रिपोर्ट:मो.अरशद
मुरादाबाद कभी घुटनों के दर्द से एक-एक कदम चलना मुश्किल था, लेकिन आज वही मरीज पूरे आत्मविश्वास के साथ दौड़ते, मुस्कुराते और वॉकाथॉन में हिस्सा लेते नजर आए। यह नजारा था तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल (टीएमयू) के एडवांस्ड रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर की पहली वर्षगांठ का, जहां आधुनिक चिकित्सा तकनीक और मरीजों की नई जिंदगी का अनूठा उत्सव मनाया गया।टीएमयू परिसर में आयोजित ‘वॉकाथॉन-2026’ केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों मरीजों की सफलता की कहानी थी, जिन्होंने रोबोटिक नी एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के जरिए दर्द को हराकर जीवन की नई शुरुआत की। इस आयोजन में 100 से अधिक सफल मरीजों ने भाग लेकर यह साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मिलकर असंभव को भी संभव बना सकती है।
जब दर्द हारा और हौसला जीता
कार्यक्रम का शुभारंभ टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने हरी झंडी दिखाकर वॉकाथॉन को रवाना किया। परिसर तालियों की गूंज से भर उठा, जब कभी बैसाखी के सहारे चलने वाले मरीज पूरे उत्साह के साथ वॉक में शामिल हुए।मुख्य अतिथियों ने कहा कि टीएमयू का रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर केवल इलाज नहीं कर रहा, बल्कि लोगों को नई जिंदगी और नया आत्मविश्वास भी दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।

एक साल… सैकड़ों मुस्कुराहटें
कार्यक्रम के दौरान रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर की एक वर्ष की उपलब्धियों को साझा किया गया। बताया गया कि बीते एक वर्ष में अनेक मरीजों की सफल रोबोटिक सर्जरी की गई, जिनमें अधिकांश मरीज अब सामान्य और सक्रिय जीवन जी रहे हैं।सर्जरी के बाद मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव, कम समय में रिकवरी और पहले की तुलना में कहीं अधिक बेहतर गतिशीलता मिली है। यही वजह रही कि एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर मरीज स्वयं इस सफलता के गवाह बनकर मंच पर पहुंचे।
50 मीटर वॉक रेस बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक पल 50 मीटर वॉक रेस रहा। जिन लोगों के लिए कभी कुछ कदम चलना भी चुनौती था, वे आज पूरे आत्मविश्वास के साथ फिनिश लाइन तक पहुंचे।प्रतियोगिता में संभल के कपिल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। चक्कर की मिलक निवासी गीता दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि बिजनौर के चंद्रपाल सैनी ने तीसरा स्थान हासिल किया।विजेताओं को सम्मानित करते समय पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
शीला की कहानी बनी प्रेरणा
कार्यक्रम में पीतल नगरी की शीला को उनके अदम्य साहस और संघर्ष के लिए ‘प्रेरक पुरस्कार’ प्रदान किया गया।शीला ने बताया कि कभी घुटनों के असहनीय दर्द के कारण घर से निकलना भी मुश्किल था, लेकिन रोबोटिक सर्जरी के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। अब वे बिना दर्द के चलती हैं और सामान्य दिनचर्या का आनंद ले रही हैं।उनकी कहानी सुनकर कार्यक्रम में मौजूद कई मरीज भावुक हो गए।

पहली मरीज चंद्रवती ने सुनाई नई जिंदगी की कहानी
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब प्रेमनगर लाइनपार निवासी चंद्रवती मंच पर पहुंचीं। वे टीएमयू के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर की पहली सफल मरीज रही हैं।उन्होंने बताया कि ऑपरेशन से पहले हर कदम पर दर्द होता था। सीढ़ियां चढ़ना, बाजार जाना और घर के सामान्य काम करना भी मुश्किल हो गया था।लेकिन रोबोटिक सर्जरी के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। अब वे बिना किसी दर्द के सामान्य जीवन जी रही हैं।उनकी कहानी ने कार्यक्रम में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
रोबोटिक तकनीक क्यों है खास?
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित मानी जाती है।इस तकनीक में अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम की मदद से घुटने के जोड़ की स्थिति का सटीक आकलन किया जाता है, जिससे इम्प्लांट बिल्कुल सही स्थान पर लगाया जा सके।
इसके प्रमुख लाभ हैं—
- सर्जरी में अधिक सटीकता
- कम दर्द
- कम रक्तस्राव
- संक्रमण का कम खतरा
- तेजी से रिकवरी
- बेहतर संतुलन और लंबे समय तक टिकाऊ परिणाम
डॉक्टरों का कहना है कि यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में मरीज रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
देशभर से पहुंचे मरीज
कार्यक्रम में केवल मुरादाबाद ही नहीं बल्कि शाहजहांपुर, बिजनौर, बदायूं, संभल, रामपुर, अमरोहा, धामपुर, नैनीताल तथा हिमाचल प्रदेश से भी मरीज पहुंचे।इन सभी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि टीएमयू की विशेषज्ञ टीम और आधुनिक तकनीक ने उनके जीवन में नया विश्वास जगाया है।
विशेषज्ञों की मौजूदगी ने बढ़ाई गरिमा
कार्यक्रम में एमएस मेजर जनरल डॉ. सी.के. जखमोला, डिप्टी एमएस डॉ. विनम्र तिवारी, जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर के प्रमुख डॉ. रवीन्द्र सिंह, डॉ. अमित सराफ, डॉ. मनमोहन शर्मा, डॉ. संजीव चिंचोली, हॉस्पिटल चीफ मैनेजर वैभव जैन, अनिल गुप्ता सहित अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग स्टाफ और बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. माधव शर्मा ने किया।
नई उम्मीद, नई रफ्तार
टीएमयू अस्पताल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर की पहली वर्षगांठ ने यह संदेश दिया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक केवल बीमारी का इलाज नहीं करती, बल्कि लोगों के जीवन में नई उम्मीद और नई रफ्तार भी भरती है।कभी दर्द से कराहने वाले मरीजों का आज आत्मविश्वास के साथ वॉकाथॉन में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि सही इलाज, अनुभवी डॉक्टर और अत्याधुनिक तकनीक मिलकर जिंदगी बदल सकते हैं। टीएमयू की यह सफलता न केवल मुरादाबाद, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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