पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बाजार खुलने के साथ ही कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के कारण वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल बन गया है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ने से बाजार में दबाव और ज्यादा दिखाई दिया। खासकर बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखी गई।
उत्तर प्रदेश के कई निवेशक और ट्रेडर्स भी इस गिरावट को लेकर सतर्क नजर आए। लखनऊ, कानपुर और नोएडा जैसे शहरों में छोटे निवेशकों ने बाजार की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब स्थानीय निवेशकों तक भी पहुंच रहा है।
वैश्विक तनाव का बाजार पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इस स्थिति का असर एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है। जब भी वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है, निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं। इसी वजह से शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।
शुक्रवार के कारोबार में भी यही देखने को मिला। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स के कई प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट आई, जिससे सूचकांक नीचे खिसक गया। निफ्टी में भी बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सावधानी से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं और बाजार में जोखिम लेने से बच रहे हैं।
छोटे निवेशकों पर भी पड़ा असर
शेयर बाजार में गिरावट का असर केवल बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं रहता। छोटे निवेशक भी इससे प्रभावित होते हैं। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में निवेश करने वाले लोगों का कहना है कि हाल की गिरावट से उनके निवेश पर भी असर पड़ा है।
लखनऊ और नोएडा के कुछ निवेशकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन अचानक आई इस गिरावट ने उन्हें सतर्क कर दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। वैश्विक घटनाओं का असर अस्थायी हो सकता है, लेकिन निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार का रुख काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो बाजार में फिर से स्थिरता आ सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशकों को मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देना चाहिए। बाजार में गिरावट को कई बार निवेश का अवसर भी माना जाता है, लेकिन इसके लिए सही रणनीति और धैर्य जरूरी होता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में कई विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गिरावट अस्थायी हो सकती है। अगर वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
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