लखनऊ उत्तर प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों के लिए 15 सितंबर की बैठक के बाद कई अहम घोषणाएं सामने आई हैं। पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार करते हुए कई महत्वपूर्ण फैसलों और प्रस्तावों की जानकारी दी गई। इनमें मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खाते में DBT के जरिए करने, पंचायत सहायकों को रखने और हटाने का अधिकार जिलाधिकारी के पास रखने, महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश देने और मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करने की बात शामिल है।पंचायत सहायकों के आंदोलन के बीच सामने आए इन आश्वासनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले दिनों प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पंचायत सहायकों ने मानदेय बढ़ाने, सेवा सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया है। 15 सितंबर को बलरामपुर समेत कई जिलों में आंदोलन का असर भी सामने आया।
- DBT से सीधे खाते में आएगा पंचायत सहायकों का मानदेय
- पंचायत सहायक को हटाने का अधिकार DM के पास
- महिला पंचायत सहायकों को मिलेगा मातृत्व अवकाश
- 6 हजार से 9 हजार रुपये मानदेय करने का प्रस्ताव
- धरना-प्रदर्शन के मुकदमे वापस लेने की घोषणा
- पंचायत सहायकों को बताया पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी
- आंदोलन के बीच घोषणाओं से बढ़ी उम्मीद

DBT से सीधे खाते में आएगा पंचायत सहायकों का मानदेय
बैठक में पंचायत सहायकों के मानदेय भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की गई। इसके तहत अब मानदेय का भुगतान Direct Benefit Transfer यानी DBT के माध्यम से सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में किए जाने की बात कही गई है।इस व्यवस्था का उद्देश्य भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सीधा और पारदर्शी बनाना है। DBT व्यवस्था लागू होने पर पंचायत सहायकों को मानदेय प्राप्त करने के लिए किसी अन्य स्तर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।प्रदेश में पंचायत सहायकों की संख्या 50 हजार से अधिक है। पंचायती राज विभाग के उपलब्ध आंकड़ों में 53,813 पंचायत सहायकों/अकाउंट कम डेटा एंट्री ऑपरेटरों का विवरण दर्ज है।
पंचायत सहायक को हटाने का अधिकार DM के पास
बैठक में पंचायत सहायकों की सबसे अहम मांगों में शामिल सेवा सुरक्षा को लेकर भी घोषणा की गई। बताया गया कि पंचायत सहायकों को रखने और हटाने का अंतिम अधिकार संबंधित जिले के जिलाधिकारी के पास रहेगा।इसका मतलब यह है कि ग्राम प्रधान स्तर पर पंचायत सहायक को मनमाने तरीके से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाएगी। पंचायत सहायकों का लंबे समय से कहना रहा है कि सेवा सुरक्षा को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर विवाद या दबाव की स्थिति में उनकी सेवा प्रभावित न हो।
महिला पंचायत सहायकों को मिलेगा मातृत्व अवकाश
महिला पंचायत सहायकों के लिए भी बैठक में महत्वपूर्ण घोषणा की गई। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें मातृत्व अवकाश का लाभ देने की बात कही गई है।पंचायत सहायकों की मांगों में यह मुद्दा भी लंबे समय से शामिल रहा है। हाल में विभिन्न जिलों में दिए गए ज्ञापनों में महिला पंचायत सहायकों ने मातृत्व अवकाश समेत सेवा संबंधी सुविधाओं की मांग उठाई थी।इस घोषणा से महिला पंचायत सहायकों को सेवा के दौरान मातृत्व से जुड़े मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है।
6 हजार से 9 हजार रुपये मानदेय करने का प्रस्ताव
पंचायत सहायकों के आंदोलन का सबसे प्रमुख मुद्दा मानदेय में बढ़ोतरी रहा है। वर्तमान में 6 हजार रुपये के मानदेय को बढ़ाकर 9 हजार रुपये करने के प्रस्ताव पर विभागीय अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 9 हजार रुपये का मानदेय बढ़ोतरी प्रस्ताव फिलहाल प्रक्रिया में है। इसे अंतिम भुगतान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम निर्णय सरकार की स्वीकृति और संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।पंचायत सहायकों की ओर से इससे अधिक मानदेय बढ़ाने की मांग भी की जा रही है। हाल में लखनऊ के ईको गार्डन में प्रदर्शन कर रहे पंचायत सहायकों ने मानदेय वृद्धि और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगें उठाई थीं।
धरना-प्रदर्शन के मुकदमे वापस लेने की घोषणा
बैठक में आंदोलन के दौरान धरना-प्रदर्शन में शामिल पंचायत सहायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेकर समाप्त करने की बात भी कही गई है।इस घोषणा से आंदोलन में शामिल रहे पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि संबंधित मामलों में मुकदमे वापसी की प्रक्रिया नियमों और संबंधित प्रशासनिक-कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
पंचायत सहायकों को बताया पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी
बैठक के दौरान पंचायत सहायकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि वे ग्रामीण स्तर पर सरकार की योजनाओं और पंचायत से जुड़े कार्यों के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों की ओर से लंबे समय से सेवा शर्तों और मानदेय से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही थी।पंचायत सहायक ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न डिजिटल और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करते हैं। पंचायती राज विभाग के आंकड़ों में प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों का विवरण उपलब्ध है।
आंदोलन के बीच घोषणाओं से बढ़ी उम्मीद
पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर सितंबर में आंदोलन तेज हुआ है। लखनऊ के ईको गार्डन में धरना-प्रदर्शन के अलावा अलग-अलग जिलों में भी पंचायत सहायकों ने ज्ञापन, प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार किया। बलरामपुर में आंदोलन के चलते कई ग्राम पंचायतों के कामकाज पर असर पड़ने की रिपोर्ट सामने आई थी।ऐसे समय में बैठक के बाद सामने आए ये प्रस्ताव और घोषणाएं पंचायत सहायकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। खासतौर पर DBT भुगतान, सेवा सुरक्षा, मातृत्व अवकाश और मानदेय वृद्धि से जुड़े मुद्दों पर आगे की सरकारी प्रक्रिया पर अब नजर रहेगी।मानदेय को 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार रुपये करने के प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी, DBT व्यवस्था लागू होने की प्रक्रिया और जिलाधिकारी के अधिकार से संबंधित नियमों को लेकर सरकार की ओर से जारी होने वाले औपचारिक आदेश महत्वपूर्ण होंगे। इनके जारी होने के बाद ही इन घोषणाओं के क्रियान्वयन की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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