लखनऊ राजधानी लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष सम्मेलन 2026 का दो दिवसीय आयोजन ज्ञान, अध्यात्म, धर्म और ज्योतिष के विभिन्न आयामों पर चर्चा के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। माँ अष्टभुजी राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष केंद्र की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन देशभर से आए संतों, आचार्यों, ज्योतिषाचार्यों, साधकों और विद्वानों की मौजूदगी रही।सम्मेलन के समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा पूर्व सांसद उन्नाव श्री अरविंद त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्री नवीन कुमार, पूर्व एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
- ज्ञान, धर्म और अध्यात्म पर केंद्रित रहा सम्मेलन
- उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक रहे मुख्य अतिथि
- ज्योतिष के विशेषज्ञों और संतों ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
- भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर
- दो दिवसीय आयोजन में रहा संतों और विद्वानों का संगम
- रतन शर्मा और गर्गी ने किया कार्यक्रम का संचालन
- सम्मान और आभार के साथ संपन्न हुआ सम्मेलन
ज्ञान, धर्म और अध्यात्म पर केंद्रित रहा सम्मेलन
राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष सम्मेलन का उद्देश्य धर्म, ज्योतिष और अध्यात्म से जुड़े विभिन्न विषयों को एक साझा मंच पर लाना रहा। दो दिनों तक चले इस आयोजन में ज्योतिष के साथ भारतीय परंपरा, आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक मूल्यों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।आयोजकों के अनुसार सम्मेलन को केवल ज्योतिषीय चर्चा तक सीमित रखने के बजाय ज्ञान, संस्कार और समाज में सकारात्मक चेतना के विस्तार से जोड़ने का प्रयास किया गया। समापन दिवस पर भी इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए संतों और विद्वानों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक रहे मुख्य अतिथि
समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उनके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य लोगों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।कार्यक्रम में पूर्व सांसद अरविंद त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव नवीन कुमार और पूर्व एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री की उपस्थिति रही। आयोजन में राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अतिथियों के साथ धर्म और ज्योतिष जगत के विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।
ज्योतिष के विशेषज्ञों और संतों ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
सम्मेलन में ज्योतिष और अध्यात्म के क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख नाम शामिल हुए। एस्ट्रो एच.एस. रावत, लाल किताब विशेषज्ञ रिभुकांत गोस्वामी, स्वामी सहजानंद जी, गुरु मां चेतना जी, चित्रकूट अखाड़े के महंत आचार्य पंडित उमाशंकर शास्त्री जी, एस्ट्रो राजेश शर्मा, एस्ट्रो मानवेंद्र सिंह रावत और राजज्योतिषी कृपाराम उपाध्याय ने कार्यक्रम में सहभागिता की।इसके साथ ही डॉ. दिवाकरण कोची, सम्राट डी.के. जैन, कामाक्ष्य देवी के साधक त्यागी बाबा, हरि ओम जोशी और पंडित राघव भट्ट समेत कई संतों, साधकों और विद्वानों की मौजूदगी रही।आयोजकों ने सम्मेलन में शामिल सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्म और ज्योतिष को समाज के व्यापक हित से जोड़ने की बात सामने रखी गई। आयोजकों ने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्योतिष को केवल भविष्य जानने के माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि जीवन में मार्गदर्शन से जुड़े विषय के तौर पर भी देखा जाता है।इसी विचार को सम्मेलन के मुख्य संदेश में शामिल किया गया। आयोजन का संदेश रहा—
“ज्ञान से जागरण • धर्म से संस्कार • ज्योतिष से मार्गदर्शन • अध्यात्म से विश्व कल्याण।”
आयोजकों के मुताबिक यह संदेश सम्मेलन की मूल भावना को दर्शाता है और आने वाले समय में भी इसी दिशा में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
दो दिवसीय आयोजन में रहा संतों और विद्वानों का संगम
राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष सम्मेलन 2026 का आयोजन दो दिनों तक किया गया। सम्मेलन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने सहभागिता की। धार्मिक और आध्यात्मिक जगत से जुड़े संतों के साथ ज्योतिषाचार्यों और विशेषज्ञों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप दिया।समापन दिवस पर उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। आयोजन समिति की ओर से सभी संतों, आचार्यों, ज्योतिषाचार्यों, साधकों, विद्वानों और सहयोगियों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया गया।आयोजकों ने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
रतन शर्मा और गर्गी ने किया कार्यक्रम का संचालन
दो दिवसीय सम्मेलन के समापन कार्यक्रम का संचालन रतन शर्मा और गर्गी ने किया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया और अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया।कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष सम्मेलन 2026 के दो दिवसीय आयोजन का औपचारिक रूप से समापन हुआ।
सम्मान और आभार के साथ संपन्न हुआ सम्मेलन
समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि सम्मेलन में शामिल सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। संतों, आचार्यों और ज्योतिषाचार्यों की उपस्थिति को आयोजन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया।माँ अष्टभुजी राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष केंद्र की ओर से सभी आगंतुकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजन समिति ने उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम भारतीय धर्म, अध्यात्म और ज्ञान परंपरा से जुड़े विमर्श को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित होंगे।लखनऊ में आयोजित इस सम्मेलन का समापन धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। दो दिनों तक चले आयोजन में ज्ञान, धर्म, ज्योतिष और अध्यात्म को केंद्र में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही।राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष सम्मेलन 2026 का मुख्य संदेश—“ज्ञान से जागरण, धर्म से संस्कार, ज्योतिष से मार्गदर्शन और अध्यात्म से विश्व कल्याण”—समापन समारोह की केंद्रीय भावना के रूप में सामने आया।
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