भगतपुर (मुरादाबाद) उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के भगतपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाला मामला सामने आया है। यहां के कचनाल गांव के घने जंगलों में अवैध रूप से इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) जलाए जाने का भंडाफोड़ हुआ है। खुलेआम और अवैध तरीके से ई-कचरे को आग के हवाले करने की इस गतिविधि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक महकमे से लेकर पर्यावरणविदों तक के होश उड़ा दिए हैं। इस पूरे मामले में स्थानीय निवासी मोहम्मद अरशद पर ई-कचरा जलाने और इस अवैध धंधे को संचालित करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

कचनाल के जंगलों से उठने वाला यह जहरीला धुआं न केवल हवा को दूषित कर रहा है, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों की जिंदगी को भी खतरे में डाल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला पूरी तरह से चर्चा में आ गया है। इस खबर में हम आपको बताएंगे कि किस तरह मुरादाबाद के इस ग्रामीण इलाके में नियमों को ताक पर रखकर पर्यावरण की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
कचनाल के जंगलों में ई-कचरे का अवैध नेटवर्क
मुरादाबाद को लंबे समय से पीतल नगरी के रूप में जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र ई-कचरे के अनधिकृत रीसाइक्लिंग और प्रोसेसिंग का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। भगतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कचनाल गांव के जंगलों का इस्तेमाल अब इस अवैध धंधे के लिए डंपिंग और बर्निंग ग्राउंड के रूप में किया जा रहा है।
वायरल वीडियो और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रात के अंधेरे में और कभी-कभी दिन के उजाले में भी भारी मात्रा में कंप्यूटर, मोबाइल फोन, सर्किट बोर्ड, तार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान यहां लाकर डंप किए जाते हैं। इसके बाद इन उपकरणों से कीमती धातुएं जैसे तांबा, एल्युमिनियम और सोना निकालने के लिए इन्हें खुले में जला दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के पीछे मोहम्मद अरशद नामक व्यक्ति का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिसे इस अवैध कारोबार का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है।
जहरीले धुएं से घुट रहा ग्रामीणों का दम
ई-कचरे को खुले में जलाने से निकलने वाला धुआं सामान्य धुएं जैसा नहीं होता। इसमें लेड (सीसा), कैडमियम, मरकरी (पारा), और पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल्स (PCBs) जैसे अत्यधिक खतरनाक और कैंसरकारी तत्व होते हैं। कचनाल और उसके आसपास के गांवों के निवासियों का कहना है कि जब भी यह कचरा जलाया जाता है, तो पूरे इलाके में एक अजीब सी तीखी और दमघोंटू गंध फैल जाती है।ग्रामीणों को अब सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, त्वचा पर रैशेज और लगातार खांसी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को हो रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे जहरीले धुएं के संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर, किडनी की बीमारियां और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, यह जहरीला तत्व जमीन में रिसकर भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है, जिससे आने वाले समय में पानी भी पीने लायक नहीं रहेगा।
खाकी और रसूखदारों के संरक्षण के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में जो सबसे चौंकाने वाला और चिंताजनक पहलू सामने आया है, वह है स्थानीय पुलिस और कुछ रसूखदार नेताओं की भूमिका। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कचनाल के जंगलों में इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधि बिना किसी प्रशासनिक और पुलिस संरक्षण के संभव नहीं है। आरोप हैं कि स्थानीय पुलिस और संबंधित विभागों के कुछ अधिकारियों को इस अवैध काम की पूरी जानकारी है, लेकिन मोटी कमाई और राजनीतिक दबाव के कारण वे आंखें मूंदे बैठे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से यह धंधा बिना किसी डर के फल-फूल रहा था, वह कहीं न कहीं कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। रसूखदारों के कथित संरक्षण के कारण ही इस अवैध धंधे के सिंडिकेट हौसले बुलंद हैं और वे ग्रामीणों की शिकायतों को लगातार नजरअंदाज करते आ रहे हैं।
ई-कचरा प्रबंधन नियमों की सरेआम धज्जियां
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ई-कचरा (प्रबंधन) नियम लागू किए गए हैं। इन नियमों के तहत इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटान केवल पंजीकृत और अधिकृत रीसायकलर्स द्वारा ही वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकता है। किसी भी परिस्थिति में ई-कचरे को खुले में जलाना या उसे अनधिकृत रूप से डंप करना कानूनन अपराध है और इसके लिए भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है।
मुरादाबाद के कचनाल में जो कुछ भी हो रहा है, वह इन राष्ट्रीय नियमों का सरेआम उल्लंघन है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी मुरादाबाद और आसपास के इलाकों में ई-कचरे के अवैध संचालन को लेकर पहले कई बार सख्त रुख अपनाया है और जिला प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की दरकार अब जब यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के सामने आ चुका है, तो स्थानीय जनता और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या मुरादाबाद का जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस विभाग इस मामले को गंभीरता से लेंगे? क्या मोहम्मद अरशद और इस सिंडिकेट के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जाएगा? इस पूरे प्रकरण में एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की सख्त जरूरत है। पर्यावरण की सुरक्षा और कचनाल व आसपास के ग्रामीणों की सेहत को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए प्रशासन को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
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- अवैध स्थलों की सीलिंग: कचनाल के जंगलों में जहां भी ई-कचरा डंप या जलाया जा रहा है, उन जगहों को तुरंत चिह्नित कर सील किया जाए।
- दोषियों की गिरफ्तारी: मोहम्मद अरशद और इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- लापरवाह अधिकारियों पर गाज: यदि जांच में पुलिस या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के किसी अधिकारी की मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
- स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन: प्रभावित गांवों में तुरंत स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं ताकि जहरीले धुएं से प्रभावित ग्रामीणों का उपचार किया जा सके।
यह मामला केवल एक गांव या जंगल का नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे पर्यावरण तंत्र और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते ऐसे भू-माफियाओं और अवैध कारोबारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो मुरादाबाद के ग्रामीण इलाके गंभीर पर्यावरणीय त्रासदी की चपेट में आ जाएंगे।
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