लखनऊ उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस की टीम ने रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर छापा मारा तो जो नजारा सामने आया, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। घर के हर कोने, तिजोरियों और लॉकरों से नोटों के बंडल, सोने-चांदी के बिस्किट, करोड़ों रुपये के जेवरात, संपत्तियों के दस्तावेज और भारी निवेश के प्रमाण बरामद हुए। शुरुआती जांच में बरामद संपत्तियों की कुल कीमत करीब 35 करोड़ रुपये आंकी गई है।विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ के अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी में बने आवास की तलाशी के दौरान लगभग 1.62 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। यह नकदी अलग-अलग पैकेटों में छिपाकर घर के विभिन्न हिस्सों में रखी गई थी। इसके अलावा करीब 22 किलो सोने-चांदी के बिस्किट और आभूषण भी मिले, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच में 13 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। साथ ही बैंक खातों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड, फिक्स डिपॉजिट और अन्य निवेश से जुड़े करोड़ों रुपये के साक्ष्य भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।बताया जा रहा है कि मूल रूप से रायबरेली के नूर मार्केट निवासी ललित कुमार परिवहन विभाग में पहले संभागीय परिवहन निरीक्षक (आरआई) थे और बाद में पदोन्नति पाकर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) बने। उन्होंने कानपुर और आगरा समेत कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और वर्ष 2025 में आगरा से सेवानिवृत्त हुए। हालांकि उनके कार्यकाल के दौरान कथित अवैध वसूली, वाहन चेकिंग में विवाद और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आती रहीं।इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई, जब परिवहन आयुक्त की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ललित कुमार की वैध आय लगभग 93 लाख रुपये थी, जबकि उनकी संपत्तियों की खरीद और अन्य खर्च इससे कहीं अधिक पाए गए। जांच के आधार पर 11 जून 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। चूंकि ललित कुमार पदोन्नति के बाद राजपत्रित अधिकारी बन चुके थे, इसलिए मामले की विवेचना विजिलेंस को सौंप दी गई।विजिलेंस ने अदालत से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद पुलिस बल की मौजूदगी में उनके आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कई घंटों तक चली और बुधवार सुबह जाकर पूरी हुई। जांच के दौरान घर में ज्वैलर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो बड़ी तिजोरियां मिलीं, जिनमें भारी मात्रा में सोने-चांदी के बिस्किट, महंगे आभूषण और नकदी रखी हुई थी। इसके अलावा एक टोयोटा इनोवा, एक हुंडई आई-20 कार, लाइसेंसी रिवॉल्वर और करोड़ों रुपये के निवेश संबंधी दस्तावेज भी बरामद किए गए।

इस कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने छापेमारी करने वाली विजिलेंस टीम को उत्कृष्ट कार्य के लिए एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।सूत्रों के अनुसार, ललित कुमार के खिलाफ लगभग तीन वर्ष पहले भी विजिलेंस स्तर पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन वह मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अब दोबारा हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग के भीतर चर्चा है कि आने वाले दिनों में ऐसे अन्य अधिकारियों की भी जांच हो सकती है जिनके खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति की शिकायतें लंबित हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी व्यापक जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।जांच एजेंसियों को ललित कुमार के नाम और उनके परिवार से जुड़े कई मूल्यवान भूखंडों और भवनों के दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें लखनऊ के अलीगंज, वृंदावन योजना, बालागंज, मोहनलालगंज, इस्माइलगंज, बाराबंकी, रायबरेली और नोएडा में स्थित आवासीय एवं कृषि भूमि के अलावा फ्लैट बुकिंग से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। इन संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत सरकारी मूल्यांकन से कहीं अधिक होने की संभावना भी जताई जा रही है।आगरा में एआरटीओ प्रवर्तन के रूप में पांच वर्ष की तैनाती के दौरान भी ललित कुमार कई विवादों में घिरे रहे। वाहन चेकिंग के दौरान चालकों से कथित अभद्रता, अवैध वसूली के आरोप, सैयां टोल प्लाजा पर विवाद और विभागीय शिकायतों के बावजूद उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद पुराने मामलों की भी दोबारा समीक्षा किए जाने की चर्चा तेज हो गई है।परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन फिटनेस और अन्य सेवाओं में लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं। आरोप यह भी है कि कुछ एजेंसियां विभागीय संरक्षण के चलते आम लोगों से मनमानी वसूली करती रहीं। हाल ही में कई पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की थी।फिलहाल विजिलेंस की टीम बरामद नकदी, सोने-चांदी, निवेश और अचल संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इन संपत्तियों को परिवार के अन्य सदस्यों या बेनामी नामों पर तो नहीं खरीदा गया। जांच एजेंसियां बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संपत्ति खरीद से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं।उत्तर प्रदेश में यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे चर्चित मामलों में से एक बन गई है। जिस अधिकारी पर कभी परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, उसके घर से करोड़ों रुपये की नकदी, 22 किलो सोने-चांदी के बिस्किट और अरबों जैसी जीवनशैली के संकेत मिलने के बाद अब सबकी नजर विजिलेंस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में सभी आरोप साबित होते हैं तो यह मामला न केवल परिवहन विभाग बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी मिसाल बन सकता है।

