उत्तर प्रदेश में अवैध कफ सिरप कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष जांच टीम (SIT) ने 86 दिनों की लंबी जांच के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को पकड़ने के लिए करीब 1050 किलोमीटर तक ट्रैकिंग और लगातार निगरानी की गई। अंततः सभी आरोपियों को मिर्जापुर जिले से दबोचा गया।यह मामला अवैध और नशीले कफ सिरप की सप्लाई से जुड़ा है, जो युवाओं में नशे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से इस नेटवर्क की तलाश में थे। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अवैध सप्लाई की सूचना के बाद बनी SIT
पुलिस को कुछ महीने पहले सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाओं की श्रेणी में आने वाले कफ सिरप की बड़े पैमाने पर अवैध सप्लाई की जा रही है। यह सिरप मेडिकल उपयोग के बजाय नशे के लिए बेचा जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।
जांच के दौरान सामने आया कि यह नेटवर्क कई जिलों और राज्यों तक फैला हुआ है। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें।
1050 किमी तक पीछा, तकनीकी निगरानी से मिली सफलता
एसआईटी ने आरोपियों की तलाश में तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मुखबिर तंत्र का सहारा लिया। जांच टीम ने अलग-अलग जिलों में छापेमारी की और करीब 1050 किलोमीटर तक आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया।
लगातार 86 दिनों की मेहनत के बाद टीम को सूचना मिली कि आरोपी मिर्जापुर क्षेत्र में छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मिर्जापुर से गिरफ्तारी, पूछताछ में कई खुलासों की उम्मीद
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी अवैध कफ सिरप की खरीद, भंडारण और सप्लाई में शामिल थे। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह अलग-अलग जगहों से दवाएं इकट्ठा कर उन्हें छोटे-छोटे नेटवर्क के माध्यम से बेचता था।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई चेन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं मेडिकल स्टोर या दवा कंपनियों की भूमिका तो इसमें शामिल नहीं है।
युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति बना चिंता का विषय
कफ सिरप का गलत इस्तेमाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ कफ सिरप में मौजूद तत्वों का अत्यधिक सेवन नशे का असर पैदा कर सकता है। इसी वजह से इन दवाओं की बिक्री पर नियंत्रण और डॉक्टर की पर्ची जरूरी होती है।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में कफ सिरप और अन्य दवाओं के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। पुलिस और प्रशासन लगातार ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहे हैं।
प्रशासन की सख्ती और निगरानी
इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग और ड्रग इंस्पेक्टरों को भी अलर्ट किया गया है। मेडिकल स्टोर्स पर रिकॉर्ड की जांच और संदिग्ध बिक्री पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना वैध दस्तावेज के दवाओं की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।एसआईटी अब इस मामले में फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, सप्लाई चैन और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की जांच कर रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

