उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गैस किल्लत की खबरों के बीच अब मुनाफाखोरी की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। कई जगह उपभोक्ताओं का आरोप है कि 950 रुपये में मिलने वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर ब्लैक में 2000 से 2500 रुपये तक बेचा जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगने के बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने इस स्थिति का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की संभावित कमी की खबरों के बीच कुछ लोग सिलेंडर जमा करके ज्यादा कीमत पर बेच रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन को भी इस तरह की शिकायतें मिलने लगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि ब्लैक मार्केटिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गैस किल्लत की खबरों से बढ़ी लोगों की चिंता
पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा बाजार से जुड़ी खबरों के कारण गैस सप्लाई को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में गैस किल्लत की खबरें तेजी से फैलने लगीं।
इसी वजह से कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर जल्द से जल्द गैस सिलेंडर बुक कराने की कोशिश शुरू कर दी। अचानक बढ़ी मांग के कारण कई जगह एजेंसियों पर भीड़ बढ़ गई और सिलेंडर की डिलीवरी में देरी होने लगी।
इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग ज्यादा कीमत वसूलने लगे। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई जगह उन्हें बताया गया कि अगर तुरंत सिलेंडर चाहिए तो ज्यादा पैसे देने होंगे।
ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें बढ़ीं
950 का सिलेंडर 2500 रुपये तक
स्थानीय लोगों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर करीब 900 से 950 रुपये के आसपास मिलता है। लेकिन कुछ इलाकों में यही सिलेंडर 2000 से 2500 रुपये तक में बेचे जाने की बात सामने आई है।
कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें गैस एजेंसी से समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही थी, जिसके बाद उन्होंने निजी स्तर पर सिलेंडर खरीदने की कोशिश की। इसी दौरान उन्हें ज्यादा कीमत चुकाने के लिए कहा गया।
हालांकि अभी तक प्रशासन ने इन सभी मामलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई जिलों में ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
जमाखोरी से बढ़ी समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बाजार में किसी वस्तु की कमी की आशंका होती है तो जमाखोरी की समस्या भी बढ़ जाती है। कुछ लोग बड़ी संख्या में सिलेंडर खरीदकर उन्हें बाद में ज्यादा कीमत पर बेचने की कोशिश करते हैं।
इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो जाती है और आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गैस एजेंसियों पर भीड़ का दबाव
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में बुकिंग की संख्या अचानक बढ़ गई है।
सामान्य दिनों में जितनी बुकिंग होती है, उसके मुकाबले अब लगभग दोगुनी मांग देखी जा रही है। इससे डिलीवरी प्रक्रिया पर दबाव बढ़ गया है।
एजेंसी संचालकों के अनुसार, सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण लोगों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।
उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराहट में सिलेंडर बुक न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही गैस लें।
प्रशासन ने शुरू की निगरानी
ब्लैक मार्केटिंग रोकने के निर्देश
गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतों के बाद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। कई जिलों में आपूर्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सिलेंडर की जमाखोरी या ब्लैक मार्केटिंग करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा गैस एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखें और सभी उपभोक्ताओं को निर्धारित नियमों के अनुसार सिलेंडर उपलब्ध कराएं।
हेल्पलाइन पर भी मिल रही शिकायतें
कुछ जिलों में उपभोक्ताओं ने हेल्पलाइन नंबर पर भी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायत दर्ज कराई है।
आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर शिकायत की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आम उपभोक्ताओं पर बढ़ा आर्थिक बोझ
गैस सिलेंडर की कीमत पहले से ही कई परिवारों के बजट पर असर डालती है। ऐसे में अगर सिलेंडर ब्लैक में ज्यादा कीमत पर मिलने लगे तो आम लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।
खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह स्थिति काफी मुश्किल पैदा कर सकती है। कई लोग पहले से ही महंगाई और बढ़ते खर्चों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की खबरें लोगों की चिंता और बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों की सलाह: अफवाहों से बचें
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर इस तरह की स्थिति अफवाहों और घबराहट के कारण पैदा होती है।
यदि लोग अचानक बड़ी संख्या में सिलेंडर खरीदने लगते हैं तो सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ जाता है और इससे अस्थायी कमी जैसी स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग केवल जरूरत के अनुसार ही गैस बुक करें और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
यदि प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई तेज होती है तो गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर जल्द ही नियंत्रण पाया जा सकता है।
सरकार और तेल कंपनियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सप्लाई बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
फिलहाल उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे घबराहट में सिलेंडर खरीदने से बचें और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
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