उत्तर प्रदेश के एक तहसील परिसर में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं की हालत अब गंभीर हो चुकी है। धरने पर बैठे अधिवक्ता लालबहादुर यादव और अजय त्रिपाठी की तबीयत बिगड़ने लगी है, जिसके चलते परिसर में चिंता का माहौल बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से मांगों की अनदेखी के विरोध में अधिवक्ताओं ने पहले धरना शुरू किया था, जो बाद में भूख हड़ताल में बदल गया। आंदोलन के 14 दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से अधिवक्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं का कहना है कि भूख हड़ताल पर बैठे साथियों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। कमजोरी, चक्कर और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी पहल नहीं की गई है।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि कई बार ज्ञापन और बातचीत के प्रयास के बाद भी अधिकारियों ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। इससे आंदोलन और तेज हो गया है।
मांगें पूरी न होने पर बड़ा कदम उठाने का अल्टीमेटम
अधिवक्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे आत्मदाह जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक तंत्र में भी हलचल बढ़ गई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब उन्हें कठोर निर्णय लेने की चेतावनी देनी पड़ रही है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
अधिवक्ताओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझने या समाधान का प्रयास नहीं किया है। इससे अधिवक्ताओं में निराशा और नाराजगी दोनों बढ़ी हैं।
तहसील परिसर में बढ़ी चिंता, स्वास्थ्य पर खतरा
मेडिकल निगरानी की मांग
धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने प्रशासन से भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के लिए नियमित मेडिकल जांच की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक भोजन न लेने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों और अन्य अधिवक्ताओं ने भी प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप करने और स्थिति को गंभीर होने से पहले समाधान निकालने की अपील की है।
बढ़ सकता है आंदोलन का दायरा
यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अन्य तहसीलों और बार एसोसिएशनों के समर्थन में आने की भी चर्चा है। इससे प्रशासन के सामने स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
आखिर क्या हैं अधिवक्ताओं की मांगें?
अधिवक्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी पेशेवर और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांगों में तहसील स्तर पर व्यवस्थाओं में सुधार, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों के समाधान शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से इन मांगों पर कोई स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है, जिसके कारण आंदोलन जारी है।
तहसील परिसर में चल रहा अधिवक्ताओं का आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं की बिगड़ती सेहत और आत्मदाह की चेतावनी ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि जल्द संवाद और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।
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