हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत भक्ति भाव से मनाते हैं। साल 2026 में यह पावन पर्व कल मनाया जाएगा, जिसे लेकर उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में भक्तों के बीच उत्साह देखा जा रहा है।
माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। खासकर जो लोग नियमित रूप से यह व्रत करते हैं, उन्हें भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार यह तिथि कल पड़ रही है, जो सुबह से शुरू होकर देर रात तक रहेगी। भक्त इस दिन व्रत रखकर रात में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं।
उत्तर प्रदेश के कई मंदिरों में विशेष आयोजन भी किए जाएंगे, जहां भजन-कीर्तन और झांकियों का आयोजन होगा।

पूजा का शुभ समय
जन्माष्टमी की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय निशिता काल यानी आधी रात का होता है। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्म माना जाता है। इसलिए भक्त रात 12 बजे विशेष पूजा करते हैं।
इसके अलावा, दिन में भी पूजा और व्रत का पालन किया जाता है। भक्त सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और दिनभर भगवान का ध्यान करते हैं।
मासिक जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है, जिन्होंने धर्म की स्थापना के लिए जन्म लिया था। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर इस दिन विशेष महत्व देखा जाता है, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पूजा विधि और व्रत करने का तरीका
मासिक जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
फिर व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें। कई लोग निर्जला व्रत भी करते हैं, जबकि कुछ फलाहार का सेवन करते हैं।
पूजा की पूरी प्रक्रिया
रात के समय भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा की जाती है। इसमें उन्हें पंचामृत से स्नान कराया जाता है और नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
इसके बाद उन्हें मक्खन, मिश्री, फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है। भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हैं।
आधी रात को भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसमें झूला झुलाने की परंपरा भी होती है।
उत्तर प्रदेश में कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी
उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी का पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर मथुरा, वृंदावन, कानपुर और लखनऊ में मंदिरों को सजाया जाता है और भव्य आयोजन किए जाते हैं।
यहां की झांकियां और रासलीला कार्यक्रम श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। लोग रातभर जागरण करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के भजन गाते हैं।
स्थानीय बाजारों में भी इस पर्व को लेकर खास रौनक देखने को मिलती है। पूजा सामग्री, झूले, और भगवान की मूर्तियों की खरीदारी बढ़ जाती है।
व्रत रखने के फायदे और सावधानियां
मासिक जन्माष्टमी का व्रत रखने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह व्रत आत्म-संयम और भक्ति का प्रतीक है।
हालांकि, व्रत रखते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जैसे कि स्वास्थ्य का ध्यान रखना, अधिक कमजोरी महसूस होने पर फलाहार करना और पर्याप्त पानी पीना।
बुजुर्ग और बीमार लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए।
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