रक्षक बना भक्षक: जिस बहन की उंगली पकड़ चलना सिखाया, उसी की ले ली जान, अब फूट-फूटकर रो रहा भाई

Editorial
7 Min Read

फतेहपुर में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया है। जिस भाई ने बचपन में अपनी बहन की उंगली पकड़कर उसे चलना सिखाया, उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा और उसके लिए दुनिया से लड़ने को तैयार रहता था, उसी भाई ने एक पल के गुस्से और सामाजिक दबाव में आकर अपनी बहन की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म कर दी। अब वही भाई सलाखों के पीछे बैठा अपने किए पर पछता रहा है, लेकिन वक्त उसके हाथों से निकल चुका है। थरियांव थाना क्षेत्र के हसवा कस्बे में हुई यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है, बल्कि रिश्तों के टूटने, सामाजिक दबाव और गुस्से के उस भयानक अंजाम की कहानी है, जिसने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। घर में कभी हंसी-खुशी का माहौल रहता था। भाई संदीप सिंह यादव अपनी बहन मंजू उर्फ रंजू से बेहद प्यार करता था। परिजनों और आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों के बीच गहरा लगाव था। संदीप बहन की पढ़ाई-लिखाई से लेकर उसकी शादी तक की जिम्मेदारियों को लेकर हमेशा गंभीर रहता था। रंजू की शादी इसी साल एक मई को राधानगर थाना क्षेत्र के सोनही बड़नपुर निवासी पिंटू उर्फ अजय के साथ हुई थी। शादी के बाद वह पहली बार चौथी की रस्म के लिए मायके आई थी। लेकिन इस दौरान परिवार के सामने एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने धीरे-धीरे पूरे घर की शांति छीन ली। बताया जा रहा है कि रंजू का गांव के ही एक युवक से पहले से परिचय था और शादी के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा। इसी बात को लेकर परिवार और ससुराल पक्ष के बीच तनाव बढ़ता गया। परिजनों के मुताबिक, रंजू अपनी जिद पर अड़ी हुई थी, जबकि परिवार समाज में हो रही चर्चा और तानों से परेशान था। आरोपी भाई ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि लोग परिवार को लेकर तरह-तरह की बातें करते थे। ससुराल पक्ष में भी विवाद बढ़ गया था और बहनोई तलाक तक देने की बात करने लगा था। इन सब बातों ने उसे मानसिक रूप से परेशान कर दिया था। लेकिन शायद उसे यह अंदाजा नहीं था कि गुस्से में उठाया गया एक कदम उसकी पूरी जिंदगी को बर्बाद कर देगा।

पुलिस के मुताबिक, 12 जून की रात संदीप अपनी बहन को ससुराल छोड़ने के बहाने घर से निकला। रास्ते में दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई। आरोप है कि इसी दौरान संदीप ने अपनी बहन का गला दबा दिया। जब उसकी मौत हो गई तो उसने शव को एक कुएं में फेंक दिया और घर लौट आया। कुछ समय तक उसने इस घटना को छिपाने की कोशिश की, लेकिन अंततः उसका मन उसे धिक्कारने लगा।शनिवार को वह खुद हसवा पुलिस चौकी पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी युवती की मौत गला दबाकर किए जाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद रविवार को आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। शनिवार रात जब वह थरियांव थाने की हवालात में बंद था, तब पहली बार उसे अपने अपराध की गंभीरता का एहसास हुआ। रात करीब 11 बजे हवालात से सिसकियों की आवाज आने लगी। ड्यूटी पर तैनात संतरी ने जब उससे पूछा कि क्या हुआ, तो वह रोते हुए बोला, “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। वो मेरी बहन थी। अगर मैं उसे प्यार से समझाता तो शायद वह मान जाती।”बताया जाता है कि इसके बाद वह लगातार रोता रहा। उसने कहा कि बचपन में जिस बहन की उंगली पकड़कर उसे चलना सिखाया, जिसकी हर खुशी के लिए वह घरवालों से लड़ जाता था, आज उसी को उसने हमेशा-हमेशा के लिए खुद से दूर कर दिया। वह बार-बार यही दोहराता रहा कि काश उस रात उसे इतना गुस्सा नहीं आया होता। घटना के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की, तो कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने सभी को भावुक कर दिया। जिस कुएं से युवती का शव बरामद हुआ, उसके चबूतरे पर टूटी हुई चूड़ियां बिखरी पड़ी थीं। आशंका जताई जा रही है कि अंतिम समय में रंजू ने खुद को बचाने की कोशिश की होगी और संघर्ष के दौरान उसकी चूड़ियां टूट गईं। फॉरेंसिक टीम ने इन चूड़ियों समेत अन्य साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।एक और बात जिसने लोगों को भावुक कर दिया, वह थी रंजू के हाथ पर लिखा उसका नाम। बताया जा रहा है कि उसके हाथ पर भाई संदीप का नाम और उससे जुड़ी यादें दर्ज थीं। यह देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। लोगों के लिए यह स्वीकार करना मुश्किल था कि जिस भाई-बहन के प्रेम और लगाव की चर्चा पूरे कस्बे में होती थी, उनका रिश्ता इस दर्दनाक अंजाम तक पहुंच जाएगा।आज हसवा कस्बे में हर कोई इसी घटना की चर्चा कर रहा है। लोग कह रहे हैं कि अगर गुस्से की जगह बातचीत होती, अगर समाज के डर से ऊपर उठकर रिश्तों को समझा जाता, तो शायद आज एक बहन जिंदा होती और एक भाई हवालात में बैठकर आंसू न बहा रहा होता। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि क्रोध का एक क्षण, पूरी जिंदगी की खुशियां छीन सकता है। अब पछतावे के आंसू बहाने वाला भाई चाहे जितना रो ले, लेकिन उसकी बहन कभी वापस नहीं आएगी।

read on:https://news7hindi.com/there-was-panic-in-lucknow-due-to-the-information-of-bomb-high-alert-dog-squad-and-security-agencies-took-charge-at-aishbagh-railway-station/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

 

Share This Article
Leave a Comment