‘वन टू चा चा चा’ एक ऐसी हिंदी कॉमेडी फिल्म है, जो शोर-शराबे वाली कॉमेडी से हटकर सिचुएशन और किरदारों के टकराव से हंसी पैदा करती है। उत्तर प्रदेश और बिहार की पृष्ठभूमि में सेट यह फिल्म आम दर्शकों से सीधा जुड़ाव बनाती है। गंभीर और खलनायक भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले आशुतोष राणा को एक कॉमिक रोल में देखना अपने आप में दर्शकों के लिए नया अनुभव है। यही प्रयोग फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है।
फिल्म का निर्देशन अभिषेक राज खेमका और रजनीश ठाकुर ने किया है, जिन्होंने कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज में आगे बढ़ाने की कोशिश की है। फिल्म की गति कहीं धीमी नहीं पड़ती और दर्शक लगातार कहानी के साथ जुड़े रहते हैं।
बिहार से शुरू होकर सड़क तक पहुंचती है कहानी
फिल्म की कहानी बिहार के मोतिहारी से शुरू होती है, जहां जयसवाल परिवार में बड़े बेटे संजू की सगाई की तैयारियां चल रही होती हैं। इसी बीच परिवार के बाइपोलर चाचा वेद प्रकाश जयसवाल अचानक शादी करने की जिद पकड़ लेते हैं। इस अप्रत्याशित फैसले से पूरा परिवार असमंजस में आ जाता है।
डॉक्टर की सलाह पर चाचा को रांची के एक मानसिक संस्थान ले जाने का फैसला होता है। इस सफर के लिए दो भतीजे और एक दोस्त जिम्मेदारी उठाते हैं। चाचा को बेहोशी की हालत में वैन से ले जाया जाता है, लेकिन यहीं से कहानी मोड़ लेती है। यह यात्रा तय रास्ते से भटक जाती है और फिल्म एक रोड एडवेंचर का रूप ले लेती है।
सफर में जुड़ते हैं अजीब लेकिन दिलचस्प किरदार
निलंबित अफसर से लेकर फरार अपराधी तक
इस अनियोजित यात्रा के दौरान कहानी में कई रंगीन किरदार जुड़ते हैं। एक निलंबित नारकोटिक्स अधिकारी, एक डांसर शोमा, जेल से फरार अपराधी भूरा सिंह और एक पुलिसवाला, सभी अलग-अलग परिस्थितियों में वैन का हिस्सा बनते जाते हैं।
इन किरदारों के बीच होने वाले संवाद और टकराव फिल्म को कॉमिक मोमेंट्स से भर देते हैं। खास बात यह है कि हास्य जबरन नहीं लगता, बल्कि हालात से खुद-ब-खुद निकलकर आता है।
अभिनय: आशुतोष राणा का अलग ही रंग
वेद प्रकाश जयसवाल चाचा के रूप में छाए
फिल्म में आशुतोष राणा का अभिनय सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। वेद प्रकाश जयसवाल के किरदार में उनकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों के हाव-भाव और डायलॉग डिलीवरी शानदार है। एक बाइपोलर व्यक्ति की मानसिक स्थिति को उन्होंने कॉमेडी और संवेदनशीलता के संतुलन के साथ पेश किया है।
ललित प्रभाकर और अनंत विजय जोशी अपने-अपने किरदारों में सहज नजर आते हैं। नायरा बनर्जी, हर्ष मायर, अशोक पाठक और चितरंजन गिरी जैसे कलाकार कहानी को सहारा देते हैं और फिल्म की रफ्तार बनाए रखते हैं। मुकेश तिवारी अपने छोटे लेकिन प्रभावी रोल में याद रह जाते हैं।
निर्देशक द्वय ने फिल्म को सिचुएशनल कॉमेडी के ट्रैक पर बनाए रखा है। कहानी में एक्शन और एडवेंचर का तड़का जरूर है, लेकिन फोकस किरदारों और उनके रिश्तों पर ही रहता है। संवाद सरल हैं और यूपी-बिहार की बोलचाल भाषा फिल्म को स्थानीय दर्शकों के और करीब लाती है।
हालांकि फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ा लंबा लग सकता है, लेकिन किरदारों की केमिस्ट्री इसे संभाल लेती है। बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के मूड के मुताबिक चलता है और कहीं भी हावी नहीं होता।
अगर आप गंभीर ड्रामा या भारी-भरकम मैसेज वाली फिल्मों से अलग कुछ हल्का, मजेदार और किरदार-प्रधान सिनेमा देखना चाहते हैं, तो ‘वन टू चा चा चा’ एक अच्छा विकल्प है। आशुतोष राणा की कॉमिक परफॉर्मेंस, मजेदार रोड जर्नी और सिचुएशनल ह्यूमर फिल्म को एक बार देखने लायक बनाते हैं।
कुल मिलाकर, ‘वन टू चा चा चा’ एक साफ-सुथरी कॉमेडी फिल्म है, जो बिना ज्यादा दिमाग लगाए दर्शकों को हंसाने और मनोरंजन करने में सफल रहती है।

