बुरहान वानी की बरसी पर पाकिस्तान की नई साजिश! कराची में आतंकी सरगनाओं की गुप्त बैठक, घाटी में अशांति फैलाने की तैयारी

Editorial
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 पाकिस्तान की सरज़मीं से एक बार फिर भारत विरोधी साजिश रचे जाने की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व आतंकी बुरहान वानी की 10वीं बरसी से पहले पाकिस्तान के कराची में एक कथित गुप्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत विरोधी गतिविधियों और कश्मीर घाटी में माहौल बिगाड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इन खुफिया इनपुट के बाद केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है।सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक 5 जुलाई को कराची स्थित पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के मुख्यालय में हुई। बताया जा रहा है कि इसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े कथित सदस्य और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कुछ लोग शामिल हुए। बैठक करीब दो घंटे तक चली, जिसमें 8 जुलाई को बुरहान वानी की बरसी के अवसर पर घाटी में अशांति फैलाने की संभावनाओं पर चर्चा होने का दावा किया गया है।

हाफिज सईद का कथित संदेश पढ़ा गया

खुफिया सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कथित तौर पर हाफिज सईद का एक संदेश पढ़कर सुनाया गया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस संदेश में बुरहान वानी की बरसी के अवसर पर युवाओं को भड़काने और घाटी में विरोध का माहौल बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।सूत्रों का यह भी कहना है कि बैठक में घाटी के भीतर सक्रिय बताए जाने वाले नेटवर्क और स्लीपर सेल को सक्रिय करने पर भी चर्चा हुई। सुरक्षा एजेंसियां इन इनपुट की गंभीरता से जांच कर रही हैं।

खुफिया इनपुट के बाद हाई अलर्ट

सूत्रों के मुताबिक, इन खुफिया जानकारियों को केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ साझा किया गया है। इसके बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रमुख चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। ड्रोन, सीसीटीवी और अन्य तकनीकी संसाधनों के जरिए भी सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सीमा पर भी बढ़ी सतर्कता

सुरक्षा एजेंसियों ने नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी निगरानी तेज कर दी है। घुसपैठ की किसी भी संभावित कोशिश को विफल करने के लिए सेना, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं।अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की नापाक कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

क्या है बुरहान वानी का मामला?

बुरहान वानी हिजबुल मुजाहिदीन का एक प्रमुख आतंकी था, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए जाना जाता था। वर्ष 2016 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत के बाद घाटी में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।तब से उसकी बरसी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां हर साल अतिरिक्त सतर्कता बरतती हैं, ताकि किसी भी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था की समस्या को रोका जा सके।

विशेषज्ञों की राय

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान आधारित आतंकी ढांचे की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी साजिशों को समय रहते नाकाम किया है और वर्तमान में भी सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सतर्क है।विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया समन्वय और सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

घाटी में सामान्य जनजीवन बनाए रखने पर जोर

प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भ्रामक या उकसाने वाली सामग्री पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों का संदेश

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उन्हें प्राप्त हर खुफिया इनपुट का गंभीरता से विश्लेषण किया जाता है और उसी के अनुरूप सुरक्षा रणनीति तैयार की जाती है। अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं।फिलहाल कराची में हुई कथित बैठक को लेकर सामने आए दावों की जांच जारी है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इन इनपुट को गंभीरता से लेते हुए पूरी तरह सतर्क हैं और जम्मू-कश्मीर में किसी भी तरह की शांति भंग करने की कोशिश को विफल करने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

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