: DMK-कांग्रेस में सीट बंटवारे पर तनातनी, बढ़ी सियासी तकरार

Digital Desk
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तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर तनाव खुलकर सामने आने लगा है। DMK और कांग्रेस के बीच आगामी चुनावों को लेकर सीट शेयरिंग पर मतभेद की खबरों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष अपने ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता पर नाराज हो गए, जिससे सियासी हलकों में हलचल बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टी के अंदर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ नेता गठबंधन में अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि नेतृत्व संयम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कर रहा है।

मामला तब तूल पकड़ गया जब कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने मीडिया के सामने सीट शेयरिंग को लेकर खुलकर टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए और पार्टी अपने जनाधार के अनुसार सीटों की मांग करेगी। इस बयान को लेकर TNCC अध्यक्ष ने नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह के मुद्दे सार्वजनिक मंच पर उठाने के बजाय पार्टी फोरम में रखे जाने चाहिए थे।

TNCC प्रमुख ने स्पष्ट किया कि गठबंधन धर्म और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और सार्वजनिक बयानबाजी से सहयोगी दलों के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है।

संगठनात्मक अनुशासन पर जोर

पार्टी नेतृत्व ने कहा कि कांग्रेस गठबंधन की अहम सहयोगी है और सीटों को लेकर बातचीत सही समय पर और उचित स्तर पर की जाएगी। उन्होंने नेताओं को मीडिया में अनावश्यक बयान देने से बचने की सलाह दी और संगठनात्मक अनुशासन का पालन करने पर जोर दिया।

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DMK के साथ बातचीत जारी, समाधान की कोशिश

कांग्रेस और DMK के बीच सीट शेयरिंग को लेकर औपचारिक बातचीत का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों दल गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के पक्ष में हैं और किसी भी तरह के विवाद को आपसी संवाद से सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में गठबंधन राजनीति का लंबा इतिहास रहा है और चुनाव से पहले इस तरह की खींचतान सामान्य मानी जाती है। अंतिम समझौते में दोनों दलों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।

 गठबंधन की मजबूती क्यों है अहम?

तमिलनाडु में DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन पिछले चुनावों में मजबूत प्रदर्शन कर चुका है। कांग्रेस इस गठबंधन की प्रमुख सहयोगी है और दोनों दल मिलकर विपक्ष के खिलाफ चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर मतभेद को जल्द सुलझाना राजनीतिक रूप से जरूरी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गठबंधन की एकजुटता मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देती है, जबकि आंतरिक विवाद विपक्ष को मुद्दा दे सकते हैं।

राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है असर

DMK और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के महत्वपूर्ण हिस्से माने जाते हैं। ऐसे में तमिलनाडु में सीट शेयरिंग को लेकर पैदा हुआ विवाद राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में भी राजनीतिक दल गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर रणनीति बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच तालमेल आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभाएगा।

फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व ने विवाद को बढ़ाने के बजाय आंतरिक स्तर पर सुलझाने का संकेत दिया है। वहीं DMK की ओर से भी गठबंधन को लेकर सकारात्मक रुख बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि बातचीत के जरिए जल्द ही सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी मौसम में बयानबाजी और दबाव की राजनीति आम बात है, लेकिन अंततः गठबंधन की मजबूती और जीत की रणनीति को प्राथमिकता दी जाती है।

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