परीक्षा पे चर्चा: पीएम मोदी की 5 बड़ी बातें, छात्रों को प्रेरणा

Digital Desk
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ ने एक बार फिर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का ध्यान खींचा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य परीक्षा के दबाव को कम करना, छात्रों को सकारात्मक सोच देना और उन्हें जीवन के बड़े लक्ष्यों के लिए प्रेरित करना है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के छात्रों ने इस संवाद को न केवल टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस पर व्यापक चर्चा की।

इस साल के एपिसोड में पीएम मोदी ने छात्रों के सवालों के जवाब बेहद सरल उदाहरणों के साथ दिए। उन्होंने पढ़ाई को सिर्फ अंकों तक सीमित न रखने, बल्कि इसे जीवन निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखने की बात कही।

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत सिर्फ सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि युवाओं का सपना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भारत आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब आज के छात्र 39–40 साल के होंगे और वही देश की दिशा तय करेंगे।

उन्होंने भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई लोगों ने आजादी से 25–30 साल पहले ही बलिदान दे दिया था, तब जाकर देश आजाद हुआ। इसी तरह आज के छात्रों को भी अभी से यह तय करना होगा कि वे विकसित भारत के लिए क्या योगदान देंगे।

आत्मविश्वास से डर को कैसे भगाएं

प्रेजेंटेशन का डर और पीएम मोदी की सीख

एक छात्र ने सवाल किया कि प्रेजेंटेशन देते समय वह घबरा जाता है और आत्मविश्वास कैसे बढ़ाए। इस पर पीएम मोदी ने बेहद जमीनी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कभी आपने फुटपाथ पर रहने वाली किसी गरीब महिला को टीवी पर बोलते देखा है, वह बिना किसी ट्रेनिंग के भी आत्मविश्वास से बात करती है।

पीएम के मुताबिक, आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत सच्चाई और अपने काम पर भरोसा होता है। अगर छात्र यह जान लें कि उन्होंने जो पढ़ा और किया है, वही साझा कर रहे हैं, तो डर अपने आप खत्म हो जाएगा।

 गेमिंग और करियर: भारतीय कहानियों की ताकत

गोवा के एक छात्र ने गेमिंग में करियर को लेकर सवाल पूछा, जिस पर पीएम मोदी ने रचनात्मक सोच को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि भारत कहानियों का खजाना है। पंचतंत्र, महाभारत, रामायण और अभिमन्यु जैसे पात्रों पर आधारित गेम बनाकर छात्र अपनी पहचान बना सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि छात्र खुद की वेबसाइट बनाएं, वहां अपने गेम लॉन्च करें और धीरे-धीरे ऑडियंस बढ़ाएं। इससे न केवल करियर के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि भारतीय संस्कृति भी वैश्विक मंच पर पहुंचेगी।

मार्क्स-मार्क्स की बीमारी पर पीएम मोदी का संदेश

पीएम मोदी ने छात्रों में अंकों की अंधी दौड़ पर चिंता जताई। उन्होंने इसे ‘मार्क्स-मार्क्स की बीमारी’ बताया और कहा कि टॉप 1 से 10 तक के नाम कुछ समय बाद याद भी नहीं रहते।

उनका कहना था कि असली सवाल यह नहीं कि कितने नंबर आए, बल्कि यह है कि पढ़ाई ने जीवन को कैसे बदला। छात्रों को यह समझना चाहिए कि शिक्षा का मकसद सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता विकसित करना है

 स्किल बनाम मार्क्स: संतुलन ही सही रास्ता

एक अन्य छात्र ने सवाल किया कि स्किल ज्यादा जरूरी है या मार्क्स। इस पर पीएम मोदी ने साफ कहा कि इसका कोई एक सही जवाब नहीं है। अगर कोई सिर्फ स्किल या सिर्फ मार्क्स के पीछे भागेगा, तो असंतुलन पैदा होगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, छात्रों को दोनों के बीच संतुलन बनाना चाहिए। पढ़ाई के दौरान अच्छे अंक लाना जरूरी है, लेकिन साथ ही व्यावहारिक कौशल भी विकसित करना उतना ही महत्वपूर्ण है।

परीक्षा पे चर्चा का अगला एपिसोड 9 फरवरी सुबह 10 बजे जारी किया जाएगा। इसे DD News और शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर देखा जा सकेगा। इससे पहले 27 जनवरी को इसका ट्रेलर जारी किया गया था, जिसे छात्रों ने काफी पसंद किया।

उत्तर प्रदेश के छात्रों और अभिभावकों में इस एपिसोड को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि यह कार्यक्रम परीक्षा के तनाव को कम करने में मददगार साबित होता है।

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