NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा एक्शन: 22 जून तक Telegram बंद, सीएम योगी ने बुलाई हाई लेवल बैठक

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था से लेकर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET तक, इस समय हर मोर्चे पर सरकार अलर्ट मोड में नजर आ रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज रात नौ बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा करने जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने NEET री-एग्जाम से पहले ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसने देशभर में हलचल मचा दी है। सरकार ने 22 जून तक पूरे भारत में Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया है, ताकि परीक्षा से जुड़ी अफवाहों और कथित पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की होने वाली इस हाई लेवल बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सभी जिलों के डीएम, पुलिस कमिश्नर, एसपी और अन्य फील्ड अधिकारी भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था की समीक्षा के साथ-साथ 21 जून को होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, आगामी मोहर्रम और NEET री-एग्जाम की तैयारियों का भी जायजा लेंगे। दरअसल प्रदेश सरकार किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था में ढील नहीं देना चाहती। योग दिवस पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें लाखों लोग हिस्सा लेंगे। वहीं मोहर्रम का महीना भी शुरू होने वाला है। ऐसे में संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है। मुख्यमंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा फोकस NEET री-एग्जाम पर है। पिछले दिनों परीक्षा को लेकर जिस तरह पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप सामने आए, उसके बाद सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। यही वजह है कि परीक्षा से पहले सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया गया है। केंद्र सरकार ने इसी क्रम में बड़ा कदम उठाते हुए Telegram पर 22 जून तक अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि कुछ Telegram चैनलों और ग्रुप्स के जरिए फर्जी पेपर, पेपर लीक की अफवाहें और भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही थीं, जिससे छात्रों में भ्रम और डर का माहौल बन रहा था। इसलिए परीक्षा की पवित्रता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सिफारिश के बाद लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। सरकार ने साफ किया है कि यह स्थायी प्रतिबंध नहीं है और 22 जून के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी। NEET री-एग्जाम 21 जून को आयोजित होना है। इस परीक्षा में देशभर के लाखों छात्र शामिल होंगे। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से पेपर लीक और परीक्षा की गोपनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई ऐसे चैनल सक्रिय पाए गए, जो कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र बेचने या लीक होने के दावे कर रहे थे। हालांकि एनटीए ने ऐसे सभी दावों को फर्जी बताया है और छात्रों से किसी भी अफवाह पर भरोसा न करने की अपील की है। एनटीए का कहना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही कई जानकारियां पूरी तरह भ्रामक हैं। एजेंसी ने ऐसे चैनलों और ग्रुप्स के खिलाफ साइबर क्राइम एजेंसियों से कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया है। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में भी NEET परीक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक में परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, अभ्यर्थियों की सुविधाओं और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। अधिकारियों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इधर Telegram पर रोक लगाने के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई है। एक वर्ग इसे परीक्षा की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है। उनका कहना है कि अगर इस फैसले से लाखों छात्रों का भविष्य सुरक्षित होता है तो यह बिल्कुल सही है। वहीं कुछ लोग इसे अत्यधिक सख्त कदम मान रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी एक प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने से पेपर लीक जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान हो जाएगा।हालांकि सरकार का रुख फिलहाल बिल्कुल साफ है। केंद्र और राज्य दोनों ही स्तर पर यह संदेश दिया जा रहा है कि परीक्षा की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। चाहे कानून व्यवस्था का सवाल हो, मोहर्रम की सुरक्षा हो या फिर NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा, हर स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।अब सबकी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आज रात होने वाली समीक्षा बैठक और 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम पर टिकी है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो। क्योंकि इस बार दांव पर सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों छात्रों का भविष्य और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता लगी हुई है।

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