पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन बेहद अहम रहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारकेश्वर की धरती से न केवल किसानों के खातों में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त जारी की, बल्कि राज्य की नई राजनीतिक दिशा, विकास की गति और इतिहास से जुड़े मुद्दों पर भी जोरदार संदेश दिया। प्रधानमंत्री के संबोधन में विकास, इतिहास, राजनीति और सांस्कृतिक विरासत का ऐसा मिश्रण देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम को केवल एक सरकारी आयोजन तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक और वैचारिक संदेश में बदल दिया। तारकेश्वर में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत दो-दो हजार रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूती केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और सरकार लगातार ऐसी योजनाएं लागू कर रही है, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सके। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह दिन केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि बंगाल के संघर्ष, बलिदान और अस्मिता की याद दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि बंगाल की धरती ने देश को अनेक महापुरुष, क्रांतिकारी और विचारक दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने राज्य में हुए राजनीतिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल अब दशकों के कुशासन, भ्रष्टाचार और राजनीतिक बाधाओं से बाहर निकलकर विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद विकास कार्यों की रफ्तार तेज हुई है और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि बंगाल की जनता लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियों का सामना करती रही, जहां विकास की संभावनाएं राजनीति की भेंट चढ़ती रहीं। लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं और राज्य तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल की हवा में बदलाव महसूस किया जा सकता है और लोगों के मन में भविष्य को लेकर नई उम्मीदें दिखाई दे रही हैं। अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने इतिहास का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले और विभाजन के दौर में बंगाल ने जो दर्द झेला, उसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने 1946 के कोलकाता दंगों और विभाजन के समय की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में बंगाल ने भारी रक्तपात, विस्थापन और असुरक्षा का सामना किया था।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने की कोशिशें हो रही थीं, तब तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व षड्यंत्रकारियों के सामने झुकने को तैयार दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने निर्णायक भूमिका निभाई और पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए मजबूत आंदोलन खड़ा किया। मोदी ने कहा कि अप्रैल 1947 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर यह स्पष्ट कर दिया था कि पूरा बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की पहचान, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए चलाया गया वह आंदोलन आज भी प्रेरणा का स्रोत है।प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी पश्चिम बंगाल के इतिहास और उसके वास्तविक नायकों को पर्याप्त सम्मान नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों को दबाने की कोशिश की गई और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं के योगदान को नजरअंदाज किया गया।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पश्चिम बंगाल दिवस के महत्व और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। यदि युवा पीढ़ी अपने इतिहास को समझेगी, तभी वह भविष्य के लिए सही दिशा तय कर सकेगी।प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि केंद्र सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि, बुनियादी ढांचे, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगले दिन पूरी दुनिया योग दिवस मनाने जा रही है और इस बार वह स्वयं बंगाल की धरती से योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसी महान विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल आध्यात्मिक चेतना और योग की समृद्ध परंपरा वाली भूमि है।उन्होंने राज्य के लोगों से अपील की कि योग दिवस को जनआंदोलन का रूप दें और गांव-गांव, शहर-शहर बड़े पैमाने पर आयोजन करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवन का आधार है।तारकेश्वर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन केवल किसानों को आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहा। इसमें बंगाल की राजनीति, इतिहास, विकास और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कई बड़े संदेश शामिल रहे। एक ओर उन्होंने किसानों के खाते में सम्मान निधि की राशि भेजकर सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर इतिहास और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखकर राज्य की राजनीति को भी नई चर्चा दे दी। पश्चिम बंगाल दिवस के मंच से दिया गया यह संदेश आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
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