नई दिल्ली देश में डिजिटल पेमेंट की रीढ़ बन चुके UPI को लेकर केंद्र सरकार के नए Merchant Discount Rate यानी MDR नियम पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने के फैसले के बाद कांग्रेस की AICC सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार पर निशाना साधा है।सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर लगाए गए MDR से सबसे ज्यादा फायदा किन कंपनियों को होगा। उन्होंने PhonePe और Google Pay का नाम लेते हुए दावा किया कि UPI बाजार में इन प्लेटफॉर्म्स की बड़ी हिस्सेदारी है और MDR से इनके राजस्व तथा वैल्यूएशन को फायदा हो सकता है। उन्होंने इस फैसले को लेकर अमेरिका से जुड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचने का आरोप भी लगाया। सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और इसका पैसा केवल एक कंपनी को नहीं जाता, बल्कि बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर समेत पूरे पेमेंट इकोसिस्टम में वितरित किया जाएगा।
2,000 रुपये से ऊपर UPI पेमेंट पर क्या बदला?
नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया गया है। यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की घोषणा की गई है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के बैंक खाते से 2,000 रुपये से अधिक UPI भुगतान करने पर अतिरिक्त रकम काटी जाएगी। आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार MDR का भुगतान मर्चेंट-पेमेंट इकोसिस्टम में किया जाएगा और ग्राहकों पर सीधे MDR डालने की अनुमति नहीं है।यानी यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर 5,000 रुपये का सामान खरीदकर UPI से भुगतान करता है, तो नए नियम के तहत MDR मर्चेंट साइड पर लागू होगा, न कि ग्राहक के खाते से अलग से 0.4 प्रतिशत काटा जाएगा।

P2P UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR
इस पूरे बदलाव के बीच आम UPI यूजर्स के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि Person-to-Person यानी P2P भुगतान इस MDR व्यवस्था से बाहर हैं।सरकार के अनुसार कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए कितनी भी रकम भेजे, उस पर MDR नहीं लगाया जाएगा। इसी तरह 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे।सरकार ने यह भी कहा है कि छोटे व्यापारियों के लिए भी विशेष छूट जारी रहेगी। QR कोड के माध्यम से प्रति माह 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को जीरो-MDR व्यवस्था का लाभ मिलता रहेगा।
सुप्रिया श्रीनेत ने PhonePe और Google Pay पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इसी MDR व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि UPI मार्केट में बड़े पेमेंट ऐप्स की हिस्सेदारी को देखते हुए नए शुल्क से इन प्लेटफॉर्म्स को राजस्व हासिल हो सकता है।उन्होंने अपने बयान में PhonePe और Google Pay को संभावित बड़े लाभार्थियों के रूप में पेश किया और आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का फायदा अमेरिकी कंपनियों से जुड़े पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को मिलेगा।सुप्रिया श्रीनेत ने इसे भारतीयों की जेब से पैसा लेकर अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने से जोड़ते हुए सरकार पर राजनीतिक हमला किया है। यह उनकी ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है, जबकि सरकार की ओर से MDR को UPI सिस्टम की आर्थिक स्थिरता, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के खर्च से जोड़कर समझाया गया है।
क्या MDR का पूरा पैसा PhonePe-Google Pay को मिलेगा?
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक MDR की रकम किसी एक पेमेंट ऐप को सीधे नहीं दी जाती। सरकार के अनुसार इसे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स सहित विभिन्न प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा।इसलिए यह कहना कि MDR से मिलने वाला पूरा राजस्व केवल PhonePe या Google Pay को मिलेगा, आधिकारिक नियमों से स्थापित तथ्य नहीं है।बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे UPI ऐप बैंकिंग पार्टनर्स के जरिए UPI नेटवर्क से जुड़े हैं और MDR के बंटवारे में विभिन्न बैंकिंग और पेमेंट इकोसिस्टम प्रतिभागियों की भूमिका होगी।
सरकार ने क्यों लागू किया MDR?
सरकार और UPI से जुड़े अधिकारियों की ओर से MDR लागू करने के पीछे मुख्य तर्क डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता बताया गया है।UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसके संचालन, तकनीकी बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने से जुड़े खर्च भी बढ़ रहे हैं। सरकार का कहना है कि MDR से इस पूरे सिस्टम के संचालन के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी।मनीकंट्रोल के अनुसार 0.4 प्रतिशत MDR से UPI पेमेंट इकोसिस्टम के लिए सालाना हजारों करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न होने का अनुमान लगाया गया है।
जरूरी सेवाओं और कुछ सेक्टरों के लिए अलग व्यवस्था
नई MDR व्यवस्था में कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग दर रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा।इसके अलावा कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR की व्यवस्था है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है।
अब मुद्दा नियम से ज्यादा राजनीति का
UPI MDR को लेकर सरकार का तर्क सिस्टम की आर्थिक स्थिरता और डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर के खर्च से जुड़ा है, जबकि विपक्ष इसे कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट व्यवस्था पर नए वित्तीय बोझ के रूप में देख रहा है।सुप्रिया श्रीनेत का बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। उन्होंने पेमेंट ऐप्स की बाजार हिस्सेदारी और विदेशी कंपनियों से उनके संबंधों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया है।वहीं आधिकारिक नियमों में स्पष्ट किया गया है कि MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है, बल्कि पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। साथ ही ग्राहक से सीधे MDR वसूलने की व्यवस्था नहीं है।इसलिए आने वाले समय में असली सवाल यह होगा कि नए MDR से मर्चेंट्स की लागत पर कितना असर पड़ता है, पेमेंट कंपनियों और बैंकों के राजस्व मॉडल में कितना बदलाव आता है और UPI के इस्तेमाल पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR ने देश की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी गर्म कर दिया है।
Read on:http://पंचायत सहायकों को बड़ी राहत, DBT से मानदेय; 9 हजार करने का प्रस्ताव
Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

