सेंसेक्स 350 अंक टूटा, बाजार गिरने के 5 बड़े कारण

Digital Desk
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भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार के दौरान तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह मजबूती के साथ खुलने के बाद सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर से करीब 350 अंक फिसल गया, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी दिखी थी, लेकिन दोपहर के बाद अचानक बिकवाली बढ़ने से बाजार दबाव में आ गया।

निफ्टी में भी कमजोरी देखने को मिली और कई दिग्गज शेयरों में मुनाफावसूली का असर साफ दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू और वैश्विक संकेतों के मिश्रित असर के कारण यह गिरावट देखने को मिली।लगातार कई सत्रों की तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी। बड़े शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार पर दबाव बढ़ गया। विशेष रूप से बैंकिंग और आईटी सेक्टर में निवेशकों ने लाभ बुक किया, जिससे सेंसेक्स नीचे आ गया

अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और महंगाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।

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निफ्टी गिरावट कारण

 विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से हुई बिकवाली भी बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण रही। हाल के दिनों में एफआईआई का निवेश घटने से बाजार की धारणा कमजोर हुई है।

प्रमुख सेक्टरों में कमजोरीआईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में गिरावट का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा।

 बजट और नीतिगत फैसलों से पहले सतर्कता

आगामी आर्थिक घोषणाओं और नीतिगत फैसलों से पहले निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। अनिश्चितता के माहौल में बड़े निवेश से बचते हुए कई निवेशकों ने बाजार से आंशिक निकासी की।

बाजार में आई गिरावट के दौरान बैंकिंग, आईटी और धातु क्षेत्र के कई दिग्गज शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। कुछ बड़े शेयरों में 1 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। वहीं, कुछ डिफेंसिव सेक्टर जैसे एफएमसीजी और फार्मा ने बाजार को आंशिक सहारा दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की दिशा फिलहाल वैश्विक संकेतों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट को शॉर्ट टर्म करेक्शन के रूप में देखा जा सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है और निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।

आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की चाल तय करेंगी। इसके अलावा, घरेलू आर्थिक आंकड़े और कॉरपोरेट नतीजे भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल, बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक आधार के कारण लंबी अवधि में भारतीय बाजार की स्थिति सकारात्मक बनी रह सकती है।

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