मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध तरीके से ई-कचरा जलाए जाने का मामला सामने आने के बाद पर्यावरण और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि रात के समय जंगल और सुनसान इलाकों में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा जलाया जाता है। कचरा जलने के दौरान उठने वाला धुआं आसपास के इलाकों तक पहुंचने की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।ग्रामीणों का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण के लिए निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए इसे खुले में जलाया जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रही कथित गतिविधियों पर जिम्मेदार विभागों को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और मौके पर जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
रात के अंधेरे में ई-कचरा जलाने का आरोप
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भोजपुर क्षेत्र के कुछ सुनसान इलाकों और जंगलों में रात के समय ई-कचरा जलाए जाने की गतिविधियां देखी गई हैं। आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उनसे निकलने वाले कचरे को एकत्र करने के बाद खुले स्थान पर आग लगा दी जाती हैई-कचरे में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, तार, सर्किट बोर्ड, प्लास्टिक और अन्य सामग्री शामिल हो सकती है। इन्हें खुले में जलाने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत संग्रह और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाना जरूरी माना जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय आग लगाए जाने से आसपास के क्षेत्रों में धुआं फैलता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

ई-कचरा जलाने से पर्यावरण पर खतरे की चिंता
ई-कचरे का सुरक्षित निस्तारण पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रॉनिक कचरे में मौजूद विभिन्न पदार्थों और घटकों के कारण इसे खुले में जलाने से प्रदूषण का खतरा पैदा हो सकता है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लास्टिक, तारों और अन्य मिश्रित सामग्री को जलाने से निकलने वाला धुआं आसपास की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।इसी वजह से ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि भोजपुर क्षेत्र में खुले में ई-कचरा जलाया जा रहा है तो संबंधित विभाग इसकी जांच क्यों नहीं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को मौके पर जाकर स्थिति की वास्तविकता का पता लगाना चाहिए। किसी विशेष स्वास्थ्य नुकसान या प्रदूषण स्तर की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग की जांच और वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होंगे।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
कथित तौर पर ई-कचरा जलाए जाने की गतिविधियों को लेकर आसपास के ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता है। लोगों का कहना है कि उनके घरों और खेतों के आसपास यदि इस तरह की गतिविधियां होती हैं तो इसका असर स्थानीय वातावरण पर पड़ सकता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में रात के समय होने वाली ऐसी गतिविधियों की निगरानी की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि ई-कचरा कहां से लाया जा रहा है, उसे किस स्थान पर एकत्र किया जा रहा है और उसका निस्तारण किस तरीके से किया जा रहा है।लोगों का कहना है कि यदि जांच में खुले में ई-कचरा जलाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में यदि नियमित रूप से ऐसी गतिविधियां हो रही हैं तो संबंधित विभागों को इसका संज्ञान लेना चाहिए।स्थानीय लोगों की मांग है कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करे। ई-कचरे के अवैध भंडारण और निस्तारण की स्थिति की जांच की जाए। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कहीं निर्धारित नियमों के विपरीत खुले में कचरा तो नहीं जलाया जा रहा है।ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई के साथ-साथ क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाने की भी मांग की है, ताकि लोग ई-कचरे को खुले में जलाने या इधर-उधर फेंकने के बजाय अधिकृत निस्तारण व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
ई-कचरे के निस्तारण की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत
बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल के साथ ई-कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। पुराने मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, तार और सर्किट बोर्ड जैसे सामान को सामान्य घरेलू कचरे के साथ फेंकने या खुले में जलाने के बजाय निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से निस्तारित करना जरूरी है।भोजपुर में सामने आए आरोपों के बाद स्थानीय स्तर पर ई-कचरा संग्रह और निस्तारण व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। यदि क्षेत्र में बड़े स्तर पर ई-कचरा पहुंच रहा है तो उसके स्रोत और अंतिम निस्तारण की प्रक्रिया की जांच किए जाने की जरूरत है।
ग्रामीणों ने की तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भोजपुर क्षेत्र में कथित रूप से ई-कचरा जलाए जाने की शिकायत का तत्काल संज्ञान लिया जाए। लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करे और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि जिन स्थानों पर कथित रूप से ई-कचरा जलाया जा रहा है, वहां निगरानी बढ़ाई जाए। रात के समय संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ई-कचरे के अवैध परिवहन और भंडारण की भी जांच होनी चाहिए।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल भोजपुर क्षेत्र में ई-कचरा जलाने के आरोपों को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच या आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करे और यदि खुले में ई-कचरा जलाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई करे। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और भोजपुर क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी साझा जिम्मेदारी है। ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था और नियमों के पालन से ही ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है।
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