1 जनवरी से सभी दोपहिया वाहनों में ABS अनिवार्य?

Editorial
5 Min Read

देश में 1 जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) अनिवार्य होने वाला था, लेकिन अब ये फैसला अटक गया है। लागू होने में सिर्फ एक दिन बाकी है, और इसी बीच ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सरकार से समय सीमा आगे बढ़ाने की मांग कर दी है।

सूत्रों का कहना है कि अगर स्थितियाँ ऐसी ही रहीं, तो सरकार को यह समय सीमा बदलनी पड़ सकती है।

कंपनियों ने क्यों मांगा समय?

वाहन निर्माताओं की दलील है कि अभी पूरे देश में ABS सिस्टम की सप्लाई उतनी मजबूत नहीं है कि सभी मॉडल्स पर एक साथ इसे लागू किया जा सके।

  • सप्लाई चेन तैयार नहीं

  • पुर्ज़ों की कमी की आशंका

  • उत्पादन लागत बढ़ने का जोखिम

  • छोटे मॉडल और कम लागत की बाइकों पर प्रभाव

इसके कारण बाइक बनाने वाली कंपनियाँ कह रही हैं कि इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि बाजार पर झटका न पड़े और ग्राहक पर कीमत का बोझ न बढ़े।

सरकार किस लिए कर रही थी अनिवार्य?

भारत में सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी होती हैं।

  • सड़क हादसों में 44% मौतें दोपहिया वाहनों से संबंधित

  • 2022 में 1,51,997 रोड एक्सीडेंट्स में 20% में बाइक शामिल थीं

इसीलिए सरकार चाहती है कि अब सभी बाइकों में ABS लगाया जाए, ताकि ब्रेक फेल, फिसलन और कंट्रोल खत्म होने जैसी दुर्घटनाएँ कम हों।

ABS और CBS – फर्क क्या है?

तकनीक कहाँ लगती है? कैसे काम करती है?
ABS अब सभी बाइकों में लगाने का प्रस्ताव पहियों को लॉक होने से रोकता है, संतुलन बनाए रखता है
CBS अभी छोटे स्कूटर/100-125cc में इस्तेमाल दोनों पहियों पर ब्रेक का बराबर दबाव, लेकिन सुरक्षा ABS जितनी नहीं

फिलहाल ABS सिर्फ 125cc से बड़ी बाइकों में अनिवार्य है।

एबीएस कैसे बचाता है जान? (सिंपल उदाहरण)

मान लीजिए अचानक सड़क पर कोई रुकावट आ जाए –
❌ नॉर्मल ब्रेक: पहिया लॉक होगा → बाइक फिसलेगी → गिरने का खतरा
✔ ABS ब्रेक: पहिए लॉक नहीं होंगे → कंट्रोल बना रहेगा → टक्कर टल सकती है

यानी ABS ब्रेक को स्मार्ट तरीके से कंट्रोल करता है

क्या 1 जनवरी की डेडलाइन टल सकती है?

1 जनवरी 2026 से देश में सभी दोपहिया वाहनों में ABS अनिवार्य होने की योजना थी, लेकिन अब इस फैसले पर असमंजस की स्थिति बन गई है। ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कंपनियाँ तैयार नहीं हैं और उन्होंने सरकार से स्पष्ट रूप से कहा है कि मौजूदा सप्लाई चेन और प्रोडक्शन क्षमता को देखते हुए इस नियम को तत्काल लागू करना मुश्किल है। ब्रेकिंग सिस्टम से जुड़े नए पार्ट्स की उपलब्धता इतनी नहीं है कि एक साथ पूरे देश में सभी मॉडल्स पर इसे लगाया जा सके। अगर अभी इसे लागू किया गया, तो न सिर्फ उत्पादन रुक सकता है बल्कि वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय होगी। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो कम बजट वाली बाइक और स्कूटर खरीदते हैं।

दूसरी ओर सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर है और दोपहिया वाहनों में होने वाले हादसों के आंकड़े उसे इस नियम पर पीछे नहीं हटने देते। यही वजह है कि सरकार किसी ठोस विकल्प पर विचार कर रही है—या तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, या फिर छोटी इंजिन क्षमता वाली बाइकों को फिलहाल छूट दी जाए। स्थिति यह है कि एक जनवरी की तारीख बेहद करीब है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। यही कारण है कि उद्योग जगत और ग्राहक दोनों इंतज़ार की स्थिति में हैं। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार समय सीमा को आगे बढ़ा सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय का इंतज़ार सभी को है। फिलहाल इतना तो तय है कि यह मुद्दा अब सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि उपभोक्ता और उद्योग—दोनों के हितों से जुड़ा हुआ है।

Share This Article
Leave a Comment