लखनऊ KGMU में मजार विवाद, टकराव की आशंका

Digital Desk
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उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow स्थित King George’s Medical University (केजीएमयू) परिसर में एक मजार को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन द्वारा 28 फरवरी तक मजार हटाने की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन संबंधित पक्षों ने रमजान तक इसे हटाने से साफ इनकार कर दिया है। इस स्थिति ने टकराव की आशंका को बढ़ा दिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया जा रहा है। वहीं, कुछ स्थानीय लोग और संबंधित समुदाय के प्रतिनिधि धार्मिक भावनाओं का हवाला देते हुए रमजान तक समय देने की मांग कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में मौजूद अवैध या अस्थायी निर्माणों को हटाने के लिए 28 फरवरी तक की समयसीमा निर्धारित की थी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई परिसर के सुव्यवस्थित विकास और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

हालांकि, मजार से जुड़े पक्षों का कहना है कि पवित्र रमजान माह से पहले इस तरह की कार्रवाई से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि कम से कम रमजान तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।

प्रशासन और पक्षकारों के बीच वार्ता

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के प्रयास हुए हैं। प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि न्यायालय और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, संबंधित पक्षों ने कहा है कि वे शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे पर जल्दबाजी स्वीकार्य नहीं होगी। इस बीच, परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

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सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

संभावित टकराव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई है। परिसर में आने-जाने वालों की निगरानी बढ़ा दी गई है और संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है।

अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ बयानबाजी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ ने प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन किया है, तो कुछ ने धार्मिक संवेदनशीलता को प्राथमिकता देने की बात कही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद और संवेदनशीलता दोनों जरूरी हैं। प्रशासन को जहां कानूनी प्रक्रिया का पालन करना है, वहीं सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कानूनी स्थिति क्या कहती है?

कानूनी जानकारों के अनुसार, सरकारी या शैक्षणिक संस्थानों की भूमि पर किसी भी तरह के अतिक्रमण को हटाने का अधिकार प्रशासन को है, बशर्ते उचित प्रक्रिया का पालन किया जाए। यदि संबंधित पक्ष को आपत्ति है, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में कोई कानूनी याचिका दायर की गई है या नहीं। प्रशासन ने कहा है कि सभी कदम नियमों के तहत उठाए जा रहे हैं।

रमजान नजदीक होने और 28 फरवरी की समयसीमा बीतने के बाद अब सबकी नजर प्रशासन और संबंधित पक्षों के अगले कदम पर है। यदि सहमति नहीं बनती है, तो तनाव बढ़ सकता है।

हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी तरह की अवांछित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी है और शांति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से सहयोग की अपील की गई है।

केजीएमयू परिसर में मजार को लेकर उठा विवाद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर प्रशासनिक कार्रवाई की समयसीमा है, तो दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं का सवाल।

लखनऊ जैसे बड़े शहर में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में संवाद, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य ही इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं।

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