UP tourism department को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर लगे पोल और सांकेतिक (साइन) बोर्ड जर्जर हालत में हैं, जिससे पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ये बोर्ड अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं और उनका असली उद्देश्य पूरी तरह खत्म हो चुका है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि सही मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। खासतौर पर बाहर से आने वाले पर्यटक भ्रमित हो जाते हैं, जिससे उनका अनुभव प्रभावित होता है।
जगह-जगह खराब हालत में संकेतक
पर्यटन स्थलों के आसपास लगाए गए कई संकेतक बोर्ड टूटे-फूटे या झुके हुए नजर आते हैं। कई जगहों पर तो बोर्ड पर लिखी जानकारी पूरी तरह मिट चुकी है, जिससे उनका उपयोग करना लगभग असंभव हो गया है।
बारिश, धूप और रखरखाव की कमी के कारण इन बोर्डों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। कई पोल जंग खाकर कमजोर हो चुके हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा भी बना हुआ है।
पर्यटकों को नहीं मिल रहा सही मार्गदर्शन
इन खराब संकेतकों के कारण पर्यटकों को रास्ता समझने में दिक्कत होती है। खासकर ऐसे लोग जो पहली बार किसी शहर या पर्यटन स्थल पर आते हैं, उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
डिजिटल मैप्स के बावजूद, ग्राउंड लेवल पर सही संकेतकों का होना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में इनकी खराब स्थिति सीधे तौर पर पर्यटन अनुभव को प्रभावित कर रही है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
प्रशासन से कई बार की जा चुकी शिकायत
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का आरोप है कि पर्यटन विभाग केवल कागजों पर योजनाएं बना रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पर्यटन छवि पर पड़ रहा असर
इस तरह की लापरवाही से न केवल पर्यटकों को परेशानी होती है, बल्कि राज्य की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। जब पर्यटकों को बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो वे दोबारा आने से भी बचेंगे।
पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल
रखरखाव की कमी बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या की सबसे बड़ी वजह रखरखाव की कमी है। एक बार संकेतक बोर्ड लगा दिए जाते हैं, लेकिन उनकी नियमित देखभाल नहीं की जाती।
Uttar Pradesh Tourism Department की जिम्मेदारी है कि वह समय-समय पर इन सुविधाओं का निरीक्षण करे और जरूरत के अनुसार मरम्मत कराए।
योजनाओं और हकीकत में अंतर
सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर सीमित नजर आ रहा है। संकेतक बोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी इस बात का संकेत है कि अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है।
समाधान की दिशा में क्या हो सकता है?
नियमित निरीक्षण और रखरखाव जरूरी
इस समस्या के समाधान के लिए सबसे जरूरी है कि संकेतक बोर्ड और पोल का नियमित निरीक्षण किया जाए। खराब हो चुके बोर्डों को तुरंत बदला जाए और नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए।
डिजिटल और स्मार्ट साइन सिस्टम
आज के दौर में स्मार्ट साइन बोर्ड और डिजिटल गाइड सिस्टम भी अपनाए जा सकते हैं। इससे पर्यटकों को बेहतर जानकारी मिलेगी और उनका अनुभव भी सुधरेगा।
उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास तभी सफल होंगे जब बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। जर्जर पोल और बेकार हो चुके सांकेतिक बोर्ड न केवल पर्यटकों को भ्रमित कर रहे हैं, बल्कि राज्य की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
Uttar Pradesh Tourism Department को इस दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधा और सही मार्गदर्शन मिल सके।
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