साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए पहले से कहीं अधिक शातिर तरीके अपना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और ऑनलाइन फ्रॉड के बाद अब एक नया साइबर जाल तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ (Boss Scam) कहा जा रहा है। इस ठगी का तरीका इतना चालाक है कि कई बार पढ़े-लिखे और अनुभवी कर्मचारी भी इसकी साजिश को समझ नहीं पाते और कुछ ही मिनटों में अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं। खतरे की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की साइबर दोस्त टीम ने देशभर के लोगों को अलर्ट जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक, पिछले सिर्फ 20 दिनों के भीतर 300 से अधिक लोग इस नए साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। यह आंकड़ा केवल दर्ज की गई शिकायतों का है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।बॉस स्कैम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें साइबर अपराधी किसी अनजान व्यक्ति की तरह नहीं, बल्कि आपकी ही कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, मैनेजर, डायरेक्टर या सीईओ बनकर संपर्क करते हैं। वे कर्मचारियों का भरोसा जीतने के लिए पहले सोशल मीडिया, कंपनी की वेबसाइट या लिंक्डइन जैसी प्रोफाइल से जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वे आपके बॉस की फोटो लगाकर नया व्हाट्सएप नंबर बनाते हैं या फिर फर्जी ईमेल आईडी तैयार कर सीधे आपसे संपर्क करते हैं। पहली नजर में सब कुछ बिल्कुल असली लगता है, इसलिए अधिकांश लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे उनकी बातों पर भरोसा कर लेते हैं।

ठगी की शुरुआत आमतौर पर एक इमरजेंसी मैसेज से होती है। साइबर अपराधी खुद को किसी जरूरी मीटिंग में फंसा हुआ बताते हैं या दावा करते हैं कि उनका बैंक अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया है। इसके बाद वे कहते हैं कि कंपनी के किसी जरूरी भुगतान, क्लाइंट की फीस या किसी अन्य महत्वपूर्ण काम के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की जरूरत है। कई मामलों में वे यह भी कहते हैं कि फिलहाल किसी अन्य कर्मचारी को इसकी जानकारी न दी जाए और भुगतान गोपनीय तरीके से किया जाए। कर्मचारी इसे अपने वरिष्ठ अधिकारी का आदेश समझकर जल्दबाजी में बताए गए बैंक खाते में रकम भेज देता है। पैसे ट्रांसफर होते ही ठग संपर्क खत्म कर देते हैं और तब तक काफी देर हो चुकी होती है।गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर दोस्त टीम ने इस स्कैम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी लोगों को सतर्क किया है। एजेंसी ने बताया कि पिछले 20 दिनों में 300 से ज्यादा शिकायतें सिर्फ बॉस स्कैम से जुड़ी दर्ज की गई हैं। यह इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी लगातार अपनी रणनीति बदल रहे हैं और अब वे लोगों की भावनाओं के साथ-साथ उनके पेशेवर संबंधों का भी फायदा उठा रहे हैं। खास बात यह है कि इस तरह की ठगी का शिकार केवल निजी कंपनियों के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले लोग भी बन रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों से गलती करवाते हैं। वे बातचीत में बार-बार “अर्जेंट”, “तुरंत”, “अभी”, “किसी को मत बताना” और “समय नहीं है” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि सामने वाला बिना जांच-पड़ताल किए तुरंत फैसला ले ले। यही जल्दबाजी लोगों के लिए सबसे बड़ी गलती साबित होती है। कई बार कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारी का विश्वास बनाए रखने के लिए भी बिना सवाल किए भुगतान कर देते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि वे साइबर ठगी का शिकार बन चुके हैं।साइबर विशेषज्ञों के अनुसार कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें देखकर इस स्कैम की पहचान की जा सकती है। यदि किसी अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आए और उस पर आपके बॉस की फोटो लगी हो, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। इसी तरह अचानक किसी नए नंबर से पैसों की मांग, गोपनीयता बनाए रखने का दबाव, बिना किसी आधिकारिक प्रक्रिया के भुगतान करने का निर्देश या किसी संदिग्ध लिंक अथवा ZIP फाइल को डाउनलोड करने का आग्रह भी साइबर ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में बिना पुष्टि किए कोई भी वित्तीय लेन-देन करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

सुरक्षा एजेंसियां लोगों को सलाह दे रही हैं कि किसी भी स्थिति में केवल व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल के आधार पर पैसे ट्रांसफर न करें। यदि आपके बॉस या किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से भुगतान का संदेश आता है, तो पहले उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर पर कॉल करके या कंपनी के आधिकारिक संचार माध्यम से इसकी पुष्टि जरूर करें। किसी भी अनजान लिंक, अटैचमेंट या ZIP फाइल को डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि इनमें मैलवेयर भी हो सकता है, जो आपके मोबाइल या कंप्यूटर का डेटा चोरी कर सकता है।अगर आपको ऐसा कोई संदिग्ध मैसेज, ईमेल या कॉल प्राप्त होता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत रिपोर्ट करें। संबंधित नंबर को ब्लॉक करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने से न केवल आपके नुकसान को कम किया जा सकता है, बल्कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने में भी एजेंसियों को मदद मिलती है। यदि गलती से पैसे ट्रांसफर हो जाएं, तो तुरंत बैंक की हेल्पलाइन और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती समय में कार्रवाई होने पर रकम को रोके जाने की संभावना बढ़ जाती है।डिजिटल युग में सुविधा के साथ-साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। साइबर अपराधी हर दिन नए तरीके खोज रहे हैं, लेकिन थोड़ी सी सावधानी और हर वित्तीय निर्देश की पुष्टि करने की आदत आपको बड़ी आर्थिक ठगी से बचा सकती है। याद रखें, आपका असली बॉस कभी भी केवल व्हाट्सएप मैसेज के जरिए गोपनीय तरीके से तत्काल पैसे भेजने का दबाव नहीं बनाएगा। इसलिए किसी भी ऐसे संदेश पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय पहले उसकी सच्चाई जांचें। आपकी कुछ मिनट की सावधानी आपकी वर्षों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।
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