बरेली/पीलीभीत पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के इज्जतनगर मंडल द्वारा रेल परिसरों को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्र सरकार के निर्देशानुसार चलाए जा रहे ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत पीलीभीत रेलवे स्टेशन पर एक वृहद रेल जनसंवाद और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल स्टेशन परिसर को साफ-सुथरा रखना है, बल्कि यात्रा कर रहे दैनिक यात्रियों और आम जनता को कचरा प्रबंधन के प्रति पूरी तरह जागरूक बनाना भी है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में यात्रियों को कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर डस्टबिन में डालने की विस्तृत जानकारी दी गई।
रेल जनसंवाद: कचरा प्रबंधन के वैज्ञानिक तौर-तरीकों पर जोर
पीलीभीत रेलवे स्टेशन पर आयोजित इस जागरूक कार्यक्रम में मुख्य रूप से पहुंचे नामित रेल अधिकारी ने उपस्थित यात्रियों, वेंडरों और रेल कर्मियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे का सही और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण (Disposal) करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। अगर हम शुरुआत में ही कचरे को उसकी श्रेणी के हिसाब से अलग कर लें, तो उसके रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निस्तारण में बहुत आसानी होती है।
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से संवाद करते हुए बताया कि अक्सर लोग जानकारी के अभाव में प्लास्टिक की बोतलें, खाने-पीने का सामान और सैनिटरी वेस्ट एक ही डस्टबिन में डाल देते हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा तो बढ़ता ही है, साथ ही रेलवे के सफाई कर्मचारियों के लिए भी भारी समस्या खड़ी हो जाती है। विशेष अभियान 6.0 के जरिए यात्रियों की इसी मानसिकता और आदत में बदलाव लाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।

स्टेशन पर रखे चार रंग के डस्टबिन: जानिए किसमें क्या डालें?
कार्यक्रम के दौरान यात्रियों को व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए पीलीभीत स्टेशन पर रखे गए चार अलग-अलग प्रकार के रंगीन डस्टबिन (कूड़ेदान) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। नामित अधिकारी ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से कचरे को नष्ट करने के लिए इसे चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसके लिए अलग-अलग रंग के डिब्बे निर्धारित हैं:
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- हरा डस्टबिन (गीला कचरा): इसमें बचा हुआ भोजन, फलों के छिलके, चाय की पत्ती, सब्जियां और गलने योग्य जैविक कचरा डाला जाना चाहिए।
- नीला डस्टबिन (सूखा कचरा): इस डस्टबिन का उपयोग मुख्य रूप से प्लास्टिक की खाली बोतलें, कागज, गत्ते के टुकड़े, प्लास्टिक रैपर्स, और रीसायकल होने वाले सूखे कचरे के लिए किया जाता है।
- लाल/पीला डस्टबिन (सैनिटरी वेस्ट): इस्तेमाल किए गए नैपकिन, डायपर, पट्टियां और अन्य चिकित्सा या व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े वेस्ट को इस श्रेणी में रखने की हिदायत दी गई, ताकि इससे किसी प्रकार का संक्रमण न फैले।
- काला डस्टबिन (विशेष/खतरनाक कचरा): टूटे हुए कांच, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक कचरा या कोई भी धारदार वस्तु इस डस्टबिन में डाली जानी चाहिए, जिससे सफाई कर्मचारियों को चोट न लगे।
रेलवे अधिकारियों ने सभी यात्रियों से अपील की कि वे इन चार निर्धारित डस्टबिन का उपयोग उनकी तय श्रेणी के अनुसार ही करें। ऐसा करने से पर्यावरण को संरक्षित करने और भारतीय रेलवे को ‘ग्रीन रेलवे’ बनाने के संकल्प को मजबूती मिलेगी।
इज्जतनगर मंडल का संकल्प: स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल सफर
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल पीलीभीत स्टेशन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मंडल के सभी छोटे-बड़े स्टेशनों पर इस तरह के जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ‘विशेष अभियान 6.0’ के अंतर्गत स्टेशनों पर साफ-सफाई की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके साथ ही यात्रियों को सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने और जूट या कपड़े के थैलों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्टेशन पर लाउडस्पीकर (अनाउंसमेंट सिस्टम) और पोस्टरों के माध्यम से भी लगातार स्वच्छता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।यात्रियों ने भी रेलवे के इस कदम की सराहना की और स्वच्छता को अपनी दैनिक यात्रा का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी रेल यात्रियों और वेंडरों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई कि वे न तो स्वयं गंदगी फैलाएंगे और न ही किसी दूसरे को स्टेशन परिसर व ट्रेनों को गंदा करने देंगे।
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