CJP प्रदर्शन में बड़ा खुलासा! 2000 संदिग्धों की पहचान, 130 पुलिसकर्मी घायल; दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा

Editorial
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नई दिल्ली दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि प्रदर्शन के दौरान आधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से 2000 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की गई है। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने प्रदर्शनकारी भीड़ में शामिल होकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और पुलिसकर्मियों पर हमले की साजिश रची थी। इस पूरे घटनाक्रम में 130 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि मामले में अब तक 15 एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी गई है।दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। यह सिस्टम प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों के चेहरों का लाइव स्कैन कर पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड वाले डेटाबेस से उनका मिलान करता है। इसी तकनीक की मदद से हजारों ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका पहले से आपराधिक इतिहास रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कई आपराधिक प्रवृत्ति के लोग सामान्य प्रदर्शनकारियों की आड़ में भीड़ में शामिल हुए थे। इनका उद्देश्य प्रदर्शन को हिंसक बनाना और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों को निशाना बनाना था। पुलिस का दावा है कि इसी वजह से प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर झड़पें हुईं और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए।दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हिंसक घटनाओं में 130 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें कई अधिकारी भी शामिल हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। पुलिस ने कहा कि ड्यूटी के दौरान सुरक्षाकर्मियों पर हमला किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अब तक 15 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इन एफआईआर में सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरों की रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से मिले डेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि हिंसा में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की जा सके।दिल्ली पुलिस का कहना है कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) इस पूरे ऑपरेशन में सबसे प्रभावी तकनीक साबित हुआ। यह तकनीक किसी भी व्यक्ति के चेहरे का डिजिटल विश्लेषण कर उसे पहले से मौजूद रिकॉर्ड से मिलान करती है। इससे भीड़ में छिपे संदिग्धों की पहचान तेजी और सटीकता से की जा सकती है। अधिकारियों का दावा है कि इस तकनीक की वजह से बड़ी संख्या में संदिग्धों की पहचान संभव हो सकी और जांच को नई दिशा मिली है।

प्रदर्शन के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी और सख्त कर दी गई है। पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है और जंतर-मंतर समेत कई स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में लगातार समीक्षा बैठकें हो रही हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति लागू की जा रही है।सूत्रों के अनुसार, पुलिस प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों के वीडियो फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जिन लोगों की पहचान हो चुकी है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगे और एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं तथा गिरफ्तारी अभियान भी तेज किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से भाग लें और हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों से दूरी बनाए रखें। पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कानून के दायरे में गंभीर अपराध है।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर बहस तेज कर दी है। दिल्ली पुलिस का मानना है कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम जैसी तकनीकों के उपयोग से भविष्य में भीड़ में छिपे अपराधियों की पहचान आसान होगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से मिले इनपुट के आधार पर हिंसा में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले में दर्ज 15 एफआईआर की जांच अलग-अलग टीमें कर रही हैं और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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