रिपोर्ट : दीपचंद्र दीक्षित
- NHM संविदा कर्मचारियों की पूर्ण हड़ताल, CMO कार्यालय में गूंजे मांगों के नारे
- समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की प्रमुख मांग
- कैशलेस इलाज से लेकर महंगाई भत्ते तक की मांग
- 12 अक्टूबर को लखनऊ कूच करेंगे NHM कर्मचारी
- आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं करने की बात
- धरने में संघ के पदाधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद
फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। गुरुवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय परिसर में पूर्ण हड़ताल कर धरना दिया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस आंदोलन में जनपद के करीब 250 संविदा कर्मचारियों ने भाग लिया। कर्मचारियों ने समान कार्य-समान वेतन, नियमितीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और सामाजिक सुरक्षा सहित छह सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग उठाई।आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। लंबे समय से मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। संघ ने शासन से कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कर जल्द राहत देने की अपील की है।
NHM संविदा कर्मचारियों की पूर्ण हड़ताल, CMO कार्यालय में गूंजे मांगों के नारे
फर्रुखाबाद में आयोजित धरने के दौरान संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। कर्मचारियों ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों, वेतन और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।कर्मचारियों के मुताबिक, समान कार्य करने के बावजूद वेतन और सुविधाओं में अंतर होने से उनमें असंतोष है। उनका कहना है कि यदि उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जाती है, तो उन्हें भी काम के अनुरूप वेतन और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।धरने के दौरान संघ ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने और कर्मचारियों के हित में सकारात्मक फैसला लेने की अपील की। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अपनी लंबित समस्याओं को शासन तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना है।

समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की प्रमुख मांग
NHM संविदा कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन और संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से संविदा पर काम करने के बावजूद भविष्य की नौकरी को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। ऐसे में नियमितीकरण की मांग उनके लिए महत्वपूर्ण है।संघ चाहता है कि कर्मचारियों की सेवाओं और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए वेतन व्यवस्था में सुधार किया जाए। इसके साथ ही कर्मचारियों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा मिल सके।कर्मचारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में उनकी भूमिका को देखते हुए उनकी मांगों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाना चाहिए। संघ ने शासन से अपील की कि समस्याओं को केवल आश्वासन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कैशलेस इलाज से लेकर महंगाई भत्ते तक की मांग
धरने के दौरान कर्मचारियों ने वेतन और नियमितीकरण के अलावा कई अन्य सुविधाओं की मांग भी उठाई। इनमें कैशलेस चिकित्सा सुविधा, महंगाई भत्ता (DA), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), मकान किराया भत्ता (HRA), ग्रेच्युटी और अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति जैसी मांगें शामिल हैं।कर्मचारियों का कहना है कि बीमारी या किसी आकस्मिक परिस्थिति में चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से कर्मचारियों को उपचार के दौरान आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है। वहीं, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता जैसी सुविधाएं बढ़ती महंगाई के बीच परिवार का खर्च संभालने में मददगार हो सकती हैं।संघ ने कर्मचारी भविष्य निधि और ग्रेच्युटी से संबंधित लाभों को लेकर भी अपनी मांग रखी। कर्मचारियों के अनुसार, सेवा के दौरान और सेवानिवृत्ति जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके अलावा किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को राहत देने के लिए अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई गई।
12 अक्टूबर को लखनऊ कूच करेंगे NHM कर्मचारी
फर्रुखाबाद में धरने के दौरान संघ ने आंदोलन की आगे की रणनीति भी स्पष्ट की। संगठन के अनुसार, 8 से 10 अक्टूबर तक जनपद मुख्यालय पर आंदोलन जारी रखने की योजना बनाई गई है। इसके बाद 12 अक्टूबर को जिलेभर के NHM संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लखनऊ कूच करेंगे।कर्मचारियों का कहना है कि शासन स्तर पर उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम के जरिए कर्मचारी अपनी समस्याओं को शासन के सामने रखने और लंबित मांगों पर निर्णय कराने का प्रयास करेंगे।इस घोषणा के बाद संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर आगे की गतिविधियों पर नजर रहेगी। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रम और उसमें भागीदारी की विस्तृत जानकारी संघ की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के आधार पर स्पष्ट होगी।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं करने की बात
हड़ताल के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी कर्मचारियों ने अपना पक्ष रखा। संघ की ओर से कहा गया कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं करने की बात कही गई है। स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों की जरूरतों से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए आपात परिस्थितियों में मरीजों को सहायता मिलना महत्वपूर्ण है।
हड़ताल का नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना प्रभाव पड़ा, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
धरने में संघ के पदाधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद
CMO कार्यालय परिसर में आयोजित धरने का संचालन गीतांजलि राखी ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष बृजेश अग्निहोत्री ने की। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रतीप कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष रेनू, कोषाध्यक्ष नरेंद्र चौरसिया, रुपेश कुमार, कपिल गुप्ता, डॉ. स्थान सिंह, क्षमा चतुर्वेदी, ज्योति, रोशनी, हरद्वारी, कुमारी आरती और साधना सहित बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी मौजूद रहे।धरने के समापन पर संघ ने शासन से छह सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील दोहराई। कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, इसलिए उनकी सेवा शर्तों, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान भी प्राथमिकता से किया जाना चाहिए।
अब निगाहें शासन के फैसले पर
फर्रुखाबाद में NHM संविदा कर्मचारियों की हड़ताल और 12 अक्टूबर को लखनऊ कूच के ऐलान ने उनकी मांगों को फिर चर्चा में ला दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आंदोलन के बाद शासन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा। अब देखना होगा कि समान वेतन, नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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