वॉशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ऐसा दावा किया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप का कहना है कि नवंबर में होने वाले अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद ईरान के साथ चल रही लड़ाई खत्म हो सकती है। हालांकि, दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों की ओर से युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान युद्ध के भविष्य को लेकर एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों पक्षों के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाई का दौर जारी रहने के बीच अब ट्रंप के बयान ने सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर क्या मिडटर्म चुनाव के बाद वाकई इस युद्ध को रोकने की दिशा में कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा?
ट्रंप बोले- चुनाव के तुरंत बाद खत्म हो सकती है लड़ाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका में नवंबर के मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद ईरान के साथ चल रही लड़ाई खत्म हो जाएगी।ट्रंप ने इसके पीछे ईरान की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि तेहरान अब ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखते हुए उसे बातचीत या समझौते की दिशा में लाने की कोशिश कर रहा है।ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इस आरोप और उसके संभावित प्रभाव को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

क्या चुनाव के बाद बदल जाएगी अमेरिका की रणनीति?
ट्रंप के बयान का सबसे अहम पहलू अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। नवंबर में होने वाले इन चुनावों का अमेरिकी घरेलू राजनीति पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है। ऐसे में ट्रंप का युद्ध को चुनाव के बाद खत्म होने से जोड़ना राजनीतिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से चर्चा का विषय बन गया है।अगर अमेरिका वास्तव में चुनाव के बाद युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाता है, तो इसके लिए सैन्य कार्रवाई रोकने के साथ-साथ ईरान के साथ किसी तरह की कूटनीतिक पहल भी जरूरी हो सकती है।अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के पास युद्ध समाप्त करने को लेकर कोई ठोस योजना है या उनका बयान मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित राजनीतिक आकलन है।
अमेरिकी अधिकारियों की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
ट्रंप के दावे के बीच एक अलग आकलन भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के कुछ प्रमुख सलाहकार निजी तौर पर यह चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान के साथ संघर्ष उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के बचे हुए करीब दो वर्षों तक भी जारी रह सकता है।अगर यह आकलन सही साबित होता है तो यह ट्रंप के उस बयान से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है, जिसमें उन्होंने मिडटर्म चुनाव के बाद युद्ध खत्म होने की संभावना जताई है।यही वजह है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर अभी किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। एक तरफ राष्ट्रपति युद्ध के जल्द खत्म होने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके प्रशासन के भीतर लंबे संघर्ष की आशंका भी बताई जा रही है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बढ़ा दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी यानी IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने ईरान के परमाणु नियमों के कथित अनुपालन न करने के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजने के लिए मतदान किया है।रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्ताव को 23-3 वोटों से मंजूरी मिली, जबकि आठ सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस, चीन और नाइजर ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।इस घटनाक्रम को ईरान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ईरान ने प्रस्ताव को बताया अमेरिकी दबाव का नतीजा
IAEA में ईरान के प्रतिनिधि ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे अमेरिकी दबाव का परिणाम बताया। ईरानी पक्ष ने प्रस्ताव के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा।ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के आरोपों का विरोध करता रहा है। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देश तेहरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता जताते रहे हैं।ऐसे में IAEA का कदम अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक और महत्वपूर्ण मोर्चा खोल सकता है।
आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा अमेरिका
ईरान पर सैन्य कार्रवाई के साथ अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी है। वाशिंगटन का उद्देश्य तेहरान पर ऐसा दबाव बनाना है जिससे ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में बातचीत की गुंजाइश बने।लेकिन ईरान की ओर से अमेरिकी दबाव को स्वीकार करने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। यही वजह है कि सैन्य टकराव के साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव बरकरार है।
दुनिया की नजर अब नवंबर के चुनाव पर
ट्रंप के बयान के बाद अब पूरी दुनिया की नजर नवंबर में होने वाले अमेरिका के मिडटर्म चुनाव पर टिक गई है। सवाल यह है कि चुनाव के बाद अमेरिका वास्तव में ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगा या संघर्ष किसी नए चरण में प्रवेश करेगा।अगर ट्रंप का दावा सही साबित होता है तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा। इससे तेल बाजार, वैश्विक कूटनीति और अमेरिका की विदेश नीति पर भी असर पड़ सकता है।वहीं अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो अमेरिका के सामने सैन्य खर्च, क्षेत्रीय अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव जैसी कई चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
ट्रंप के दावे से बढ़ी हलचल, लेकिन तस्वीर अभी साफ नहीं
अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर डोनल्ड ट्रंप का मिडटर्म चुनाव के बाद लड़ाई खत्म होने का दावा निश्चित तौर पर बड़ा बयान है। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के कथित अलग आकलन और ईरान के कड़े रुख को देखते हुए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि युद्ध वास्तव में कब खत्म होगा।एक तरफ सैन्य संघर्ष जारी है, दूसरी तरफ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर IAEA की कार्रवाई ने कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अगले कदम यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि यह संघर्ष समाप्ति की ओर बढ़ता है या फिर मध्य पूर्व में तनाव का एक नया अध्याय शुरू होता है।
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