शुक्रवार को बुलियन मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ताजा कारोबारी सत्र में सोना करीब 1100 रुपये की गिरावट के साथ ₹1.64 लाख के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी के भाव भी दबाव में दिखाई दिए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी, जिसके बाद अब बाजार में हल्की करेक्शन की स्थिति बन गई है।
भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें घरेलू मांग, अंतरराष्ट्रीय रुझान, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। यही कारण है कि बुलियन मार्केट में अक्सर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
बुलियन मार्केट में गिरावट के पीछे क्या कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में आई नरमी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। अमेरिका और यूरोप के आर्थिक संकेतकों के कारण निवेशकों की रणनीति बदलती रहती है, जिसका असर सीधे गोल्ड मार्केट पर पड़ता है।
जब वैश्विक बाजार में डॉलर मजबूत होता है या बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो सोने की मांग कुछ समय के लिए कम हो सकती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल भारतीय बुलियन मार्केट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मुनाफावसूली का असर
पिछले कुछ सत्रों में सोने की कीमतों में तेजी देखी गई थी। कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की, जिसके कारण बाजार में दबाव बना और कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह की गिरावट अक्सर तेजी के बाद देखने को मिलती है और इसे बाजार का सामान्य उतार-चढ़ाव माना जाता है।
चांदी के दाम भी फिसले
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी को औद्योगिक धातु भी माना जाता है, इसलिए इसकी कीमतों पर औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर ज्यादा पड़ता है।
जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अक्सर सोने की ओर ज्यादा झुकते हैं, जबकि चांदी की मांग में थोड़ी नरमी आ सकती है। यही कारण है कि कई बार सोने और चांदी की कीमतों में अलग-अलग दिशा भी देखने को मिलती है।
हालांकि लंबी अवधि में दोनों धातुएं निवेश के लोकप्रिय विकल्प मानी जाती हैं और निवेशक इन्हें सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं।
भारत में सोने की मांग क्यों रहती है मजबूत
शादी और त्योहारों का सीजन
भारत में सोने का विशेष सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व है। शादी-विवाह और त्योहारों के दौरान सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है। यही वजह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में शादी के सीजन और त्योहारों के कारण बाजार में मांग बढ़ सकती है, जिससे कीमतों को फिर से समर्थन मिल सकता है।
निवेश के रूप में लोकप्रिय
सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता या बाजार में जोखिम बढ़ने पर कई निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं।
यही कारण है कि शेयर बाजार में गिरावट या वैश्विक संकट के समय सोने की कीमतों में तेजी भी देखने को मिलती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि मौजूदा गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि निवेश से पहले बाजार की स्थिति और कीमतों के रुझान को समझना जरूरी है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को एक साथ बड़ी राशि निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो सकता है।
इसके अलावा सोने में निवेश के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं जैसे फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेंगी। अगर डॉलर कमजोर होता है या वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है।
इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की नीतियां, ब्याज दरों में बदलाव और भू-राजनीतिक घटनाएं भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल बुलियन मार्केट में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोना और चांदी निवेश के मजबूत विकल्प बने रह सकते हैं।
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