उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। गौतमपल्ली थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस कार्रवाई में इंस्पेक्टर रत्नेश सिंह समेत सभी दारोगा और सिपाही शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम एक व्यक्ति से कथित वसूली के गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।
इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले की शुरुआत उस शिकायत से हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि गौतमपल्ली थाने के पुलिसकर्मियों ने एक व्यक्ति को पकड़कर उससे करीब 2.5 लाख रुपये की वसूली की। यह आरोप सामने आते ही मामला गंभीर हो गया और उच्च स्तर पर संज्ञान लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित ने इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील था क्योंकि यह थाना मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा हुआ है।
सीपी की जांच के बाद कार्रवाई
लखनऊ पुलिस कमिश्नर (सीपी) द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर पाया गया, जिसके बाद पूरे थाने के स्टाफ पर कार्रवाई का फैसला लिया गया।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल प्रभाव से इंस्पेक्टर समेत सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
मुख्यमंत्री आवास से जुड़े थाने पर सख्ती
गौतमपल्ली थाना मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा और क्षेत्राधिकार के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इस थाने से जुड़े पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकार कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहती। इस कार्रवाई को इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
इस बड़े एक्शन के बाद लखनऊ पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। अन्य थानों के पुलिसकर्मियों में भी सतर्कता बढ़ गई है और वे अपने कार्यों में अधिक सावधानी बरतने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से पुलिस विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
आगे क्या होगी कार्रवाई
प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि इस मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है और यह मामला आने वाले समय में पुलिस सुधार और जवाबदेही के मुद्दे को और तेज कर सकता है।
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