तमिलनाडु चुनाव: सीट बंटवारे पर बढ़ी तकरार

Digital Desk
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तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। खासतौर पर मणिथनेया मक्कल काची (MMK) ने सहयोगी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) से पांच सीटों की मांग कर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

गठबंधन राजनीति में सीटों का बंटवारा हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन इस बार MMK की स्पष्ट और सार्वजनिक मांग ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि पिछले चुनावों में उसके प्रदर्शन और जनाधार को देखते हुए उसे उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

MMK का दावा है कि उसके प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी मजबूत स्थिति में है और इन सीटों पर वह गठबंधन को जीत दिला सकती है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच उसका प्रभाव गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित होगा।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यदि उसे पर्याप्त सीटें नहीं दी जातीं, तो कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ सकता है। हालांकि MMK ने अभी तक गठबंधन छोड़ने जैसी कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं दी है, लेकिन अंदरखाने नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांच सीटों की मांग रणनीतिक दबाव बनाने का हिस्सा भी हो सकती है, ताकि अंतिम समझौते में पार्टी को संतोषजनक हिस्सेदारी मिल सके।

DMK की रणनीति और गठबंधन संतुलन

दूसरी ओर DMK नेतृत्व के सामने सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है। तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन समीकरण बेहद अहम होते हैं और हर पार्टी अपने क्षेत्रीय प्रभाव के आधार पर सीटों की मांग करती है।

DMK का प्रयास है कि सभी सहयोगियों को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरा जाए, ताकि विपक्ष के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम फैसले में समझौता फार्मूला सामने आ सकता है, जिसमें कुछ सीटों पर अदला-बदली या समर्थन का मॉडल अपनाया जा सकता है।

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विपक्ष की नजर और चुनावी असर

सीट बंटवारे को लेकर जारी खींचतान पर विपक्ष भी नजर बनाए हुए है। यदि गठबंधन में मतभेद ज्यादा बढ़ते हैं, तो इसका फायदा विपक्षी दल उठा सकते हैं। चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश देना हर गठबंधन के लिए जरूरी होता है।

तमिलनाडु की राजनीति में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में छोटे दलों की नाराजगी बड़े चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में सीटों के अंतिम बंटवारे की घोषणा होने की उम्मीद है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन की मजबूती बनाए रखने के लिए समझौते की संभावना ज्यादा है।

तमिलनाडु चुनाव से पहले यह सीट बंटवारे का विवाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या MMK को पांच सीटें मिलती हैं या फिर कोई नया फार्मूला सामने आता है।

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