लखनऊ उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी बीच प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ में कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। राजभर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और वह निर्दोष हैं। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी।राजभर ने चुनावी सर्वे का हवाला देते हुए सपा पर भी निशाना साधा और दावा किया कि सर्वे में समाजवादी पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है। वहीं रायबरेली में आयोजित राजनीतिक कार्यक्रम और भीड़ को लेकर भी उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाए।
ज्ञानेश कुमार के समर्थन में उतरे राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। राजभर के मुताबिक, CEC ज्ञानेश कुमार निर्दोष हैं और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को सही नहीं माना जाना चाहिए।पिछले कुछ समय से विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजभर ने इसी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग और उसके प्रमुख का बचाव किया।हालिया राजनीतिक बहस में विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने और सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों को खारिज किए जाने के बीच राजभर का बयान सामने आया है।

‘सर्वे के मुताबिक सपा साफ हो रही’
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सर्वे के मुताबिक सपा कमजोर होती जा रही है। हालांकि, राजभर ने जिस सर्वे का हवाला दिया, उसकी पद्धति, नमूना और आंकड़े उनके बयान में स्पष्ट नहीं बताए गए हैं। इसलिए इसे राजभर का राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित चुनावी निष्कर्ष।इससे पहले भी राजभर सपा और उसके नेतृत्व पर लगातार राजनीतिक हमले करते रहे हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने दावा किया था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के सामने बड़ी चुनौती होगी और पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर रहेगी।
रायबरेली में भीड़ को लेकर साधा निशाना
राजभर ने रायबरेली में आयोजित कार्यक्रम को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि वहां 20 जिलों से लोगों को बुलाया गया था। उनके बयान का संदर्भ विपक्ष के राजनीतिक कार्यक्रम और उसमें जुटी भीड़ से जुड़ा था।किसी राजनीतिक कार्यक्रम में दूसरे जिलों से लोगों के आने का दावा राजनीतिक बयान का हिस्सा है। ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आयोजन की आधिकारिक संख्या या प्रशासनिक आंकड़ों की जरूरत होती है। इसलिए इसे राजभर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘वोट चोरी की शुरुआत कांग्रेस ने की’
ओम प्रकाश राजभर ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वोट चोरी की शुरुआत कांग्रेस ने की थी। राजभर ने इस आरोप को ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़ते हुए कांग्रेस के पुराने चुनावी इतिहास का जिक्र किया।राजभर पहले भी चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर कांग्रेस पर इसी तरह के आरोप लगाते रहे हैं। दिसंबर 2025 में मुरादाबाद में दिए बयान में उन्होंने कहा था कि देश में वोट चोरी की शुरुआत कांग्रेस के दौर में हुई। उन्होंने इंदिरा गांधी के चुनाव से जुड़े राजनीतिक विवादों का भी उल्लेख किया था।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि राजभर का यह बयान राजनीतिक आरोप है। किसी चुनाव में अनियमितता या ‘वोट चोरी’ का निष्कर्ष संबंधित चुनावी रिकॉर्ड, न्यायिक फैसलों या आधिकारिक जांच के आधार पर ही स्थापित किया जा सकता है।
इंदिरा गांधी को लेकर भी किया दावा
राजभर ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए दावा किया कि वह ‘वोट चोरी’ के जरिए प्रधानमंत्री बनी थीं। यह बयान उनके राजनीतिक तर्क का हिस्सा है और उन्होंने इसे कांग्रेस के चुनावी इतिहास पर अपने आरोपों के समर्थन में रखा।इंदिरा गांधी से जुड़े चुनावी इतिहास में 1975 का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण है, जिसमें उनके 1971 के रायबरेली लोकसभा चुनाव को लेकर चुनावी भ्रष्ट आचरण के आरोपों पर फैसला आया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में कानूनी प्रक्रिया चली। इसलिए इस पूरे संदर्भ को केवल राजनीतिक बयान के रूप में प्रस्तुत करना और ऐतिहासिक न्यायिक घटनाओं को अलग रखना जरूरी है।
पूर्वांचल को लेकर राजभर का बड़ा दावा
ओम प्रकाश राजभर ने पूर्वांचल राज्य के मुद्दे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो राजभर का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा।पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुराना मुद्दा रही है। राजभर पहले भी उत्तर प्रदेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की वकालत करते रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में भी उनके द्वारा उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने और पूर्वांचल राज्य की मांग से जुड़े बयान सामने आए हैं।पूर्वांचल राज्य का गठन फिलहाल कोई स्थापित प्रशासनिक वास्तविकता नहीं है। इसके लिए संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया की आवश्यकता होगी। राजभर का अपने बेटे के मुख्यमंत्री बनने का बयान उनके राजनीतिक दावे और भविष्य की कल्पना के रूप में देखा जाना चाहिए।
2027 से पहले तेज हुई बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। चुनाव आयोग, SIR, मतदाता सूची, रोजगार और क्षेत्रीय राजनीति जैसे मुद्दे सार्वजनिक बहस के केंद्र में हैं।ऐसे माहौल में ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान कई अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों को एक साथ जोड़ते हैं। एक ओर उन्होंने ज्ञानेश कुमार का बचाव किया, दूसरी ओर कांग्रेस और सपा पर निशाना साधा। वहीं पूर्वांचल राज्य को लेकर अपने राजनीतिक एजेंडे को भी सामने रखा।राजभर के इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनाव आयोग, ‘वोट चोरी’, सपा की स्थिति और पूर्वांचल राज्य जैसे मुद्दों पर बहस और तेज होने के आसार हैं। चुनावी सर्वे और राजनीतिक दावों की वास्तविक तस्वीर चुनाव के दौरान उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों और परिणामों से ही स्पष्ट होगी।
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