‘रक्षक ही बने भक्षक’! NTA पर शिक्षा मंत्री का बड़ा खुलासा, भरोसा तोड़ने वाले शिक्षकों ने हिला दी थी परीक्षा व्यवस्था

Editorial
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को लेकर पिछले वर्ष उठे विवादों और पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर लगातार सवाल उठ रहे थे। लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर गहरा अविश्वास पैदा हो गया था। ऐसे माहौल में आयोजित हुई नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार विस्तार से बताया कि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पिछली बार कुछ ऐसे लोग थे जिन्होंने अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन नहीं किया और जिन पर परीक्षा की सुरक्षा का जिम्मा था, वही व्यवस्था की कमजोरी का कारण बन गए। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कुछ शिक्षकों और विशेषज्ञों पर भरोसा किया था, लेकिन कुछ लोगों ने उस भरोसे को तोड़ दिया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जिन लोगों को परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनमें से कुछ अपने दायित्वों से भटक गए। यही कारण था कि परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए और लाखों छात्रों की मेहनत तथा भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे। शिक्षा मंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता देशभर के प्रतिभाशाली और मेहनती विद्यार्थियों को निष्पक्ष वातावरण में परीक्षा देने का अवसर उपलब्ध कराना था। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता ही छात्रों का सबसे बड़ा विश्वास होती है और यदि उस पर आंच आती है तो पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाती है। इसी वजह से इस बार पुनर्परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया गया। शिक्षा मंत्री के अनुसार, री-नीट परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती नया प्रश्नपत्र तैयार करना था। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार प्रश्नपत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय और बहुस्तरीय बनाया गया। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञों और विषय विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने कई प्रश्नपत्र सेट तैयार किए ताकि अंतिम समय तक यह तय न हो सके कि परीक्षा में किस सेट का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतिम चयन की जानकारी बेहद सीमित लोगों तक रखी गई, जिससे किसी भी प्रकार की सूचना लीक होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई।धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को कई दिनों तक पूरी तरह अलग रखा गया था। उन्हें इंटरनेट, मोबाइल फोन और बाहरी संपर्क के किसी भी माध्यम तक पहुंच नहीं दी गई। इस दौरान उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी गई ताकि कोई भी संवेदनशील जानकारी बाहर न जा सके। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था असाधारण जरूर थी, लेकिन परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए आवश्यक थी। सरकार ने केवल प्रश्नपत्र निर्माण तक ही सुरक्षा को सीमित नहीं रखा, बल्कि परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था लागू की गई। परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी कैमरों और नियंत्रण कक्षों के माध्यम से पूरे परीक्षा संचालन पर नजर रखी गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

21 जून को आयोजित हुई नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा को लेकर सरकार विशेष रूप से सतर्क थी। पिछले वर्ष पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने न केवल परीक्षा प्रणाली बल्कि एनटीए की साख को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया था। लाखों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए थे और न्यायालयों तक मामला पहुंचा था। ऐसे में इस बार सरकार के सामने केवल परीक्षा कराना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि छात्रों और अभिभावकों का विश्वास वापस जीतना भी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने इस बार पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने विश्वास जताया कि मेहनत करने वाले छात्रों को उनकी मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा और परीक्षा प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।हालांकि शिक्षा मंत्री के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि आखिर वे लोग कौन थे जिन्होंने परीक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाया और क्या उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई हुई है। विपक्षी दल और छात्र संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों की पहचान सार्वजनिक की जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल सरकार पुनर्परीक्षा को सफल और सुरक्षित बताकर संतोष जता रही है, लेकिन असली परीक्षा अब परिणामों और छात्रों के विश्वास की है। करोड़ों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार की व्यवस्था वास्तव में उतनी ही मजबूत साबित होती है जितना दावा किया जा रहा है। इतना जरूर है कि नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस और नई उम्मीद दोनों को जन्म दिया है।

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