उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आज से आस्था का महाकुंभ शुरू हो गया है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा का पांच दिवसीय आयोजन 16 जनवरी से 20 जनवरी तक किया जा रहा है। कथा के शुभारंभ से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने बांदा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने जनपदवासियों और समस्त बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों को इस धार्मिक आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
पत्रकार वार्ता के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म, हिंदू एकता और आस्था के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हनुमंत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म को मजबूत करने और समाज को आस्था से जोड़ने का माध्यम है।
सनातन धर्म और हनुमंत कथा का महत्व
सनातन से मजबूत होगा हिंदू समाज: धीरेंद्र शास्त्री
पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म ही हिंदू समाज की मूल आधारशिला है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब सनातन मजबूत होगा, तभी हिंदू समाज और देश भी मजबूत होगा। हनुमंत कथा के माध्यम से भगवान हनुमान के चरित्र, भक्ति, शक्ति और सेवा भाव को जन-जन तक पहुंचाया जाता है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज के समय में समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक सोच की जरूरत है, जिसे हनुमंत कथा जैसे आयोजनों से बल मिलता है। उन्होंने इस कथा को बांदा और पूरे बुंदेलखंड के लिए “आस्था का महाकुंभ” बताया।
सभी के लिए खुला है कथा का मंच
पत्रकारों से बातचीत में धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि हनुमंत कथा में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी सनातनी हैं, उन्हें इस कथा में आकर श्रवण करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई मुसलमान या अन्य धर्म का व्यक्ति कथा सुनना चाहता है, तो वह भी आ सकता है। कथा सभी के लिए खुली है और इसका उद्देश्य समाज में सद्भाव और आस्था को बढ़ाना है।
चाक-चौबंद सुरक्षा, यातायात के लिए डायवर्जन
हनुमंत कथा के आयोजन को देखते हुए बांदा जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। कथा स्थल के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। यातायात को सुचारु रखने के लिए कई प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन लागू किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रशासन का कहना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य, यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी विभाग अलर्ट मोड पर हैं।
पहले दिन ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
हनुमंत कथा के पहले ही दिन बांदा के मवई बाईपास के पास बने विशाल कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दराज के गांवों और बुंदेलखंड के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त कथा सुनने पहुंचे। पंडाल का विशाल क्षेत्र श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आया।
आयोजन में समाज और संगठनों की अहम भूमिका
बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन और समाजसेवियों का सहयोग
इस पांच दिवसीय हनुमंत कथा के आयोजन में बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन, भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय समाजसेवियों और हनुमंत कथा प्रेमियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आयोजन समिति के अनुसार, कथा को सफल बनाने के लिए हजारों स्वयंसेवक दिन-रात सेवा में लगे हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।
बुंदेलखंड के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
बुंदेलखंड क्षेत्र में हनुमंत कथा का आयोजन एक बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय बाद इस स्तर का आयोजन होने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसी कथाएं युवाओं को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करती हैं।
20 जनवरी तक चलेगी हनुमंत कथा
हनुमंत कथा का आयोजन 16 जनवरी से शुरू होकर 20 जनवरी तक प्रतिदिन निर्धारित समय पर चलेगा। आयोजकों के अनुसार, हर दिन अलग-अलग प्रसंगों के माध्यम से भगवान हनुमान के जीवन, उनके आदर्श और रामभक्ति की कथा सुनाई जाएगी।
धीरेंद्र शास्त्री ने अंत में कहा कि यह कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि इसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है। सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति ही हनुमान जी के चरित्र की सच्ची सीख है।

