महाराष्ट्र सरकार ने Navi Mumbai में सामने आए कथित आवासीय घोटाले की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर दी है। यह निर्णय शुरुआती रिपोर्टों और शिकायतों के बाद लिया गया, जिनमें आवास आवंटन और परियोजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कमेटी में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शहरी विकास विभाग के प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। कमेटी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घोटाले से जुड़े आरोपों में पात्रता मानकों की अनदेखी, आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और परियोजनाओं की लागत में कथित गड़बड़ियां शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा
उच्च स्तरीय कमेटी आवासीय परियोजनाओं की पूरी आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। इसमें आवेदन, चयन, दस्तावेज सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया की जांच शामिल है।
सरकार का कहना है कि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता पर जोर
राज्य प्रशासन ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवास योजनाओं में डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी ऑनलाइन सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी।
2025 में 41 बाघों की मौत: वन विभाग अलर्ट
महाराष्ट्र देश के प्रमुख बाघ आवास क्षेत्रों में से एक है, जहां कई संरक्षित अभयारण्य और टाइगर रिजर्व स्थित हैं, जिनमें Tadoba Andhari Tiger Reserve प्रमुख है।
वन अधिकारियों के अनुसार, बाघों की मौत के कारणों में प्राकृतिक कारण, आपसी संघर्ष, बीमारी और कुछ मामलों में मानवीय हस्तक्षेप शामिल हो सकते हैं। प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है।
संरक्षण उपायों पर जोर
निगरानी बढ़ाने के निर्देश
राज्य वन विभाग ने सभी टाइगर रिजर्व में गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। ड्रोन और कैमरा ट्रैप जैसी तकनीकों का उपयोग भी बढ़ाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की संख्या बढ़ने के साथ उनके बीच क्षेत्रीय संघर्ष भी बढ़ता है, जिससे मौत के मामलों में वृद्धि हो सकती है।
मानव-बाघ संघर्ष की चुनौती
ग्रामीण इलाकों में मानव-बाघ संघर्ष भी एक बड़ी चुनौती है। वन विभाग स्थानीय समुदायों को जागरूक करने और मुआवजा प्रक्रिया को तेज करने पर काम कर रहा है, ताकि तनाव कम किया जा सके।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार ने दोनों मुद्दों—नवी मुंबई आवासीय घोटाला और बाघों की मौत—को गंभीरता से लिया है। शहरी विकास विभाग और वन विभाग को अलग-अलग रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि आवासीय योजनाओं में पारदर्शिता और वन्यजीव संरक्षण दोनों ही उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
नवी मुंबई आवासीय घोटाले की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन स्तरों पर चूक हुई और किसके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं बाघों की मौत के मामलों में विस्तृत पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
महाराष्ट्र में ये दोनों घटनाएं प्रशासनिक जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अहम मानी जा रही हैं। आने वाले महीनों में इन मामलों की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी।
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