नीम करौली बाबा का नाम सामने आते ही सबसे पहले उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम की तस्वीर सामने आती है। देश ही नहीं, विदेशों में भी बाबा के लाखों श्रद्धालु हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और साधना से जुड़ी शुरुआती प्रमुख जगह उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में स्थित नीब करौरी गांव मानी जाती है? इसी गांव से जुड़ी एक बेहद चर्चित कथा यह भी है कि एक समय ट्रेन में सफर कर रहे बाबा को बिना टिकट होने के कारण नीचे उतार दिया गया था और इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी।यह घटना आज भी नीम करौली बाबा से जुड़ी लोककथाओं में प्रमुखता से सुनाई जाती है। इसी कथा के मुताबिक, बाबा की शर्त पर बाद में यहां रेलवे स्टेशन बनाया गया। हालांकि, इस घटना से जुड़े चमत्कार के दावों का स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण अलग-अलग स्रोतों में स्पष्ट नहीं मिलता है।
कौन थे नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा को उनके भक्त एक महान संत और हनुमान भक्त के रूप में मानते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ माना जाता है। उनका बचपन का नाम लक्ष्मीनारायण बताया जाता है। कम उम्र से ही उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर था।बाबा के जीवन से जुड़ी परंपराओं के अनुसार, उन्होंने किशोरावस्था में ही सांसारिक जीवन से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। आगे चलकर उन्होंने साधना और भक्ति का मार्ग अपनाया। उनकी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्हें अलग-अलग स्थानों पर साधना करते हुए देखा गया।कहा जाता है कि गुजरात में उन्होंने एक संत की शरण ली, जहां उन्हें लक्ष्मणदास नाम मिला। इसके बाद उनकी साधना का सफर आगे बढ़ा और वह फर्रुखाबाद क्षेत्र के नीब करौरी गांव पहुंचे।

फर्रुखाबाद का नीब करौरी गांव क्यों है खास?
नीब करौरी गांव बाबा के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जगहों में गिना जाता है। मान्यता है कि बाबा ने यहां काफी समय तक साधना की। स्थानीय लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई और लोग उन्हें नीब करौरी बाबा कहकर पुकारने लगे।समय के साथ बोलचाल में नीब करौरी नाम बदलकर नीम करौली बाबा के रूप में अधिक प्रसिद्ध हो गया। आज देशभर में बाबा इसी नाम से जाने जाते हैं।यही वजह है कि बाबा के जीवन को समझने वालों के लिए फर्रुखाबाद का यह गांव खास महत्व रखता है। हालांकि आज उनकी सबसे प्रसिद्ध पहचान उत्तराखंड के कैंची धाम से जुड़ी हुई है।
ट्रेन से उतारे जाने की क्या है कहानी?
नीब करौरी गांव और बाबा से जुड़ी सबसे चर्चित कहानियों में एक ट्रेन की घटना भी है। लोकप्रचलित कथा के अनुसार, बाबा एक बार ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे। उनके पास टिकट नहीं था। जांच के दौरान अंग्रेज अधिकारी और रेलवे कर्मचारियों ने उन्हें ट्रेन से नीचे उतार दिया।कहानी के अनुसार, बाबा ट्रेन से उतरकर रेलवे लाइन के पास ही एक जगह बैठ गए और ध्यान-साधना में लीन हो गए। इसके बाद ट्रेन को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, लेकिन ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी।रेलवे कर्मचारियों ने इंजन की जांच की और उसमें दोबारा कोयला भी डाला, लेकिन ट्रेन आगे नहीं चली। इस घटना को बाबा के भक्त उनकी आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ते हैं। हालांकि, इस चमत्कारिक दावे को ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रमाणित करने वाले स्वतंत्र दस्तावेज स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
बाबा के सामने झुकना पड़ा अंग्रेज अधिकारी को?
लोककथा के अनुसार, जब ट्रेन काफी कोशिश के बाद भी आगे नहीं बढ़ी तो यात्रियों ने बाबा से दोबारा ट्रेन में बैठने का अनुरोध किया। बताया जाता है कि यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को बाबा से क्षमा मांगने के लिए कहा।कथा के मुताबिक, रेलवे अधिकारी और अंग्रेज अफसर बाबा के पास पहुंचे और उनसे दोबारा ट्रेन में चलने का अनुरोध किया। इसके बाद बाबा ट्रेन में बैठने के लिए तैयार हुए, लेकिन उन्होंने दो शर्तें रखीं।पहली शर्त थी कि किसी साधु-संत का अपमान कर उसे इस तरह ट्रेन से न उतारा जाए। दूसरी शर्त यह बताई जाती है कि जिस स्थान पर उन्हें ट्रेन से उतारा गया, वहां रेलवे स्टेशन बनाया जाए।
बाबा के नाम पर बना रेलवे स्टेशन
लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, बाबा की शर्त स्वीकार किए जाने के बाद नीब करौरी गांव के पास रेलवे स्टेशन बनाया गया। यही स्टेशन आगे चलकर नीब करौरी रेलवे स्टेशन के नाम से जाना गया।यही कहानी बाबा के नाम और इस गांव को लेकर लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ाती है। भक्तों के लिए यह सिर्फ एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी स्मृति का प्रतीक माना जाता है।
कैंची धाम से पहले यहां जुड़ी थी बाबा की साधना
नीम करौली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम आज कैंची धाम है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा के भक्त उन्हें हनुमान जी का परम भक्त मानते हैं और उनके जीवन से जुड़ी अनेक घटनाओं को आध्यात्मिक अनुभवों के रूप में देखते हैं।लेकिन बाबा की कहानी केवल कैंची धाम तक सीमित नहीं है। फर्रुखाबाद का नीब करौरी गांव भी उनके जीवन और साधना की परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी कारण बाबा के जीवन को जानने वालों के लिए यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक रुचि का विषय बना हुआ है।इस तरह नीब करौरी गांव, बाबा की साधना से जुड़ी मान्यताओं और ट्रेन वाली चर्चित लोककथा के कारण आज भी लोगों के बीच खास आकर्षण रखता है।
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