रूस-यूक्रेन युद्ध में लुधियाना के युवक की मौत

Digital Desk
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रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक और भारतीय परिवार को गहरा दुख दे दिया है। पंजाब के लुधियाना जिले के रहने वाले युवक समरजीत की मौत की खबर जैसे ही उसके घर पहुंची, पूरे परिवार में मातम छा गया। बताया जा रहा है कि समरजीत कुछ समय पहले ही बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गया था, लेकिन युद्ध की चपेट में आने से उसकी जान चली गई।

परिजनों के अनुसार, समरजीत के पिता ने बेटे को विदेश भेजने के लिए कर्ज तक लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा विदेश में काम करके घर की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब समरजीत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर भारत पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

इस घटना ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव और आसपास के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोग और रिश्तेदार परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।

पिता ने कर्ज लेकर भेजा था बेटा

समरजीत के परिवार के मुताबिक, वह मेहनती और जिम्मेदार युवक था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए परिवार ने सोचा कि अगर वह विदेश जाकर काम करेगा तो भविष्य बेहतर हो सकता है। इसी उम्मीद में उसके पिता ने कर्ज लेकर बेटे को विदेश भेजा था।

परिवार को भरोसा था कि कुछ वर्षों की मेहनत के बाद समरजीत कर्ज चुका देगा और घर की हालत भी सुधर जाएगी। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते हालात अचानक बदल गए और परिवार का सपना अधूरा रह गया।

जब समरजीत की मौत की खबर आई, तो परिवार को विश्वास ही नहीं हुआ। घर में मातम का माहौल है और परिजन अभी भी इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।

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तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा पार्थिव शरीर

समरजीत का पार्थिव शरीर जब भारत लाया गया, तो उसे पूरे सम्मान के साथ तिरंगे में लपेटा गया। जैसे ही शव गांव पहुंचा, वहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए।

परिवार के सदस्य अपने बेटे को आखिरी बार देखकर भावुक हो उठे। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के लोगों ने भी नम आंखों से समरजीत को अंतिम विदाई दी।

इस दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के समय लोगों ने समरजीत को श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

 युद्ध का असर आम परिवारों तक

रूस-यूक्रेन युद्ध का असर सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों और परिवारों पर भी पड़ रहा है। कई भारतीय युवक बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाते हैं, लेकिन युद्ध जैसे हालात उनके लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने वाले युवाओं को हमेशा सुरक्षा और कानूनी स्थिति के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए। वहीं सरकार भी समय-समय पर अपने नागरिकों को सुरक्षित रहने की सलाह देती रहती है।

समरजीत की मौत की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय युवाओं की सुरक्षा को लेकर और क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

समरजीत के गांव में इस घटना के बाद गहरा शोक का माहौल है। पड़ोसी और रिश्तेदार लगातार परिवार के घर पहुंच रहे हैं और उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की है।

परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका बेटा इस तरह उनसे दूर हो जाएगा। घर में हर कोई समरजीत की यादों को याद कर भावुक हो रहा है।

गांव के लोगों ने सरकार से मांग की है कि परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि उन्हें इस कठिन समय में सहारा मिल सके।

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