फतेहपुर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का सीतापुर गांव एक ऐसी पारिवारिक त्रासदी का गवाह बना, जिसने रिश्तों पर ही सवाल खड़े कर दिए। जिस पिता ने बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी ने लाइसेंसी दुनाली बंदूक से उसके सीने पर मौत बरसा दी। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि इस खूनी वारदात से पहले मां ने अपने पति से कहा— “आज दोनों को ही मारना है… दोनों को मार डालो, फिर पानी पीना।” यही कथित उकसावा कुछ ही पलों में पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ गया।बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के सीतापुर गांव में बुधवार को इलाज के खर्च, खेती और संपत्ति के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि पिता रामखेलावन पटेल (75) ने अपने बेटे अवनीश (35) और बहू मनीषा (28) उर्फ प्रियंका पर लाइसेंसी दुनाली बंदूक से फायरिंग कर दी। इस हमले में अवनीश की मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल मनीषा का कानपुर के अस्पताल में ऑपरेशन किया गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
- इलाज के खर्च से शुरू हुआ झगड़ा, संपत्ति तक पहुंचा विवाद
- ‘दोनों को मत छोड़ना’… और फिर गूंजीं गोलियों की आवाज
- अस्पताल पहुंचते ही टूट गई परिवार की आखिरी उम्मीद
- पोस्टमार्टम के बाद मां को शव छूने तक नहीं दिया
- चार लोगों पर हत्या का केस दर्ज
- मुख्य आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
- गांव में मातम, रिश्तों पर उठे सवाल
इलाज के खर्च से शुरू हुआ झगड़ा, संपत्ति तक पहुंचा विवाद
जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले रामखेलावन की पत्नी मिथलेश का पैर फ्रैक्चर हो गया था। इलाज के खर्च और देखभाल को लेकर परिवार में कई दिनों से तनाव चल रहा था। बुधवार सुबह इसी मुद्दे पर पिता और बेटे के बीच बहस शुरू हुई। तभी बहू मनीषा भी मौके पर पहुंची और फसल तथा संपत्ति में हिस्सेदारी की बात उठाई। उसने कहा कि हिस्सा मिलने पर ही वे देखभाल की जिम्मेदारी निभाएंगे।इस बात से रामखेलावन गुस्से से आगबबूला हो गया। उसने बहू पर हाथ उठाने की कोशिश की, लेकिन बेटे अवनीश ने बीच-बचाव करते हुए पिता को पीछे धक्का दे दिया। इसी धक्के ने पूरे घटनाक्रम को खूनी मोड़ दे दिया।

‘दोनों को मत छोड़ना’… और फिर गूंजीं गोलियों की आवाज
आरोप है कि इसी दौरान रामखेलावन की पत्नी मिथलेश ने अपने पति को दोनों को नहीं छोड़ने के लिए उकसाया। गुस्से में रामखेलावन कमरे के अंदर गया, लाइसेंसी दुनाली बंदूक उठाकर बाहर आया और पहले बेटे अवनीश पर गोली चला दी। गोली उसके हाथ और शरीर में लगी। इसके तुरंत बाद दूसरी गोली बहू मनीषा के पेट में जा धंसी।एक ही घर में चली दो गोलियों की आवाज से गांव में हड़कंप मच गया। लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। दोनों पति-पत्नी करीब 40 मिनट तक दरवाजे पर तड़पते रहे। बाद में ग्रामीणों और प्रधान की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुंचते ही टूट गई परिवार की आखिरी उम्मीद
गंभीर रूप से घायल अवनीश और मनीषा को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर कानपुर रेफर किया गया। रीजेंसी अस्पताल में डॉक्टरों ने अवनीश को मृत घोषित कर दिया। अधिक खून बहने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। वहीं मनीषा के पेट से ऑपरेशन कर गोली निकाली गई और उसकी जान बचा ली गई।
पोस्टमार्टम के बाद मां को शव छूने तक नहीं दिया
जब पोस्टमार्टम के बाद अवनीश का शव गांव पहुंचा तो उसकी मां मिथलेश अंतिम दर्शन के लिए रोते-बिलखते पहुंची। लेकिन बहू के मायके वालों ने उसे शव के पास जाने से रोक दिया। उनका आरोप था कि अगर उसने पति को उकसाया न होता तो आज अवनीश जिंदा होता। इसके बाद चचेरे भाई पंकज ने पैतृक खेत में अवनीश का अंतिम संस्कार किया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
चार लोगों पर हत्या का केस दर्ज
मृतक अवनीश के साले प्रदीप कुमार की तहरीर पर पुलिस ने पिता रामखेलावन, मां मिथलेश, छोटे भाई मनीष और उसकी पत्नी साक्षी के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और साजिश समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संतान न होने और संपत्ति विवाद को लेकर लंबे समय से अवनीश और मनीषा को प्रताड़ित किया जा रहा था।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
पुलिस ने मुख्य आरोपी रामखेलावन को बृहस्पतिवार शाम बिंदकी तहसील क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। वारदात के बाद वह बंदूक घर में छोड़कर साइकिल से फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश में बकेवर, जहानाबाद और कानपुर सीमा तक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। वहीं अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
गांव में मातम, रिश्तों पर उठे सवाल
सीतापुर गांव में इस घटना के बाद हर कोई स्तब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में कई महीनों से विवाद चल रहा था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि मामला इस हद तक पहुंच जाएगा कि एक पिता अपने ही बेटे की जान ले लेगा। एक मामूली घरेलू विवाद ने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया। अब गांव में सिर्फ एक ही चर्चा है— अगर समय रहते रिश्तों की कड़वाहट खत्म हो जाती, तो शायद आज एक बेटा जिंदा होता और एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
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