रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद/नवाबगंज उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नवाबगंज नगर पंचायत क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से बन रहे नाला निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है।वायरल वीडियो में एक महिला निर्माण स्थल पर मौजूद ईंटों की मजबूती की जांच करती दिखाई देती है। महिला पहले एक ईंट को जमीन पर पटकती है, जो आसानी से टूट जाती है। इसके बाद वह दो ईंटों को आपस में टकराती है, जिनके भी टूटने का दावा वीडियो में किया जा रहा है। वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने आरोप लगाया कि नाला निर्माण में मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।बताया जा रहा है कि यह नाला निर्माण कार्य नवाबगंज नगर के बाईपास मार्ग से आजाद नगर जाने वाले रास्ते पर कराया जा रहा है। यह परियोजना लाखों रुपये की लागत से संचालित हो रही है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान करना है। लेकिन निर्माण के शुरुआती चरण में ही गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने पूरी परियोजना को विवादों के घेरे में ला दिया है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटें इतनी कमजोर हैं कि मामूली दबाव या टकराने पर टूट रही हैं, तो ऐसे निर्माण की उम्र कितनी होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लोगों का आरोप है कि यदि शुरुआत में ही गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, तो कुछ वर्षों में नाला क्षतिग्रस्त हो सकता है और सरकारी धन व्यर्थ चला जाएगा।

क्षेत्र के कई लोगों ने कहा कि सरकार विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर निर्माण कार्यों में ही भ्रष्टाचार या लापरवाही होगी, तो विकास योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। लोगों का कहना है कि सरकारी धन जनता के टैक्स का पैसा है और उसका उपयोग पूरी पारदर्शिता तथा गुणवत्ता के साथ होना चाहिए।वायरल वीडियो के बाद नगर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही ईंट, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में उनकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।लोगों का कहना है कि यदि जांच में निर्माण मानकों की अनदेखी या घटिया सामग्री के उपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार, कार्यदायी संस्था और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका मानना है कि केवल जांच कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लग सके।इस पूरे मामले में जब नगर पंचायत नवाबगंज के अधिशासी अधिकारी प्रमोद कुमार से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित नाला निर्माण कार्य नगर पंचायत द्वारा नहीं कराया जा रहा है। उनके अनुसार यह परियोजना डूडा (जिला नगरीय विकास अभिकरण) के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसलिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उससे जुड़े अन्य सभी प्रश्नों का उत्तर संबंधित विभाग ही दे सकता है।
हालांकि इस मामले का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई गई ईंटें वास्तव में उसी नाला निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही थीं या नहीं। इसलिए केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की तकनीकी जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।इसके बावजूद यह घटना एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती है कि सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी कितनी प्रभावी है। यदि किसी परियोजना को लेकर जनता में संदेह पैदा होता है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि वे तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच कराएं और पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य सार्वजनिक करें। इससे न केवल जनता का विश्वास बना रहेगा बल्कि विकास कार्यों की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।फिलहाल स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए। यदि जांच में निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता, घटिया सामग्री के उपयोग या गुणवत्ता से समझौते की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं यदि जांच में सभी आरोप निराधार साबित होते हैं, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए ताकि अफवाहों पर विराम लग सके।अब सबकी नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो के बाद उठे सवालों का जवाब जांच से मिलता है या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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