ED ऑफिस छापेमारी मामला: HC ने रांची पुलिस जांच रोकी

Digital Desk
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झारखंड हाईकोर्ट ने रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्यालय पर हाल ही में हुई पुलिस छापेमारी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में रांची पुलिस की जांच पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि यह कार्रवाई प्रथम दृष्टया पूर्व नियोजित प्रतीत होती है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने ईडी की ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं।

ED की याचिका पर सुनवाई, केंद्र को बनाया गया पक्षकार

केंद्रीय गृह सचिव को नोटिस, सुरक्षा के निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह सचिव को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि ईडी कार्यालय और उसके अधिकारियों की सुरक्षा के लिए CRPF, BSF या किसी अन्य अर्द्धसैनिक बल की तैनाती की जाए।

कोर्ट ने रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन को भी स्पष्ट निर्देश दिए कि वे ईडी कार्यालय की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

 पुलिस जांच पर रोक, FIR के आधार पर कार्रवाई स्थगित

अदालत ने झारखंड सरकार के पूर्व कर्मचारी संतोष कुमार द्वारा एयरपोर्ट थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ चल रही पुलिस जांच पर भी रोक लगा दी है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक इस मामले की न्यायिक समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

ED का आरोप—संघीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप

प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि रांची पुलिस द्वारा ईडी कार्यालय में की गई छापेमारी संघीय एजेंसी के कामकाज में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है। ईडी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।

ईडी का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संवेदनशील मामलों की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी पर इस तरह की कार्रवाई न केवल संस्थागत टकराव को जन्म देती है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

23 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा मामला

संतोष कुमार पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ईडी के वकील ने अदालत को बताया कि केंद्रीय एजेंसी संतोष कुमार से जुड़े 23 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच कर रही है। यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है।

वकील के अनुसार, अब तक इस मामले में करीब 9 करोड़ रुपये की राशि बरामद की जा चुकी है, जबकि शेष राशि की जांच जारी है।

जांच के बीच बढ़ा टकराव

ईडी का कहना है कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे एजेंसी पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। इसी कड़ी में ईडी कार्यालय में पुलिस की छापेमारी को एक रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

संघीय ढांचे और एजेंसियों की स्वतंत्रता पर बहस

इस मामले ने एक बार फिर राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस को तेज कर दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश संघीय एजेंसियों की स्वायत्तता और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है।

उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी इस फैसले को बारीकी से देखा जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में केंद्रीय एजेंसियों की जांच प्रक्रिया को कानूनी संरक्षण मिल सकता है।

हाईकोर्ट ने मामले में आगे की सुनवाई के संकेत देते हुए कहा है कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, पुलिस जांच पर रोक और ईडी कार्यालय को सुरक्षा देने के आदेश से केंद्रीय एजेंसी को बड़ी राहत मिली है।

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