BRICS Summit: भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन, PM मोदी से मुलाकात

Editorial
9 Min Read

नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर एक अहम कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भारत पहुंच गए हैं। वह 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की मुलाकात में व्यापार, कनेक्टिविटी, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।पेजेशकियन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और ईरान अपने पुराने संबंधों को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के नए क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान की ओर से भी भारत के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

BRICS Summit में ईरान की भूमिका क्यों अहम?

ईरान BRICS का सदस्य है और बहुपक्षीय मंच पर उसकी भागीदारी भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। BRICS के मंच पर दोनों देश वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर साथ काम कर सकते हैं।ईरान के राष्ट्रपति का भारत दौरा केवल BRICS बैठक तक सीमित नहीं है। उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत दोनों देशों के बीच सीधे संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी देगी।भारत लंबे समय से ईरान के साथ ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक आर्थिक सहयोग से जोड़ने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में पेजेशकियन की यात्रा को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

PM मोदी और पेजेशकियन के बीच किन मुद्दों पर होगी बात?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की बैठक में कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग हो सकता है।दोनों देश व्यापार के मौजूदा रास्तों को मजबूत करने के साथ नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं।भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों में कई संभावनाएं हैं। दोनों देश चाहते हैं कि मौजूदा सहयोग को ज्यादा व्यवस्थित और व्यापक बनाया जाए।

चाबहार पोर्ट पर खास नजर

भारत-ईरान संबंधों में चाबहार बंदरगाह सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक परियोजनाओं में से एक है। यही वजह है कि पेजेशकियन की भारत यात्रा के दौरान चाबहार पर बातचीत को विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी भारत के साथ बातचीत में चाबहार बंदरगाह को महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताया है। उनका कहना है कि दोनों देशों के संबंधों में कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी भूमिका है।चाबहार भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्रीय व्यापार और मध्य एशिया तक पहुंच के वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा जाता है। भारत इस बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक अपनी कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में काम करता रहा है।

व्यापार और आर्थिक सहयोग पर बढ़ सकता है फोकस

ईरान के विदेश मंत्रालय ने भारत के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की इच्छा स्पष्ट की है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में व्यापार को बढ़ाने और मौजूदा व्यापारिक रास्तों में विविधता लाने पर चर्चा हो सकती है।भारत की ओर से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई जाती रही है। दोनों देशों के बीच कृषि, ऊर्जा, परिवहन, फार्मास्यूटिकल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में दोनों देशों के कारोबारी और आर्थिक संबंधों को नया विस्तार मिल सकता है।

क्षेत्रीय शांति और स्थिरता भी अहम मुद्दा

भारत और ईरान के बीच बातचीत केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहने वाली। पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय हो सकती है।भारत लगातार पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता के पक्ष में अपनी भूमिका रखता रहा है। ईरान इस क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में दोनों देशों के लिए एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखना रणनीतिक रूप से जरूरी है।प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियन की बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रम और उसके व्यापार तथा कनेक्टिविटी पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी बातचीत संभव है।

SCO और BRICS में साथ काम करने पर जोर

भारत और ईरान दोनों ही कई बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करते हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत की SCO और BRICS में प्रभावशाली भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन मंचों के जरिए दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है।बहुपक्षीय संगठनों में सहयोग भारत और ईरान को साझा हितों वाले मुद्दों पर साथ आने का अवसर देता है। विकासशील देशों की आवाज, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और व्यापार से जुड़े विषयों पर दोनों देशों के बीच समन्वय बढ़ सकता है।

मोदी-पेजेशकियन की पहले भी हो चुकी है मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच इससे पहले भी मुलाकात हो चुकी है। दोनों नेताओं ने किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित SCO Summit के दौरान बातचीत की थी।उस दौरान भी दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। अब भारत में होने वाली बैठक को उस बातचीत को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान ने भारत के साथ संबंधों को बताया महत्वपूर्ण

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जिनके साथ ईरान के कई क्षेत्रों में अच्छे संबंध हैं, खासकर व्यापार और आर्थिक सहयोग के मामले में।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि BRICS Summit के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी।इससे साफ है कि ईरान भारत के साथ अपने संबंधों को केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि व्यापार, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी के स्तर पर भी इसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

भारत-ईरान रिश्तों के लिए कितना अहम है यह दौरा?

कुल मिलाकर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का भारत दौरा भारत-ईरान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर माना जा रहा है। BRICS Summit का बहुपक्षीय मंच और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक दोनों देशों को कई अहम मुद्दों पर सीधे संवाद का मौका देगी।चाबहार पोर्ट, व्यापार, आर्थिक सहयोग, लॉजिस्टिक्स, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे विषय बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं।अब नजर इस बात पर होगी कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की बैठक के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर क्या नए संकेत सामने आते हैं और चाबहार समेत रणनीतिक परियोजनाओं पर आगे की दिशा क्या तय होती है।

Read on:http://मायावती का सपा-कांग्रेस पर हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी सोच

Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment