उत्तर प्रदेश की गलगोटिया यूनिवर्सिटी इन दिनों एक रोबोट डॉग (Robodog) को लेकर विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि विश्वविद्यालय ने एक विदेशी तकनीक को अपना इनोवेशन बताकर पेश किया। इस मुद्दे के सामने आते ही इंटरनेट पर यूनिवर्सिटी को जमकर ट्रोल किया जा रहा है और मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
कई यूजर्स का आरोप है कि जिस रोबोडॉग को संस्थान ने अपनी उपलब्धि बताया, वह पहले से ही एक विदेशी कंपनी की तकनीक है। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर सवालों और मीम्स की बाढ़ आ गई है।
‘मेड इन इंडिया’ दावे पर उठे सवाल
रोबोडॉग को लेकर सबसे ज्यादा विवाद इस बात को लेकर हुआ कि इसे स्वदेशी नवाचार के रूप में प्रस्तुत किया गया था। टेक विशेषज्ञों और यूजर्स ने इसकी डिजाइन और फीचर्स की तुलना अंतरराष्ट्रीय रोबोट मॉडल से करते हुए सवाल उठाए।
ट्विटर (एक्स), इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे ‘ओवरक्लेम’ बताया, जबकि कई लोग शिक्षा संस्थानों में रिसर्च की गुणवत्ता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
मीम्स और आलोचना से बढ़ी चर्चा
विवाद सामने आने के बाद रोबोडॉग को लेकर सोशल मीडिया पर कई मीम्स वायरल हो रहे हैं। कुछ लोग इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे ट्रोलिंग और मजाक के रूप में देख रहे हैं।
इस पूरे मामले ने कुछ ही समय में राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर लिया है।
सरकार भी आई निशाने पर
इस विवाद में केवल विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि सरकार भी आलोचनाओं के घेरे में आ गई है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं कि क्या तकनीकी उपलब्धियों की सही जांच और सत्यापन किया जा रहा है।
हालांकि, अब तक इस मामले पर सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों की स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी होती है, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
यूनिवर्सिटी की ओर से सफाई की उम्मीद
विवाद बढ़ने के बाद अब सभी की नजर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है। माना जा रहा है कि संस्थान जल्द ही इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इनोवेशन और रिसर्च के दावों में पारदर्शिता और सही जानकारी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे संस्थान की विश्वसनीयता सीधे तौर पर प्रभावित होती है।
इस विवाद ने एक बार फिर तकनीकी शिक्षा संस्थानों में किए जा रहे शोध और प्रोजेक्ट्स की विश्वसनीयता को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ गुणवत्ता और मौलिकता पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।
साथ ही, छात्रों और युवा इनोवेटर्स के लिए यह जरूरी है कि उनके काम को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए, ताकि उनकी मेहनत पर कोई सवाल न उठे।
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