80 के दशक में प्रसारित हुआ रामानंद सागर का पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ भारतीय टेलीविजन इतिहास का सबसे लोकप्रिय और सफल शो माना जाता है। उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में इस धारावाहिक को लोगों ने श्रद्धा और भावनाओं से जोड़ा। आज भी जब रामायण का प्रसारण होता है तो दर्शकों में वही उत्साह देखने को मिलता है। इस शो ने कई कलाकारों को घर-घर में पहचान दिलाई।
अरुण गोविल ने भगवान राम की भूमिका निभाकर अमिट छाप छोड़ी, वहीं दीपिका चिखलिया माता सीता के किरदार से लोगों के दिलों में बस गईं। अरविंद त्रिवेदी और सुनील लहरी जैसे कलाकारों को भी जबरदस्त लोकप्रियता मिली। लेकिन इसी धारावाहिक का एक कलाकार ऐसा भी था, जिसने अपनी छोटी सी भूमिका से दर्शकों का दिल जीत लिया, फिर भी वह लंबे समय तक स्टारडम से दूर रहा।
यह कलाकार थे कौस्तुभ त्रिवेदी, जिन्होंने ‘रामायण’ में केवट की भूमिका निभाई थी।
केवट के किरदार ने दर्शकों को भावुक कर दिया
रामायण के सबसे चर्चित दृश्यों में से एक वह था, जब भगवान राम वनवास के दौरान गंगा पार करने के लिए केवट से नाव मांगते हैं। इस दृश्य में केवट का भक्ति भाव और विनम्रता दर्शकों को भावुक कर देती है।
कौस्तुभ त्रिवेदी ने इस भूमिका को इतने सहज और प्रभावशाली अंदाज में निभाया कि यह किरदार आज भी लोगों की यादों में जिंदा है। खासकर उत्तर प्रदेश और हिंदी भाषी क्षेत्रों में यह दृश्य धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद लोकप्रिय माना जाता है।
केवट द्वारा प्रभु श्रीराम के चरण धोने वाला दृश्य भारतीय टीवी इतिहास के सबसे भावनात्मक दृश्यों में गिना जाता है। कौस्तुभ की संवाद अदायगी और चेहरे के भावों ने इस किरदार को जीवंत बना दिया था।
गुजराती थिएटर की दुनिया का बड़ा नाम थे कौस्तुभ त्रिवेदी
बहुत कम लोग जानते हैं कि कौस्तुभ त्रिवेदी सिर्फ टीवी कलाकार ही नहीं, बल्कि गुजराती थिएटर की दुनिया का भी जाना-माना नाम थे। उन्होंने अपने करियर में करीब 200 से अधिक नाटकों में अभिनय किया और कई नाटकों का निर्माण भी किया।
थिएटर में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी। अभिनय के साथ-साथ मंच संचालन और नाटक निर्माण में भी उन्होंने खास पहचान बनाई। गुजराती रंगमंच में उन्हें एक सम्मानित कलाकार के तौर पर देखा जाता था।
हालांकि, थिएटर की दुनिया में नाम कमाने के बावजूद उन्हें हिंदी टीवी इंडस्ट्री और फिल्मों में वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। रामायण में शानदार अभिनय के बाद भी उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं मिले।

अभिनय से दूरी बनाकर प्रोडक्शन में रखा कदम
रामायण के बाद कौस्तुभ त्रिवेदी ने धीरे-धीरे अभिनय की दुनिया से दूरी बना ली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने नाटक निर्माण और थिएटर प्रोडक्शन पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया था।
करीब 25 वर्षों तक उन्होंने गुजराती थिएटर में सक्रिय भूमिका निभाई। वह नए कलाकारों को मंच देने और थिएटर को मजबूत बनाने में जुटे रहे।
उनका मानना था कि थिएटर अभिनय की असली पाठशाला है। यही वजह रही कि उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से दूर रहकर कला और मंच को प्राथमिकता दी।
टीवी इंडस्ट्री में नहीं मिला बड़ा मुकाम
रामायण के कई कलाकारों को शो खत्म होने के बाद फिल्मों, राजनीति और टीवी में नई पहचान मिली, लेकिन कौस्तुभ त्रिवेदी का सफर अलग रहा।
हालांकि उनके अभिनय की तारीफ हुई, लेकिन उन्हें मुख्यधारा की इंडस्ट्री में लगातार मौके नहीं मिले। यही कारण रहा कि समय के साथ वह लाइमलाइट से दूर होते चले गए।
फिर भी रामायण के दर्शक उन्हें आज भी ‘केवट’ के रूप में याद करते हैं। सोशल मीडिया पर भी कई बार उनके अभिनय की चर्चा होती रही है।
मई 2025 में हुआ निधन
कौस्तुभ त्रिवेदी को लेकर साल 2025 में दुखद खबर सामने आई थी। बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मई 2025 में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से गुजराती थिएटर और टीवी जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी।
कई कलाकारों और थिएटर से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रामायण के केवट को याद करते हुए भावुक पोस्ट साझा किए।
उनके निधन के बाद एक बार फिर लोगों ने रामायण के उस यादगार दृश्य को याद किया, जिसने उन्हें अमर बना दिया।
आज भी याद किया जाता है ‘रामायण’ का केवट
रामायण सिर्फ एक टीवी शो नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का हिस्सा बन चुका है। इस धारावाहिक के हर किरदार ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
कौस्तुभ त्रिवेदी भले ही लंबे समय तक सुर्खियों में नहीं रहे, लेकिन उनके निभाए केवट के किरदार ने उन्हें अमर कर दिया। आज भी जब रामायण का यह दृश्य टीवी या सोशल मीडिया पर दिखाया जाता है, तो लोग भावुक हो उठते हैं।
उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक दर्शकों के बीच रामायण की लोकप्रियता आज भी कायम है। यही वजह है कि शो के कलाकारों से जुड़ी कहानियां लोगों की दिलचस्पी का हिस्सा बनी रहती हैं।
रामायण के कलाकारों की लोकप्रियता आज भी बरकरार
बीते कुछ वर्षों में रामायण के कलाकारों की लोकप्रियता फिर से बढ़ी है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लोग पुराने एपिसोड्स और कलाकारों से जुड़ी जानकारी खोजते रहते हैं।
नई पीढ़ी भी इस धारावाहिक को भारतीय टेलीविजन का क्लासिक शो मानती है। यही कारण है कि रामायण के कलाकारों की जिंदगी और संघर्ष से जुड़ी खबरें लगातार चर्चा में रहती हैं।
कौस्तुभ त्रिवेदी की कहानी भी ऐसे ही कलाकार की कहानी है, जिसने अभिनय से लोगों का दिल जीता, लेकिन शोहरत की चमक से हमेशा दूर रहा।
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