
लखनऊ प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को उपभोक्ताओं की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन अब यही व्यवस्था बिजली निगम के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज के बावजूद तय समय में बिजली आपूर्ति बहाल न करने पर पावर कॉर्पोरेशन पर 7.18 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। आयोग का यह फैसला प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मामला उस समय सामने आया जब राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि प्रदेश के हजारों उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज कराने के बाद भी समय पर बिजली नहीं मिली। स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था के तहत यदि किसी उपभोक्ता का बैलेंस समाप्त हो जाता है तो बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है। नियमों के अनुसार उपभोक्ता द्वारा रिचार्ज किए जाने के बाद अधिकतम दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल होना अनिवार्य है। लेकिन कई मामलों में यह व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों उपभोक्ताओं को रिचार्ज के बाद भी लंबे समय तक बिजली से वंचित रहना पड़ा, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। परिषद ने प्रभावित उपभोक्ताओं को मुआवजा देने की भी मांग की। याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह शामिल थे, ने पावर कॉर्पोरेशन से विस्तृत रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज तलब किए। जांच के दौरान सामने आया कि 13, 14, 16, 17, 18, 23, 25 और 28 मार्च के अलावा 2 और 7 अप्रैल 2026 को बड़ी संख्या में ऐसे मामले दर्ज हुए, जिनमें रिचार्ज के बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई।

जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि सेवा मानकों के अनुपालन का स्तर 95 प्रतिशत होना चाहिए था, लेकिन संबंधित अवधि में यह घटकर मात्र 77 प्रतिशत रह गया। यह विद्युत सेवा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पावर कॉर्पोरेशन ने भी अपने जवाब में स्वीकार किया कि कई उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति तय दो घंटे की समयसीमा के भीतर बहाल नहीं हो सकी।इसके बाद आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए निगम पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। आयोग के आदेश के अनुसार प्रति उल्लंघन एक लाख रुपये तथा देरी के प्रत्येक दिन के लिए अतिरिक्त छह हजार रुपये का दंड निर्धारित किया गया। साथ ही निगम को 15 दिनों के भीतर जुर्माना राशि जमा करने और विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।इस फैसले के बाद उपभोक्ता परिषद ने प्रभावित 1 लाख 93 हजार 143 उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से मुआवजा देने की मांग भी तेज कर दी है। परिषद का कहना है कि जब उपभोक्ताओं ने समय पर भुगतान और रिचार्ज किया, तब उन्हें सेवा न मिलना उनकी गलती नहीं थी। ऐसे में उन्हें आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई मिलनी चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राज्य के विद्युत नियामक आयोग द्वारा डिस्कॉम पर इस स्तर का जुर्माना लगाया जाना एक दुर्लभ और ऐतिहासिक कदम है। आयोग के इस सख्त फैसले से बिजली कंपनियों को स्पष्ट संदेश गया है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी अब महंगी पड़ सकती है। साथ ही यह फैसला प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत और भरोसे की नई उम्मीद लेकर आया है।
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