हिमाचल प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हालात ऐसे बन गए हैं कि अधिकारी सरकार पर हावी हैं और मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री व विधायक प्रशासन के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। जयराम ठाकुर के इन बयानों से राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार हालात संभालने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कानून नाम की कोई चीज नहीं बची है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
मुख्यमंत्री सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप
“अधिकारी चला रहे हैं सरकार” – जयराम ठाकुर
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह हावी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक को “उंगली पर नचा रहे हैं।” उनके मुताबिक, यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार की निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो चुकी है और राजनीतिक नेतृत्व नियंत्रण खो चुका है।
उन्होंने कहा कि एक ओर मंत्री आपस में असंतुष्ट नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर विधायक भी सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
चुनाव और सुप्रीम कोर्ट को लेकर बयान
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास चुनाव करवाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून के अनुसार पांच साल बाद चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार चुनाव की तैयारी करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बना रही है। जयराम ठाकुर के अनुसार, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी।
आपदा के बाद जश्न और फंड के दुरुपयोग का आरोप
जयराम ठाकुर ने आपदा के बाद सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश आपदा से जूझ रहा था, तब सरकार ने जश्न मनाया और इसके लिए मंडी जैसे उस जिले को चुना गया, जहां सबसे ज्यादा लोगों की जान गई थी। उनके अनुसार, यह पीड़ितों की भावनाओं का अपमान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस जश्न पर एनडीआरएफ के फंड का दुरुपयोग किया गया और करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इस मामले को लेकर उन्होंने सरकार से जवाबदेही की मांग की और कहा कि जनता को सच्चाई जानने का हक है।
अपराध की घटनाओं से बिगड़ती स्थिति
ऊना हत्या कांड का जिक्र
नेता प्रतिपक्ष ने ऊना जिले में हुई हत्या की घटना का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध बेलगाम हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जयराम ठाकुर के मुताबिक, सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में विफल रही है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
मंडी और अन्य जिलों की स्थिति
उन्होंने मंडी सहित अन्य जिलों की स्थिति पर भी चिंता जताई। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में अपराध, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है, लेकिन सरकार केवल बयानबाजी तक सीमित है।
कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष के संकेत
जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार के अंदरूनी हालात पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक मंत्री बाहर के अधिकारियों से नाराज दिखाई देता है, जबकि दूसरा मंत्री यह कहते सुना गया कि “काम करवाना आना चाहिए।” उनके मुताबिक, इस तरह के बयान यह दर्शाते हैं कि सरकार के भीतर तालमेल की कमी है।
उन्होंने कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे मंत्री बनने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अब तक उन्हें मौका नहीं मिला। जयराम ठाकुर का दावा है कि कांग्रेस के अधिकांश मंत्री और विधायक खुद परेशान हैं और सरकार की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं।
राहुल गांधी पर कटाक्ष और भाजपा का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व देश की तुलना में विदेश में अधिक समय बिताता है। उनके अनुसार, इससे यह संदेश जाता है कि कांग्रेस जनता की समस्याओं से दूर है।
जयराम ठाकुर ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस सरकार की विफलताओं को देख रही है और सही समय पर इसका जवाब देगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, जनता की नजरें सरकार पर
हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर उठे इन सवालों ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया है। जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सरकार को इन आरोपों का जवाब देना होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

