित्रकला प्रतियोगिता के जरिए बच्चों और युवाओं को श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, कला के माध्यम से किसी विषय को समझने और उसे अपनी कल्पना के जरिए प्रस्तुत करने का अनुभव युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।इस प्रतियोगिता के संयोजक अरविन्द दीक्षित हैं। प्रतियोगिता को लेकर आयोजकों की ओर से प्रतिभागियों के बीच उत्साह का माहौल बताया गया है।
12 सितंबर को सजेगी भव्य सांस्कृतिक संध्या
तीन दिवसीय आयोजन का सबसे आकर्षक कार्यक्रम 12 सितंबर की शाम पांच बजे आयोजित होने वाली भव्य सांस्कृतिक संध्या होगी। इस कार्यक्रम की थीम ‘भगवान श्रीकृष्ण महारास’ रखी गई है।सांस्कृतिक संध्या में गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, प्रेम, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। कलाकारों की प्रस्तुतियों के जरिए श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों और उनके आध्यात्मिक संदेशों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।आयोजकों का मानना है कि संगीत और नृत्य भारतीय संस्कृति की अभिव्यक्ति के प्रमुख माध्यम रहे हैं। ऐसे में सांस्कृतिक संध्या के माध्यम से युवा वर्ग और आम लोगों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
13 सितंबर को श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन पर होगी विचार गोष्ठी
कार्यक्रम के अंतिम दिन 13 सितंबर को सुबह 11 बजे विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। गोष्ठी का विषय ‘आधुनिक राजनीतिक परिदृश्य में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन की प्रासंगिकता’ रखा गया है।इस गोष्ठी में विद्वान भगवान श्रीकृष्ण के कर्मयोग, नेतृत्व, नीति, कर्तव्यबोध और सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार रखेंगे। बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिवेश में श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन की उपयोगिता और प्रासंगिकता पर भी चर्चा की जाएगी।गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. मनमोहन लाल गोस्वामी, पूर्व प्राचार्य भारतीय महाविद्यालय, फर्रुखाबाद होंगे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राजेश हजेला हैं, जबकि बद्री विशाल कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष विनोद दुबे स्वागताध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाएंगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, श्रीकृष्ण महारास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। विशेष रूप से युवाओं को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके विचारों से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है।आयोजकों का कहना है कि श्रीकृष्ण का जीवन संघर्षों के बीच कर्तव्य निभाने, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने और कर्म को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देता है। ऐसे विचार आज के सामाजिक परिवेश में भी प्रासंगिक हैं। इसी विचार को केंद्र में रखकर कार्यक्रम में धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ वैचारिक चर्चा को भी शामिल किया गया है।
कई संस्थाओं का मिल रहा सहयोग
तीन दिवसीय श्रीकृष्ण महारास कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न संस्थाओं का सहयोग प्राप्त हो रहा है। आयोजन में संस्कार भारती, रेलवे पैसेंजर वेलफेयर एसोसिएशन, आस विकास सीड फाउंडेशन और एशियन कंप्यूटर इंस्टीट्यूट सहयोगी संस्थाओं के रूप में जुड़े हैं।आयोजन की तैयारियों को लेकर संस्थान के पदाधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं से जुड़े लोगों की ओर से लगातार समन्वय किया जा रहा है। इस दौरान नवीन मिश्रा नब्बू और श्रद्धा मिश्रा भी मौजूद रहे।
तीन दिनों में संस्कृति, कला और विचारों का संगम
फर्रुखाबाद में 11 से 13 सितंबर तक होने वाला श्रीकृष्ण महारास कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, कला और विचारों का संगम बनने जा रहा है। पहले दिन चित्रकला प्रतियोगिता के जरिए रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, दूसरे दिन सांस्कृतिक संध्या में श्रीकृष्ण की लीलाओं और भारतीय परंपराओं की रंगारंग प्रस्तुति होगी, जबकि अंतिम दिन विचार गोष्ठी में आधुनिक संदर्भों में श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन पर मंथन किया जाएगा।इस तरह तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ कला, संस्कृति, साहित्य, आध्यात्मिकता और वैचारिक विमर्श को एक मंच पर लाने का प्रयास करेगा।
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