मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को उज्जैन, भोपाल और ग्वालियर का व्यस्त दौरा किया। पूरे दिन अलग-अलग सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होते हुए उन्होंने प्रशासनिक गतिविधियों, शोध और क्षमता निर्माण से जुड़े आयोजनों को संबोधित किया। यह दौरा राज्य में शिक्षा, शोध और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- सुबह 10:45 बजे मुख्यमंत्री नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम-2026 में भाग लिया। इस कार्यक्रम में देशभर के शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
- दोपहर 1:15 बजे मुख्यमंत्री रवींद्र भवन पहुंचे, जहां क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाना था।
- यह दौरा कई कारणों से अहम माना जा रहा है:
उत्तर प्रदेश के पाठकों के लिए भी यह दौरा इसलिए अहम है क्योंकि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच प्रशासनिक मॉडल, कौशल विकास और शोध सहयोग जैसे विषयों पर लगातार समन्वय बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में युवा, शोधार्थियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी प्रमुख रही।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिन की शुरुआत उज्जैन से की, जहां उन्होंने स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लिया। सुबह 10:30 बजे वह भोपाल पहुंचे। उज्जैन में आयोजित कार्यक्रमों में क्षेत्रीय विकास और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
सरकार का फोकस स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनहित योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए।
सुबह 10:45 बजे मुख्यमंत्री नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम-2026 में भाग लिया। इस कार्यक्रम में देशभर के शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने नवाचार, रिसर्च और तकनीकी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यों के विकास में शोध और नवाचार की बड़ी भूमिका है। युवाओं को स्टार्टअप, नई तकनीक और सामाजिक समस्याओं के समाधान पर शोध करने के लिए प्रेरित किया गया।
यह आयोजन शिक्षा क्षेत्र में मध्यप्रदेश की सक्रियता को दर्शाता है और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
दोपहर 1:15 बजे मुख्यमंत्री रवींद्र भवन पहुंचे, जहां क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रशासन के लिए प्रशिक्षण और क्षमता विकास जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से जनसेवा को प्राथमिकता देने और तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।
सरकार का लक्ष्य प्रशासन को पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाना है, ताकि आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।
शाम 6:40 बजे मुख्यमंत्री भोपाल के स्टेट हैंगर पहुंचे और वहां से ग्वालियर के लिए रवाना हुए। शाम 7:30 बजे उनका ग्वालियर आगमन हुआ।
इसके बाद 7:55 बजे मुख्यमंत्री ताज उषा किरण पैलेस पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई। ग्वालियर क्षेत्र के विकास कार्यों और आगामी योजनाओं पर चर्चा की गई।
ग्वालियर में कार्यक्रमों के बाद मुख्यमंत्री रात 9:35 बजे भोपाल लौट आए। पूरे दिन का यह दौरा शिक्षा, शोध, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय विकास पर केंद्रित रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य में प्रशासनिक सक्रियता और विकास कार्यों की निगरानी को दर्शाता है। साथ ही, शोध और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों पर जोर भविष्य की विकास रणनीति का संकेत देता है।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में भी यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े राज्यों में प्रशासनिक सुधार, कौशल विकास और शोध आधारित नीतियों की दिशा में इस तरह के कार्यक्रम उपयोगी साबित हो सकते हैं।
यह दौरा कई कारणों से अहम माना जा रहा है:
शोध और नवाचार को बढ़ावा
प्रशासनिक क्षमता में सुधार
क्षेत्रीय विकास की समीक्षा
युवाओं और शिक्षाविदों से संवाद
राज्य स्तर पर विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग
सरकार का उद्देश्य विकास, शिक्षा और प्रशासन को एक साथ मजबूत करना है, ताकि राज्य की समग्र प्रगति सुनिश्चित हो सके।
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